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तेंदुए के लिए इंदौर की रेस्क्यू टीम ने लगाया पिंजरा, उसमें मेमने को भी रखा

2 वर्ष पहले
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भास्कर संवाददाता | आलीराजपुर-जोबट-उदयगढ़

उदयगढ़ और जोबट वन क्षेत्र के गांव थादंला, टेरका, कोसदुना, देसनपुर आदि गांव में लगातार दो दिन तक करीब तीन छोटे-छोटे बालक-बालिका सहित आठ ग्रामीणों को तेंदुए ने घायल कर दिया था। इसके बाद मंगलवार को इंदौर से पिंजरे सहित अन्य संसाधन लेकर आई (रेस्क्यू ) टीम के 8 सदस्यों ने वन अमले के करीब 15 से अधिक कर्मियों के साथ तेंदुए की सर्चिंग शुरू की। लेकिन 48 घंटे बाद भी तेंदुए काे पकड़ने में टीम को कामयाबी हासिल नहीं हो पाई है। हालांकि टीम को एक स्थान पर तेंदुए के पगमार्क जरूर मिले हैं। जिसके आधार पर टीम उसे ट्रेस करने में जुटी है।

टीम जोबट वन विभाग के अमले के साथ आज दिनभर जोबट के बलेड़ी के कम्पार्टमेंट नम्बर 365, 367,369, 370 में तेंदुए को पकड़ने के लिए सर्चिंग करती रही। बलेड़ी वन क्षेत्र में अलग-अलग दो पिंजरे रखे, जिसमें बकरी के मेमने रखे रखे गए हैं। ताकि जैसे ही तेंदुआ उसका शिकार करने आए वैसे पिंजरे में ही कैद हो जाए। तेंदुए की सर्चिंग में डीएफओ गोपाल कछवा, एसडीओ चन्द्र शेखर आजाद नगर, डिप्टी रेंजर जीसी मावी, वन रक्षक रमेश भूरिया जुवानसिंह मेड़ा, समरथ चौहन सहित वन विभाग का समस्त स्टाफ मौजूद था।

तेंदुए को पकड़ने के लिए इंदौर से आई टीम ने पिंजरा लगाकर उसमें मेमना रखा है।

हमारा प्रयास तेंदुए को जल्दी पकड़े वहीं घायलों को दिया जा रहा इलाज
इस संबंध में डीएफओ कछावा ने बताया कि हमारे द्वारा बलेडी बीट में दो पिंजरे लगाए गए हैं। एक स्थान पर तेंदुए के पगमार्क मिले हैं। बलेडी बीट के हरसादपुर सहित अन्य गांवों में भी सर्चिंग हो रही है। हमने गांवों में मुनादी करवा दी है कि ग्रामीण जंगल में अकेले नहीं जाएं। हमारा प्रयास है कि जल्द से जल्द तेंदुए को पकड़ें। उन्होंने बताया कि घायलों का बेहतर इलाज करवाया जा रहा है। उनकी देखरेख के लिए एक फॉरेस्ट गार्ड भी तैनात किया गया है। अस्पताल में भर्ती रहने के दौरान घायलों को प्रतिदिन 500 रुपए आर्थिक सहायता देने का प्रावधान है। जिसके अनुसार उन्हें आर्थिक सहायता उपलब्ध करवाई जाएगी।

ग्रामीणों में दहशत बरकरार : वहीं दूसरी और तेंदुए के अब तक नहीं पकड़े जाने के कारण प्रभावित गांवों सहित आसपास के अन्य ग्रामों के ग्रामीणों में दहशत और भय का माहौल है। ग्रामीणों का कहना है कि पूर्व में भी इस क्षेत्र में तेंदुए की गतिविधि सामने आती रही है। ऐसे में हमें आवश्यक कामकाज के लिए घर से बाहर निकलने में भी डर लगता है। वन विभाग को शीघ्र ही इस तेंदुए को पकड़ना चाहिए।

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