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आरक्षक ने रायफल से गर्दन पर गोली मारकर आत्महत्या की
पुलिसकर्मी पिता की मौत भी ऐसे ही हुई थी, मिली थी अनुकंपा नियुक्ति
डीआरपी लाइन में पदस्थ आरक्षक प्रतापसिंह (50) पिता रामसिंह डामोर ने शनिवार सुबह 4.20 पर क्वार्टर गार्ड के सामने सरकारी रायफल से गर्दन पर गोली मारकर आत्महत्या कर ली। उसका चेहरा क्षत विक्षत हो गया।
डीआरपी लाइन के अपने सरकारी क्वार्टर से वो सुबह 4 बजे ही ड्यूटी पर आया था। 15 साल से ज्यादा समय से प्रतापसिंह लाइन में पदस्थ था। उसकी साल 1995 में पुलिस में अनुकंपा नियुक्ति के तौर पर नौकरी लगी थी। उसके पिता रामसिंह भी पुलिसकर्मी थे और उन्होंने भी आलीराजपुर में इसी तरह आत्महत्या कर ली थी। प्रताप के पास से कोई सुसाइड नोट नहीं मिला। परिवार वालों के अनुसार माधोपुरा के मकान को फाइनेंस वालों ने दो साल पहले सील कर दिया था। संभवत: कर्ज के कारण उन्होंने ये कदम उठाया।
सुबह 4 बजे मैं बंदूक लेकर बाहर गया ही था
फायर की आवाज सुनकर क्वार्टर गार्ड के अटेंडर आरक्षक राजेंद्र चौहान दौड़कर बाहर आए। उन्होंने देखा, प्रताप का शव बाहर की बेंच पर पड़ा है। दीवार पर खून के निशान हैं और चेहरा पहचान में नहीं आ रहा। राजेंद्र ने आरआई चेतनसिंह बघेल को फोन किया। बघेल ने यहां पहुंचकर एसपी विनीत जैन और एएसपी विजय डावर को बताया। इसके बाद थाने से भी पुलिस पहुंची। राजेंद्र ने बताया, सुबह 4 बजे से प्रताप की ड्यूटी थी। वो आया और रायफल लेकर बाहर गया ही था कि फायर की आवाज आई।
फॉरेंसिक टीम पहुंची
आरक्षक के आत्महत्या करने की खबर मिलने पर एएसपी सहित थाने से टीम और फॉरेंसिक टीम पहुंची। सुबह शव को पोस्टमार्टम के लिए भेजा गया। एएसपी विजय डावर ने बताया, अभी कारणों के बारे में कुछ पता नहीं चला है। कोई सुसाइड नोट नहीं मिला।
झाबुआ. डीआरपी लाइन में शव का निरीक्षण करते पुलिस अफसर।