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5 साल से पहले छात्रों की ड्रेस नहीं बदल सकेंगे निजी स्कूल

फीस, स्कूल ड्रेस व कॉपी-किताब के मामले में प्राइवेट स्कूल अब मनमानी नहीं कर सकेंगे। वे पांच साल तक न तो ड्रेस बदल...

Bhaskar News Network | Last Modified - Jul 02, 2018, 04:10 AM IST

फीस, स्कूल ड्रेस व कॉपी-किताब के मामले में प्राइवेट स्कूल अब मनमानी नहीं कर सकेंगे। वे पांच साल तक न तो ड्रेस बदल सकेंगे न फीस के रूप में वसूल की जाने वाली राशि नकद ले सकेंगे। फीस जमा करने के लिए उन्हें पालकों को बैंक अकाउंट बताना होगा। नया शिक्षण सत्र प्रारंभ होने के 150 दिन पहले नए सत्र की फीस पोर्टल पर डालनी होगी। इसके साथ ही पिछले तीन साल के लाभ हानि की डिटेल भी शिक्षा अधिकारी को बतानी होगी।

इसे लेकर गत माह 26 जून को मप्र निजी विद्यालय फीस अधिनियम का नोटिफिकेशन हो चुका है। अधिनियम को अंतिम रूप देने से पहले एक महीने अर्थात 25 जुलाई तक दावे-आपत्ति भी मांगे गए हैं। इसके बाद नियमों को अंतिम कर दिया जाएगा। गौरतलब है कि कई बार फीस के नाम पर स्कूल संचालकों के परेशान करने की शिकायतें आती रहती है तो कभी स्कूल ड्रेस या कॉपी-किताब एक ही दुकान से खरीदने के नाम पर दबाव बनाने की बातें भी सामने आती है। इस तरह की शिकायतें हर शिक्षण सत्र में आती हैं। प्राइवेट स्कूलों की मनमानी पर लगाम लगाने के लिए ही अधिनियम बना है और अब नियम भी बन जाएंगे। इसके लिए पिछले छह साल से विभाग प्रयास कर रहा था। नए अधिनियम के तहत बने नियम शैक्षणिक सत्र 2018-19 से लागू होंगे। इसके साथ ही दावे-आपत्तियां उप सचिव स्कूल शिक्षा केके द्विवेदी को वल्लभ भवन या फिर ईमेल ds.school@mp.gov.in पर भेजी जाएंगी।

नियम में बदलाव

मप्र निजी विद्यालय फीस अधिनियम का नोटिफिकेशन हुआ, 25 जुलाई तक मांगी गईं आपत्तियां

प्राइवेट स्कूलों के लिए ये भी है नए अधिनियम में

पोर्टल पर फीस की संरचना प्रस्तुत नहीं करने पर लेट फीस के साथ 135 दिन में जानकारी देनी होगी।

जो स्कूल लाभ 10 फीसदी से कम बताकर फीस बढ़ाएंगे, जांच के लिए उनके दस्तावेज जब्त हो सकेंगे।

10 फीसदी की वृद्धि तभी मंजूर होगी जब कोई शिकायत नहीं होगी, अंतिम निर्णय डीईओ लेंगे।

10 से 15 % वृद्धि प्रस्तावित होने पर फीस वृद्धि पर निर्णय 45 दिन मे जिलास्तरीय समिति लेगी।

प्राइवेट स्कूल फीस की डिटेल वेबसाइट पर नहीं डालने पर उन्हें हिंदी-अंग्रेजी में यह बताना होगा।

कोई भी स्कूल छूट के नाम पर एक तिमाही से ज्यादा फीस एक साथ नहीं ले सकेगा।

स्कूल का नाम केवल ड्रेस पर होगा, एक दुकान से ड्रेस, स्टेशनरी खरीदने को विवश नहीं करेंगे।

किताबों की बिक्री के लिए स्कूल परिसर में सरकारी प्रकाशकों की छोटी दुकानें खुल सकेंगी।

जिला स्तर की समिति किसी भी स्कूल में जांच के लिए प्रवेश कर सकेगी।

मनमानी करने पर पहली बार दो लाख, दूसरी बार चार लाख तथा तीसरी बार छह लाख जुर्माना।

स्कूल की शिकायत पालक-छात्र ही कर सकेंगे।

जुर्माना न देने पर इसकी वसूली राजस्व अधिकारियों की मदद से कुर्की और नीलामी के माध्यम से।

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