• Home
  • Madhya Pradesh News
  • Jhabua News
  • पूर्णिमा की रात दिखेगा खग्रास चंद्रग्रहण, दान-पुण्य करें
--Advertisement--

पूर्णिमा की रात दिखेगा खग्रास चंद्रग्रहण, दान-पुण्य करें

आषाढ़ पूर्णिमा पर 27 जुलाई की रात खग्रास (पूर्ण) चंद्रग्रहण होगा। यह पूरे देश में दिखेगा। इस ग्रहण का प्रभाव चार...

Danik Bhaskar | Jun 27, 2018, 04:00 AM IST
आषाढ़ पूर्णिमा पर 27 जुलाई की रात खग्रास (पूर्ण) चंद्रग्रहण होगा। यह पूरे देश में दिखेगा। इस ग्रहण का प्रभाव चार राशियों मेष, सिंह, वृश्चिक और मीन के लिए श्रेष्ठ है। वहीं मिथुन, तुला, मकर और कुंभ के लिए यह चंद्रग्रहण नेष्ट है। इन राशि वाले लोग ग्रहण के दौरान भगवान शिव और हनुमान की आराधना कर ग्रहण के प्रभाव को अनुकूल बना सकते हैं।

ज्योतिषी पं. हिमांशु शुक्ल ने बताया कि खग्रास चंद्रग्रहण का ग्रह गोचर के अनुसार अलग-अलग प्रभाव होगा। ग्रह गोचर में मकर राशि के केतु के साथ चंद्रमा का प्रभाव और राहु से उसका समसप्तक दृष्टि संबंध होना, युति कृत मान से कर्क राशि में राहु, सूर्य, बुध तथा मकर राशि में चंद्र, केतु, मंगल युति कृत दृष्टि संबंध होना, दो तरफा केंद्र योग का बनना और शनि व मंगल का वक्री होना अपने आप में विशेष घटना है। हालांकि यह अच्छा नहीं माना जाता है। इसका प्रभाव आमतौर पर ग्रहण के सात दिन से लेकर तीन महीने तक देखा जाता है। चंद्रग्रहण पर सभी को दान-पुण्य करना चाहिए। इसका बड़ा लाभ मिलता है।

आषाढ़ पूर्णिमा 27 जुलाई को, ज्योतिषियों के अनुसार चार राशियों के लिए श्रेष्ठ और चार के लिए नेष्ट रहेगा

खग्रास चंद्रग्रहण कब से कब तक

27 व 28 जुलाई को। 3 घंटे 55 मिनट का खग्रास चंद्रग्रहण। सूतक आषाढ़ पूर्णिमा 27 जुलाई को ग्रहण प्रारंभ होने (स्पर्श) के तीन प्रहर (9 घंटा) पहले प्रारंभ होगा, मोक्ष तड़के 3.55 बजे, ग्रहण स्पर्श रात 11:45 बजे, ग्रहण सम्मिलन रात 1 बजे, उन्मूलन रात 2:45 बजे।

जानिए, ग्रहण के समय क्या करें और क्या न करें

सूर्यग्रहण में ग्रहण के 4 पहर पूर्व और चंद्र ग्रहण में 3 पहर पूर्व भोजन नहीं करना चाहिए। बुजुर्ग, बालक और रोगी डेढ़ प्रहर पूर्व तक खा सकते हैं। ग्रहण-वेद के पहले जिन पदार्थों में कुश या तुलसी की पत्तियां डाल दी जाती हैं, वे पदार्थ दूषित नहीं होते। ग्रहण वेद के प्रारंभ में तिल या कुश मिश्रित जल का उपयोग भी अत्यावश्यक परिस्थिति में ही करना चाहिए। ग्रहण शुरू होने से अंत तक अन्न या जल नहीं लेना चाहिए।