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काेना पकड़ते ही दो टुकड़ों में बंट गया कागज का स्मार्ट कार्ड, आखिर मजदूर कैसे संभालेगा

Jhabua News - असंगठित श्रमिकों को देने के लिए जो रजिस्ट्रेशन कार्ड (स्मार्ट कार्ड) बन कर आए हैं, वे चौंकाने वाले हैं। कार्ड कागज...

Dainik Bhaskar

Jul 27, 2018, 03:55 AM IST
काेना पकड़ते ही दो टुकड़ों में बंट गया कागज का स्मार्ट कार्ड, आखिर मजदूर कैसे संभालेगा
असंगठित श्रमिकों को देने के लिए जो रजिस्ट्रेशन कार्ड (स्मार्ट कार्ड) बन कर आए हैं, वे चौंकाने वाले हैं। कार्ड कागज के बने हैं, लेमिनेशन किया हुआ है लेकिन कोने बंद नहीं हैं। इस कारण बीच में से पकड़ते ही कार्ड उखड़ कर दो हिस्सों में खुल रहा है। बड़ा सवाल यह है कि इस बारिश में बाहर मजदूरी करने वाले श्रमिकों से इस क्वालिटी के कार्ड को सहेज कर रखने की उम्मीद जिला प्रशासन कैसे कर सकता है। बारिश में भीगते ही लेमिनेशन के बीच का कागज भीगा कि कार्ड खराब हो जाएगा। राज्य शासन ने स्मार्ट कार्ड को एक सुविधा के रूप में मजदूरों को देने के लिए प्रति कार्ड के लिए 10 रुपए तक का बजट स्वीकृत किया था लेकिन जिला पंचायत ने 2.82 रुपए में कागज के स्मार्ट कार्ड बनाने का ठेका देकर खानापूर्ति कर डाली। कार्ड वितरण के पहले यह भी नहीं देखा जा रहा है कि जो सेंपल स्वीकृत हुए थे, बांटे जा रहे कार्ड उसी तरह के हैं या नहीं। सेंपल बंद कोने वाले कार्ड के दिखाए गए, बांटे जा रहे कार्ड में कोने खुले हैं, जिससे कागज सीधे पानी के संपर्क में आएगा। कार्ड बंट जाने के बाद संबंधित अधिकारी दिखवाने की बातें कह कर जिम्मेदार होने का दिखावा कर रहे हैं।

3.30 लाख असंगठित श्रमिकों को बांटे जाने हैं कार्ड

राज्य शासन ने असंगठित श्रमिकों के लिए योजना शुरू की हैं। इनमें असंगठित श्रमिकों को हर स्तर पर लाभ दिए जा रहे हैं। इसे विधानसभा चुनावों में जाने से पहले सरकार द्वारा खेला गया ट्रंप कार्ड भी कहा जा रहा है। झाबुआ जिले की 10.25 लाख आबादी में से 4 लाख 6 हजार 909 लोगों ने पंजीयन के लिए आवेदन किया था, जिनमें से 3 लाख 30 हजार 461 का पंजीयन अब तक हो चुका है। इन सभी को रजिस्ट्रेशन कार्ड (स्मार्ट कार्ड) दिए जाने हैं।

पर्याप्त बजट था फिर भी कागज के कार्ड बनवाए : शासन ने प्रति कार्ड 10 रुपए तक का बजट रखा है। अच्छी गुणवत्ता के कार्ड श्रमिकों को देने के लिए पर्याप्त बजट दिया गया लेकिन झाबुआ जिला पंचायत ने कागज के कार्ड बनाने के टेंडर निकाले। पिछले महीने जब निविदाएं खोली गईं, तो सभी छह टेंडर डालने वालों से पीवीसी के कार्ड की दरें भी ले लीं। पीवीसी कार्ड की दरों के टेंडर भी खोले गए लेकिन कार्यादेश कागज के ही कार्ड बनवाने के दिए गए। दरें अधिक होने से जिन पांच फर्म को काम नहीं मिला, उन्होंने पीवीसी कार्ड का आदेश देकर कागज के कार्ड छपवाने के आरोप लगाए।

किसी में पति का नाम तो किसी में पता गायब

आधार पंजीयन के दौरान हुई त्रुटियों के कारण जिस प्रकार से आज लोग जानकारी में संशोधन के लिए बैंकों में धक्के खा रहे हैं, वही असंगठित श्रमिकों के कार्ड बनाने में भी दाेहराया जा रहा है। जो कार्ड बन कर आए हैं, उनमें किसी में पति का नाम नहीं है तो किसी में पता नहीं छपा है। बुधवार को झाबुआ नगरपालिका ने 2600 कार्ड का वितरण करने के लिए कार्यालय में शिविर लगाया। यहां जो कार्ड बांटे गए, उनमें ढेरों त्रुटियां हैं, जिनमें से प्रमुख ये हैं-वार्ड क्रमांक 7 के मुस्तफा मंसूरी के कार्ड में पिता का नाम व मोबाइल नंबर नहीं है। वार्ड 16 की अकीला बी के कार्ड में पति का नाम व मोबाइल नंबर नहीं है, जन्म तारीख भी गलत लिखी है। वार्ड 9 के महेश चौहान के कार्ड में पिता का नाम व मोबाइल नंबर नहीं है। वार्ड 18 की जमुनाबाई यादव के कार्ड में पति का नाम व मोबाइल नंबर नहीं है।

श्रमिकों को दिए गए कार्ड इस तरह कोने से उखड़ रहे हैं।

सीधी बात

जमुना भिड़े, सीईओ जिपं

पीवीसी व कागज दोनों तरह के स्मार्ट कार्ड के रेट लिए गए थे। कार्यादेश पीवीसी के दिए हैं या कागज के?

-कागज के ही कार्ड बनाने के कार्यादेश दिए हैं।

कुछ जिलों में पीवीसी कार्ड बने हैं, शासन के निर्देश क्या हैं?

-शासन के निर्देश थे कि पीवीसी के कार्ड बनवाने हो तो बनवा सकते हैं। गाइडलाइन कागज के कार्ड बनवाने की ही थी।

लेमिनेशन ऐसा है कि कोने पकड़ते ही कार्ड खुल रहा है, बारिश में मजदूर कैसे संभालेंगे?

-सेंपल में कोने बंद कार्ड दिखाए थे। सेंपल से अलग कार्ड बांटे गए हैं तो मैं दिखवाती हूं। ऐसे कार्ड वापस बुलवाएंगे। सभी को कहा था कि चेक करने के बाद ही बंटवाएं।

लाइन में लगना पड़ेगा?

श्रमिकों को जो कार्ड वितरित किए जा रहे हैं वो उच्च क्वालिटी के नहीं हैं। यदि यह जल्द खराब हो गए तो सवाल ये है कि आधार की तरह सुधार के लिए यहां भी लाइन में लगना पड़ेगा क्या।

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