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भूरिया और मेड़ा भगोरिया की गेर में एक ही जगह घूमते रहे... लेकिन अलग-अलग

Dainik Bhaskar

Mar 17, 2019, 03:11 AM IST

Jhabua News - भास्कर संवाददाता | झाबुआ/राणापुर विधानसभा चुनाव के समय से सांसद कांतिलाल भूरिया और पूर्व विधायक जेवियर मेड़ा के...

Jhabua News - mp news bhooriya and mada kept roaming in the geys of bhagoria in a single place but different
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भास्कर संवाददाता | झाबुआ/राणापुर

विधानसभा चुनाव के समय से सांसद कांतिलाल भूरिया और पूर्व विधायक जेवियर मेड़ा के बीच संबंधों में आई खटास अब दूर होती दिख रही है। शनिवार को राणापुर के भगोरिया में निकली एक ही गेर में दोनों दिखाई दिए। दोनों ही खुद को इस लड़ाई में हारा हुआ मानने को तैयार नहीं है। गेर में साथ नहीं चले, आगे-पीछे चलते रहे। कांतिलाल भूरिया का कहना है, जेवियर ने बिना शर्त माफी मांगी। जेवियर का कहना है, कांतिलाल भूरिया ने फोन करके बुलाया था। गेर में भूरिया ने सारे दूसरे नेताओं के साथ फोटो खिंचवाए, लेकिन जेवियर के साथ नहीं।

नाम तय नहीं फिर भी भाजपा बोली, हम जीतेंगे : भाजपा में गुमानसिंह डामोर टिकट के लिए काफी जोर लगा रहे हैं। उनके अलावा निर्मला भूरिया, नागरसिंह चौहान और गोरसिंह वसुनिया भी कोशिश में है। लोकसभा प्रत्याशी के रूप में अभी तक भाजपा ने नाम तय नहीं किया। फिर भी नेता दावा कर रहे हैं कि वो चुनाव जीत जाएंगे। जिलाध्यक्ष ओमप्रकाश शर्मा ने कहा लोग भूरिया के परिवारवाद से तंग आ गए हैं। किसानों की कर्जमाफी नहीं होना हमें बड़ा मुद्दा मिला है। जल्दी ही नाम की घोषणा होगी।

पहले क्या बोले थे, अब क्या बोले भूरिया आैर मेड़ा

राणापुर भागाेरिया हाट में मांदल बजाते कांतिलाल भूरिया।



इसलिए है तल्खी : दोनों नेताओं में तल्खी की बड़ी वजह विधानसभा चुनाव में कांतिलाल भूरिया के बेटे डॉ. विक्रांत भूरिया की हार है। विक्रांत को कांग्रेस से टिकिट मिला तो जेवियर निर्दलीय मैदान में उतर गए। उनकी वजह से विक्रांत की हार हुई और भाजपा जीत गई। बेटे की हार से परेशान कांतिलाल भूरिया कभी जेवियर को वापस लाना नहीं चाहते थे। लेकिन बाद में आए बाहरी नेताओं ने लगातार ऐसी संभावना के संकेत दिए थे।

कांग्रेस की गेर में जेवियर मेड़ा भी नजर अाए।

टिकट तय, अब दूसरों को भी मनाएंगे

खबर है, कांग्रेस ने रतलाम सीट से कांतिलाल भूरिया का नाम तय कर दिया। हालांकि ये पहले से ही तय माना जा रहा था। इस बार चुनाव में कड़े मुकाबले की संभावना देखते हुए विरोधियों को साथ लाने की जुगत शुरू कर दी गई। जेवियर मेड़ा की पार्टी में वापसी इसका उदाहरण है। दो दिन पहले आलीराजपुर में भी महेश पटेल को पार्टी का जिलाध्यक्ष बनाया गया। महेश भी विधानसभा चुनाव के समय से नाराज बताए जा रहे थे। लेकिन अब भी चुनौतियां कई सारी हैं। जोबट क्षेत्र में बागी सुलोचना रावत और उनके बेटे विशाल रावत ने सेबोटेज किया था। विशाल निर्दलीय खड़े हुए और काफी वोट भी लाए। हालांकि यहां विधायक कलावती भूरिया ने गारंटी ली है कि वो अपने क्षेत्र में लीड दिला देंगी। रतलाम में तीन में से दो विधानसभा सीटें कांग्रेस हारी हुई है। यहां से पार्टी के पीछे रहने की संभावना जताई जा रही है। भूरिया का कहना है, सबके बारे में बात होगी, लेकिन भगोरिया के बाद।

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