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बच्चों के हित में किसान ने डेढ़ साल पहले लिया था सकारात्मक निर्णय

गांव के बाहर बनाए गए स्कूल भवन में पीने के लिए पानी नहीं था। प्यून आधा किमी दूर से बाल्टी भरकर लाती तब जाकर...

Bhaskar News Network | Last Modified - Jul 02, 2018, 04:10 AM IST

बच्चों के हित में किसान ने डेढ़ साल पहले लिया था सकारात्मक निर्णय
गांव के बाहर बनाए गए स्कूल भवन में पीने के लिए पानी नहीं था। प्यून आधा किमी दूर से बाल्टी भरकर लाती तब जाकर विद्यार्थियों को पीने का पानी नसीब होता था। एक किसान ने स्कूल की परेशानी समझी और अपने खेत के ट्यूबवेल से पानी देना शुरू कर दिया। डेढ़ साल बीत गया अब तक स्कूल में पीने के पानी की समस्या नहीं आई है। हम बात कर रहे हैं मेघनगर विकासखंड के नरसिंहपुरा हाईस्कूल की। स्कूल में पढ़ने वाले विद्यार्थियों के लिए किसान व पूर्व सरपंच श्यामलाल बारिया जलदूत बनकर सामने आए। उनके एक सकारात्मक निर्णय ने स्कूल में पानी की समस्या पूरी तरह खत्म कर दी है। अधिकारी भी जब स्कूल के दौरे पर आते हैं तो किसान द्वारा की गई इस पहल की सराहना करने से नहीं चूकते। संस्था प्राचार्य केपी सिंह करीब दो साल पहले इस स्कूल में पदस्थ हुए थे। वे बताते हैं तब यहां पीने के पानी की गंभीर समस्या थी। आसपास कोई हैंडपंप भी नहीं था। स्कूल की महिला प्यून आधा किमी दूर से बाल्टी में पानी भरकर लाती थी। तब जाकर विद्यार्थियों को पीने का पानी मिल पाता था। कई बार तो हाथ धोने के लिए भी पानी नहीं मिलता था। स्कूल के समीप ही किसान श्यामलाल का खेत है। करीब डेढ़ साल पहले प्राचार्य सिंह ने किसान को पानी की समस्या बताई। श्यामलाल ने भी बच्चों के हित में पानी देने में देर नहीं की। इसके बाद स्कूल ने खेत से स्कूल की टंकी तक करीब 60 फीट की पाइप लाइन डाल दी। किसान की सकारात्मक सोच ने स्कूल की पानी की समस्या खत्म कर दी है।

स्कूल में नहीं था पीने का पानी, आधा किमी दूर से लाते देख किसान अपने खेत के ट्यूबवेल से देने लगा पानी

स्कूल के ऊपर रखी 2 हजार लीटर की टंकी से विद्यार्थियों को पीने के लिए मिल रहा है पानी।

दो हजार लीटर पानी देता है किसान

स्कूल में कक्षा 9वीं और 10वीं के 110 विद्यार्थी है। पानी के लिए यहां दो हजार लीटर की टंकी रखवाई गई। किसान श्यामलाल अपने ट्यूबवेल से इस पूरी टंकी को भरते हैं। हर एक-दो दिन में टंकी में पानी खत्म हो जाता है। लेकिन जैसे ही श्यामलाल को पानी का कहते हैं वे ट्यूबवेल चालू कर देते हैं।

स्कूल में रोपे गए पौधों को भी सींच रहे हैं

प्राचार्य केपी सिंह ने बताया कि स्कूल परिसर में 12 पेड़ रोपे गए हैं। इसमें नीम, पीपल और करंज के पौधे हैं। नियमित पानी मिलने से अब पौधों की बढ़वार भी तेज हो गई है। उन्होंने बताया स्कूल में पढ़ने वाले विद्यार्थियां को भी पर्यावरण संरक्षण के साथ पानी बचाने की सीख दी जाती है।

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