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एक ही मंदिर में विराजेंगी दशामाता व संत रविदास की प्रतिमा

झाबुआ जिले के गांव खरडूबड़ी में सामाजिक खाई को पाटने के लिए प्रेरक प्रयास किया गया है। रविवार को एक मंदिर की नींव...

Bhaskar News Network | Last Modified - Aug 06, 2018, 04:00 AM IST

एक ही मंदिर में विराजेंगी दशामाता व संत रविदास की प्रतिमा
झाबुआ जिले के गांव खरडूबड़ी में सामाजिक खाई को पाटने के लिए प्रेरक प्रयास किया गया है। रविवार को एक मंदिर की नींव रखी गई जिसमें राजपूत व चर्मकार समाज ने धार्मिक एकजुटता दिखाई। इस मंदिर में दशा माता और संत रविदास की प्रतिमाएं विराजित होगी। अब ये दोनों समाज अन्य समाजों को भी इस मंदिर निर्माण से जोड़ेंगे।

यह गांव झाबुआ जिला मुख्यालय से 12 किमी दूर है। रविवार को गांव के राजपूत राठौर समाज (सवर्ण) और चर्मकार ने झाबुआ-पारा रोड के किनारे मंदिर निर्माण की नींव रख दी। इस ऐतिहासिक पल के साक्षी बनने दोनों समाज के वरिष्ठ भी पहुंचे। विधि-विधान के साथ संत रविदास और दशा माता के जयकारे के बीच नींव भरी गई। समाज का लक्ष्य इस शारदीय नवरात्रि में मंदिर बनाकर दोनों प्रतिमाएं प्रतिष्ठित करने का है। नींव डलने के बाद अब दोनों समाज अन्य समाजों को भी इस अनूठे मंदिर निर्माण से जोड़ेंगे ताकि काम भी जल्द हो सके और सामाजिक समरसता बढ़ सके। भारतसिंह राठौर व दूधिया परमार ने बताया हम एक ऐसा मंदिर बनाने जा रहे हैं जिससे सामाजिक खाई पूरी तरह खत्म हो जाएगी। यह जिले का ऐसा पहला मंदिर होगा जहां दशा माता और संत रविदास एक ही मंदिर में विराजेंगे। सभी समाज के लोग भी एक साथ दर्शन करेंगे।

मंदिर निर्माण की नींव रखते राजपूत राठौर व चर्मकार समाज के सदस्य।

15 लाख रुपए में 2 हजार स्क्वेयर फीट में बनेगा

मंदिर का निर्माण 2 हजार स्क्वेयर फीट में किया जाएगा। इस पर करीब 15 लाख लागत आने का अनुमान है। निर्माण पर आने वाला सारा खर्च ग्रामीण मिलकर उठाएंगे। जन सहयोग भी लिया जाएगा, ताकि जल्द से जल्द काम पूरा किया जा सके। मंदिर में विराजित की जाने वाली दोनों प्रतिमाएं राजस्थान के तलवाड़ा से संग मरमर की बनकर आएगी।

ये भी होगा फायदा

सावन माह की अमावस्या से दशामाता पर्व गांव में धूमधाम से मनाया जाता है। दस दिवसीय महोत्सव के तहत करीब 100 घरों में प्लास्टर ऑफ पेरिस की प्रतिमाएं विराजित की जाती है। इसके बाद इसे सापन नदी में विसर्जित कर दिया जाता है। दशा माता का एक मंदिर बन जाने से इस तरह प्रतिमाओं में कमी आएगी। समाजजन मंदिर जाकर ही पूजा-पाठ करेंगे।

इसलिए दोनों समाज आए साथ

भारतसिंह राठौर ने बताया समय के साथ-साथ कई समाजों में दूरियां बढ़ रही है। कई बार सुना है कि एक समाज के लाेग दूसरे समाज के मंदिर में नहीं जाते। इसलिए हमने निर्णय लिया कि गांव में ऐसा मंदिर बनाएंगे जो एक मिसाल के तौर पर जाना जाएगा। इस मंदिर में भेदभाव के लिए कोई जगह नहीं रहे इसलिए हम दशा माता और संत रविदास की मूर्ति विराजित कर रहे हैं।

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