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पात्रों के अनुसार भाषा का प्रयोग करने में कुशल थे मुंशी प्रेमचंद, उनके पात्र सभी वर्गों के रहे हैं

- साहित्यकारों ने मुंशी प्रेमचंद और गायक मोहम्मद रफी को याद करने रखा कार्यक्रम भास्कर संवाददाता | झाबुआ अखिल...

Bhaskar News Network | Last Modified - Aug 03, 2018, 03:50 AM IST

पात्रों के अनुसार भाषा का प्रयोग करने में कुशल थे मुंशी प्रेमचंद, उनके पात्र सभी वर्गों के रहे हैं
- साहित्यकारों ने मुंशी प्रेमचंद और गायक मोहम्मद रफी को याद करने रखा कार्यक्रम

भास्कर संवाददाता | झाबुआ

अखिल भारतीय साहित्य परिषद के बैनर तले रखे गए कार्यक्रम में साहित्यकारों ने मुंशी प्रेमचंद और आवाज के जादूगर मोहम्मद रफी को याद किया। आयोजन वरिष्ठ साहित्यकार डॉ. रामशंकर ‘चंचल’ के निवास पर हुआ।

मुख्य अतिथि डॉ. ‘चंचल’ थे। अध्यक्षता साहित्यकार भेरूसिंह चौहान ‘तरंग’ ने की। शायर एजाज नाजी धारवी विशेष अतिथि के रूप में मौजूद थे। मां सरस्वती व मुंशी प्रेमचंद के चित्र पर माल्यार्पण कर कार्यक्रम शुरू हुआ। आयोजन के प्रथम सत्र में मुंशी प्रेमचंद एवं मोहम्मद रफी के व्यक्तित्व व कृतित्व पर प्रकाश डाला। दूसरे सत्र में काव्य गीत-गजल की महफिल जमी। तरंग ने कहा मुंशी प्रेमचंद का मूल नाम धनपत राय था। लेकिन उर्दू में नवाब राय और हिन्दी में मुंशी प्रेमचंद के नाम से साहित्य रचना की। ‘हंस’ और ‘माधुरी’ ख्यात पत्रिका के संपादक भी रहे। उनकी कहानियों में राष्ट्रीयता की गंगा, आदर्श की यमुना एवं समाज सुधार की सरस्वती की त्रिवेणी बहती है। डॉ. ‘चंचल’ ने बताया मुंशी प्रेमचंद उनके जीवन के आदर्श गुरु रहे हैं। उनकी कहानियों से प्रेरणा लेकर आज जो स्थान उन्हें मिला है वह उनकी कहानियों से प्रेरित होकर ही हासिल किया। पात्रों के अनुसार भाषा का प्रयोग करने में वे कुशल थे। उनके पात्र सभी वर्गों के रहे हैं। वे सभी वर्गों के प्रशंसा पात्र बने। एजाज नाजी धारवी ने मोहम्मद रफी को याद करते हुए कोई सागर दिल का बहलाता नहीं दिल को छूने वाला गीत प्रस्तुत किया। अवधेश त्रिवेदी ने ‘अकेले हैं चले आओ जहां हो’ के साथ अन्य गीतों की भी प्रस्तुति दी। ओमप्रकाश बैरागी ने ‘झाडू’ पर रचित व्यंग्यात्मक रचना से गुदगुदाया। रमेशदास वैरागी ने नदी किनारे गांव रे, खूब चलाओ नाव रे’ सुनाकर सभी का मन मोह लिया। भेरूसिंह चौहान ‘तरंग’ ने गली-गली में घूम रहे है नेताजी मेरे गांव में मांग रहे हैं वोट सभी से खड़े हुए चुनाव के माध्यम से नेता पर व्यंग्यात्मक प्रहार किया। भावेश त्रिवेेदी ने भी अपनी रचना सुनाई।

काव्य संग्रह का विमोचन किया

कार्यक्रम में रमेशदास वैरागी के ‘काव्य संग्रह’ ‘उधार’ का अतिथियों द्वारा विमोचन भी किया गया। विमोचन के दौरान डॉ. रामशंकर ‘चंचल’ ने कहा रमेशदास वैरागी का काव्य संग्रह सरल-सहज है। नई कविता को हिंदी साहित्य में वृद्धि करती है। कविताओं के नए आयाम को छूती है। तत्पश्चात ‘उधार’ काव्य संग्रह की प्रतियां साहित्यकारों एवं उपस्थित श्रोताओं को वितरित की गई।

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