• Hindi News
  • Madhya Pradesh
  • Jhabua
  • 3 साल बाद भी स्वीकृत नहीं हुई सड़क, किसानों ने चंदा इकट्ठा कर शुरू किया काम
--Advertisement--

3 साल बाद भी स्वीकृत नहीं हुई सड़क, किसानों ने चंदा इकट्ठा कर शुरू किया काम

खेतों तक जाने वाली दो-दो किमी की दो सड़कों को तीन साल बाद भी मंजूरी नहीं मिली तो किसानों ने खुद ही इसे बनाने का फैसला...

Dainik Bhaskar

Jul 09, 2018, 04:00 AM IST
3 साल बाद भी स्वीकृत नहीं हुई सड़क, किसानों ने चंदा इकट्ठा कर शुरू किया काम
खेतों तक जाने वाली दो-दो किमी की दो सड़कों को तीन साल बाद भी मंजूरी नहीं मिली तो किसानों ने खुद ही इसे बनाने का फैसला कर लिया। अब वे बिना किसी सरकारी मदद के अपनी मेहनत व चंदे से सड़क को चलने और ट्रैक्टर चलाने लायक बना रहे हें, ताकि पहिये कीचड़ में ना फंसे। युवा शिक्षित किसानों का यह कदम अन्य गांवों के लिए भी उदाहरण बनकर सामने आया है।

हम बात कर रहे हैं पेटलावद विकासखंड से सात किमी दूर ग्राम कोदली की। यहां के करीब 125 किसान खेतों की ओर जाने वाली कच्ची सड़कों की वजह से परेशानी उठा रहे हैं। किसानों के हित की बात करने वाला सरकारी तंत्र दो-दो किमी के दो मार्ग को ही पक्का नहीं कर पाया। कोदली के गुंदावाला मार्ग और पिपरावाला मार्ग पर किसानों के खेत हैं। बारिश के दिनों में कच्ची सड़क कीचड़ में तब्दील हो जाती है। लिहाजा इस पर गुजरने वाले किसानों के ट्रैक्टर फंस जाते हैं। पैदल चलना भी दुश्वार हो जाता है। किसान तीन साल से इन दाेनों सड़क पर डामरीकरण या सीसी करने की मांग कर रहे हैं, लेकिन ना ग्राम पंचायत ने ध्यान दिया ना ही जनपद पंचायत के अधिकारियों ने। किसान सरकारी कार्यालय के चक्कर लगा लगाकर थक गए। जनप्रतिनिधियों ने भी किसानों की पीड़ा नहीं समझी। हर साल आने वाली इस परेशानी का हल अब खुद किसानों ने निकाल लिया है। वे खुद ही इस कीचड़भरी राह को आसान करने में जुट गए हैं।

60 किसान और 15 ट्रैक्टर लगे हैं सड़क बनाने में

मुरम डालने की शुरुआत तीन दिन पहले पिपरावाला मार्ग से की गई है। समस्या बढ़ने से पहले ही खेती किसानी का काम छोड़कर करीब 60 किसान 15 ट्रैक्टरों की सहायता से मार्ग पर मुरम बिछा रहे हैं। तीन दिन में करीब आधा किमी सड़क पर मुरम बिछा दी गई है। अगर बारिश नहीं हुई तो दो-तीन दिन में पूरे मार्ग पर मुरम बिछा दी जाएगी। इसके बाद गुंदावाला मार्ग पर मुरम डालने का काम शुरू होगा।

जेसीबी को रोज दे रहे 12 हजार रुपएकिराया

मार्ग दुरुस्त करने के लिए 1 लाख रुपए चंदे के रूप में इकट्‌ठे किए हैं। गांव से कुछ दूरी पर माही नहर की खुदाई की गई थी। इसमें निकली मुरम जेसीबी की सहायता से ट्रैक्टर में भरकर ला रहे हैं। तीन दिन से जेसीबी लगी हुई है इसका एक दिन का किराया 12 हजार रुपए देना पड़ रहा है।


पांच लाख रुपए से अधिक खर्च होगा सड़क को बनाने में

कृषक अनिल पाटीदार, विष्णुराम पाटीदार, जगदीश पाटीदार, सुनील पाटीदार, ललित पाटीदार व जितेंद्र पाटीदार ने बताया मार्ग को पूरा बनाने में करीब 5 लाख से अधिक की लागत आएगी। अभी हम किसानों ने ही एक लाख इकट्‌ठे किए हैं। अगर प्रशासन हमारी मदद करने आगे आता है तो ठीक वरना हम और रुपए इकट्‌ठा कर आगे काम भी पूरा करेंगे। सरपंच, सचिव, जपं सीईओ और जनप्रतिनिधियों को 3 साल से परेशानी बता रहे हैं लेकिन कोई ध्यान नहीं दे रहा था।

3 साल बाद भी स्वीकृत नहीं हुई सड़क, किसानों ने चंदा इकट्ठा कर शुरू किया काम
X
3 साल बाद भी स्वीकृत नहीं हुई सड़क, किसानों ने चंदा इकट्ठा कर शुरू किया काम
3 साल बाद भी स्वीकृत नहीं हुई सड़क, किसानों ने चंदा इकट्ठा कर शुरू किया काम
Bhaskar Whatsapp

Recommended

Click to listen..