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पहले श्रावक सिर ढंका व पैर खुले रखते थे, अब सिर खुला और पैर जूतों में बंद है

Jhabua News - झाबुआ. स्थानीय बावन जिनालय में चल रहे चातुर्मास के दौरान आयंबिल करती श्राविकाएं। भास्कर संवाददाता |...

Dainik Bhaskar

Aug 03, 2018, 03:50 AM IST
पहले श्रावक सिर ढंका व पैर खुले रखते थे, अब सिर खुला और पैर जूतों में बंद है
झाबुआ. स्थानीय बावन जिनालय में चल रहे चातुर्मास के दौरान आयंबिल करती श्राविकाएं।

भास्कर संवाददाता | झाबुआ/पेटलावद

चातुर्मास में स्थानीय बावन जिनालय में रोजाना प्रवचन हो रहे हैं। गुरुवार को साध्वीश्री पुनीत प्रज्ञा श्रीजी ने पच्चखाण का महत्व बताया। उन्होंने कहा छोटे बच्चे जो स्कूल जाते हैं उन्हें भी अनुकूलता अनुसार धारणा पच्चखाण कराएं तो उनमें बचपन से ही संस्कार आते हैं। वे जीन आज्ञा का पालन करते हैं।

साध्वीश्री ने कहा कहा बीमारी में दवाई ली जा सकती है। अगर आप किसी व्रत में हो तब भी कुछ नियमों का पालन करते हुए। शांत सुधारस प्रवचन में पुनीत प्रज्ञा श्रीजी ने कहा पहले और अब में कितना फर्क आ गया है। पहले श्रावक सिर ढंका व पैर खुले रखते थे। अब सिर खुला व पैर जूतों में बंद हैं। पहले भगवान घर में व मनोरंजन के साधन बाहर होते थे अब भगवान मंदिर में व टीवी मोबाइल घर में हैं। इसीलिए सब के मन को शांति नहीं है। सब तरफ अशांति व दिखावा है। भौतिक साधनों में लिप्त रहने से भगवान का स्मरण भी मन से नहीं कर पाते। इसलिए उन्होंने सभी से आग्रह किया कि अपने बच्चों में अभी से सुसंस्कार विकसित करें। श्रीपाल राजा, कुरगुड मुनि, प्रवंजना रानी, गुणसागर आदि के उदाहरण से साध्वीजी ने नियमों व संस्कारों के फल के बारे में समझाया। दोपहर में हुए शिविर में साध्वीश्री ने चौदह राजलोक के स्वरूप के बारे में जानकारी दी।

पेटलावद में भी हो रही तपस्याएं- जैन श्वेतांबर तेरापंथ धर्मसंघ के आचार्य महाश्रमणजी की सुशिष्या साध्वी कीर्तिलताजी आदि ठाणा 4 के सान्निध्य में तपस्याओं का क्रम चल रहा है। साध्वीवृन्द की प्रेरणा से चतुर्मास के प्रारंभ में ही तपस्या की पचरंगी संपन्न हुई। 13 वर्षीय दीया मूणत ने 8 उपवास का प्रत्याख्यान संकल्प ग्रहण किया।

इधर... दाहोद में चल रहा है 45 दिनी भक्तांबर सम्यकज्ञान शिक्षण शिविर

झाबुआ. समीपस्थ राज्य गुजरात के दाहोद नगर में भी चातुर्मास चल रहा है। दिगंबर जैन समाज द्वारा रोजाना धार्मिक कार्यक्रम किए जा रहे हैं। समाज के युवा दिपांशु जैन ने बताया मुनिश्री आचार्य विमदसागर महाराज एवं अन्य मुनि मंडल के चातुर्मास प्रवास के दौरान 45 दिवसीय भक्तांबर सम्यकज्ञान शिक्षण शिविर का आयोजन किया जा रहा है। शिविर के चौथे दिन आचार्य श्री ने समाजजनों को प्रवचन का श्रवण कराते हुए कहा भगवान के गुण चंद्रमा के समान उज्जवल है और हमारे अवगुण केतु के समान काले हैं। जितने भगवान के गुण है, उतने ही हमारे अवगुण है। जो श्रद्धावान, विवेकवान, क्रियावान हो वही श्रावक कहलाता है। आचार्य श्री ने संस्कारों पर विशेष जोर देते हुए कहा की अपने बच्चों को कमंडल पकड़ना नहीं सिखाया, संस्कार नहीं दिए तो वह दुर्गुण की ओर बढ़ेगा। प्रवचन श्रवण करने अहमदाबाद, कोटा सहित अन्य स्थानों से भी समाजजन पहुंचे।

पहले श्रावक सिर ढंका व पैर खुले रखते थे, अब सिर खुला और पैर जूतों में बंद है
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