विभाव से स्वभाव की ओर जाना व बहुमुखी से अंंतरमुखी बनना है चातुर्मास : आचार्यश्री

Jhabua News - स्थानीय श्रीऋषभदेव बावन जिनालय में नवल स्वर्ण जयंती चातुर्मास के चलते आचार्य नरेंद्रसूरीश्वरजी और मुनिराज...

Jul 16, 2019, 08:05 AM IST
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स्थानीय श्रीऋषभदेव बावन जिनालय में नवल स्वर्ण जयंती चातुर्मास के चलते आचार्य नरेंद्रसूरीश्वरजी और मुनिराज जिनेंद्र विजयजी विराजित हैं। चातुर्मास में अब समाजजनों द्वारा धर्म-आराधनाएं करने का दौर शुरू हो गया है। प्रथम दिन बावन जिनालय में कलश स्थापना के बाद आचार्य एवं मुनिराज ने धर्मसभा में प्रथम दिन अपने प्रवचनों में चातुर्मास के महत्व को प्रतिपादित किया। यहां बड़ी संख्या में समाज की महिलाओं ने पौषध व्रत भी किए।

चातुर्मास के तहत मंदिर में कलश स्थापना आचार्य नरेंद्रसूरिजी एवं जिनेंद्र विजयजी की निश्रा में हुई। जिसका लाभ नीलेश कुमार बाबूलाल लोढ़ा परिवार ने लिया। सुबह 9 से 10 बजे पौषध शाला में हुए प्रवचनों में मुख्य रूप से आचार्य श्री एवं मुनिश्री ने चातुर्मास के महत्व को प्रतिपादित किया। आचार्य नरेंद्रसूरीजी ने कहा चातुर्मास साधना से सर्व आराधना का पर्व है। विभाव से स्वभाव की ओर जाना है चातुर्मास, बहुमुखी से अंंतरमुखी बनना है चातुर्मास। आचार्यश्री ने कहा हमें चातुर्मास में धर्म-आराधना में पूरी तरह से लीन रहना चाहिए। आचार्य श्रीजी ने समाजजनों को सलाह दी कि हमें किसी का हमदर्द बनना चाहिए, सिर दर्द नहीं। मुनि जिनेंद्र विजयजी ने समाजजनों को प्रेरणादायी प्रवचन दिए।

विभिन्न बोलियां बोली गई : सभा के दौरान विभिन्न बोलियां भी बोली गई। सूत्र व्होराने का लाभ मनोहरलाल छाजेड़ परिवार ने लिया। वाक्षेप पूजन का लाभ सुभाष कोठारी परिवार एवं आज चौदस से लेकर अगली चौदस तक सभी तपस्वियों और बाहर से आने वाले अतिथियों के स्वागत-वंदन का लाभ चातुर्मास समिति के अध्यक्ष कमलेश कोठारी ने प्राप्त किया। प्रवचन बाद दादा गुरुदेव श्रीमद् विजय राजेंद्र सूरीश्वरजी की आरती करने का लाभ भी कमलेश कोठारी परिवार ने लेकर गुरुदेव की आरती की।

चौदस पर 25 श्राविकाओं ने किया पोषण व्रत

सोमवार को चौदस पर समाज की महिलाओं ने पोषण व्रत भी किया। करीब 25 महिलाओं ने पोषण व्रत के तहत धर्म-आराधना की। जिसमें दिनभर मंदिर में रहकर महिलाओं ने पूजन, प्रतिक्रमण आदि किया। पहले दिन प्रवचनों का लाभ सैकड़ों की संख्या में महिलाओं के साथ पुरुषों ने प्राप्त किया।

झाबुआ. कलश स्थापना के बाद प्रवचन की शुरुआत की गई।

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