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गौड़ी पार्श्वनाथ मंदिर से चातुर्मास के लिए हुआ साध्वी मंडल का प्रवेश, धर्मसभा हुई

चातुर्मास के लिए गुरुवार को नगर में साध्वीमंडल का मंगल प्रवेश हुआ। समाजजनों ने शोभायात्रा निकालकर साध्वीश्री की...

Bhaskar News Network | Last Modified - Jul 20, 2018, 10:10 AM IST

गौड़ी पार्श्वनाथ मंदिर से चातुर्मास के लिए हुआ साध्वी मंडल का प्रवेश, धर्मसभा हुई
चातुर्मास के लिए गुरुवार को नगर में साध्वीमंडल का मंगल प्रवेश हुआ। समाजजनों ने शोभायात्रा निकालकर साध्वीश्री की अगवानी की। यात्रा ने शहर में करीब दो किमी भ्रमण किया। इसके बाद बावन जिनालय में धर्मसभा का आयोजन किया गया।

इस वर्ष साध्वीर|ा मणिप्रभाश्रीजी की सुशिष्या साध्वीश्री पुनितप्रज्ञाश्रीजी, प्रमोदयशाश्रीजी, प्रशमरक्षाश्रीजी, लब्धियशाश्रीजी व ऋजुयशाश्रीजी आदिठाणा का चातुर्मास ऋषभदेव बावन जिनालय में होगा। साध्वीमंडल का प्रवेश सुबह 9 बजे जैन तीर्थ श्री गौड़ी पार्श्वनाथ मंदिर से हुआ। यहां से शुरू हुई शोभायात्रा में महिला परिषद, महिला मंडल, बहू मंडल की श्राविकाएं एक जैसी वेशभूषा में सिर पर मंगल कलश लिए चल रही थी। आगे-आगे दादा गुरुदेव का चित्र था। जिसकी जगह-जगह अक्षत व श्रीफल से गहुली की गई। यात्रा राजगढ़ नाका, नेहरू मार्ग, राजवाड़ा चौक, लक्ष्मीबाई मार्ग होते हुए बावन जिनालय पहुंची। यहां श्री संघ व चातुर्मास समिति के पदाधिकारियों ने गहुली कर मंगल प्रवेश कराया। साध्वीश्री पौषधशाला में पधारी, जहां धर्मसभा हुई। साध्वीश्री पुनीत प्रज्ञाश्रीजी ने मंगलाचरण के साथ शुरुआत की। श्राविकाओं ने गुरुवंदना की विधि की। श्री संघ की ओर से स्वागत भाषण श्रीसंघ अध्यक्ष संजय मेहता व चातुर्मास समिति अध्यक्ष तेजप्रकाश कोठारी ने दिया। श्री वर्धमान स्थानकवासी श्री संघ अध्यक्ष प्रदीप रुनवाल एवं तेरापंथ सभा अध्यक्ष पंकज कोठारी ने चातुर्मास में अधिक से अधिक धर्म आराधना करने आह्वान किया। आयोजन में श्री संघ के श्रावकर| धर्मचंद मेहता, भरत बाबेल, मनोज संघवी, संजय कांठी, अनिल रुनवाल, प्रमोद भंडारी, अंतिम जैन, भभुतमल गोखरू, पारा श्री संघ अध्यक्ष मनोहरलाल छाजेड़, आनंदीलाल संघवी, अरविंद लोढ़ा, चंद्रशेखर जैन, रिंकू रुनवाल आदि का सहयोग रहा।

कलश यात्रा के रूप में साध्वीश्री की अगवानी की गई। इसमें समाज की महिलाएं शामिल हुईं।

जिन वाणी श्रवण करने से अज्ञानता दूर होती है

साध्वीश्री पुनीत प्रज्ञाश्रीजी ने कहा भगवान की जिन वाणी इस संसार रूपी समुद्र को पार करने के लिए नाव के समान है। इस जिनवाणी का श्रवण करने से हमारी अज्ञानता दूर होती है। श्रद्धा पैदा होती है। विवेक एवं सत्स प्रदान करने के साथ ही यह जिनवाणी हमें मोक्ष फल प्रदान करने वाली है। उन्होंने कहा सर्व प्रिाम हमें ज्ञान अर्जन करना है। क्योंकि यदि ज्ञान नहीं है तो धर्म क्रिया शून्य है। ज्ञान के साथ की गई धार्मिक क्रिया ही फल प्रदान करने वाली बनती है। उन्होंने बताया चातुर्मास प्रमाद का त्याग कर धर्म आराधना करना है। कार्यक्रम का संचालन डाॅ. प्रदीप संघवी ने किया। आभार चातुर्मास समिति के उपाध्यक्ष मधुकर शाह ने माना।

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