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रेलवे के लिए 7 और गांवों में साढ़े 37 हेक्टेयर जमीन दी

एक वर्ष पहले
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इंदौर-दाहोद रेल लाइन के लिए जिला प्रशासन ने 15 दिन में दूसरी बार सरकारी जमीन रेलवे को हस्तांतरण करने के आदेश जारी किए हैं। इस बार झाबुआ, पेटलावद और रामा तहसील के 7 गांवों की 37.46 हेक्टेयर जमीन का हैंडओवर की गई। इसके पहले 24 फरवरी को 17 गांवों की 76.995 हेक्टेयर जमीन दी गई थी। अब तक जिले में 170.715 हेक्टेयर जमीन रेलवे को दी जा चुकी है।
इसके बाद कहीं भी सरकारी जमीन देना नहीं बचा।

अफसरों का कहना है, अब निजी जमीन अधिग्रहण को लेकर कार्रवाई तेज होगी। जमीन हस्तांतरण के आदेश एडीएम एसपीएस चौहान ने जारी किए। यहां जमीन रेलवे को मिलने के बाद काम शुरू हो पाएगा। अभी तक गुजरात से झाबुआ के पास गोपालपुरा तक
काम शुरू हो पाया है। हालांकि काफी समय से ये काम रुका हुआ है। दाहोद की ओर से कतवारा तक लाइन डल चुकी है। यहां ट्रेन चलाने की बात की जा रही है, लेकिन जिले तक आने में काफी समय लगेगा। सबसे ज्यादा दिक्कत माछलिया घाट क्षेत्र में आना है और समय भी यहां ज्यादा लगता है। यहां काम शुरू नहीं हो सका है।

12 साल में ये हुआ : 8 फरवरी 2008 को तब के प्रधानमंत्री डॉ. मनमोहनसिंह, रेलमंत्री लालू प्रसाद यादव, रेल राज्यमंत्री नारायण राठवा ने दाहोद-इंदौर और छोटा उदयपुर-धार लाइन का शिलान्यास झाबुआ में किया था। तब के सांसद कांतिलाल भूरिया ने 2011 में रेल लाने का वादा किया था। अभी तक 209 किलोमीटर की लाइन में से सिर्फ 36 किलोमीटर काम हो पाया। गुजरात में दाहोद से लेकर कतवारा तक 11 किलोमीटर और इंदौर से धार की तरफ 25 किलोमीटर लाइन डली है। 2.4 किलोमीटर टनल का काम चल रहा है। रेलवे ने काम पूरा करने का शुरुआती लक्ष्य 6 साल रखा था, अब रेलवे ने खुद मार्च 2023 तक का लक्ष्य निर्धारित कर लिया है। 2008 की लागत 678 करोड़ रुपए थी। अब ये 1640 करोड़ रुपए हो चुकी है।

(हेक्टेयर में)


लाइन के लिए जिले में इन गांवों में दी गई है जमीन

तहसील गांव हैंडओवर जमीन पेटलावद चंद्रगढ़ 16.35

पेटलावद सेमलिया 1.64

पेटलावद टोढ़ी 5.75

रामा रूपारेल 2.63

झाबुआ रंगपुरा 2.33

झाबुआ परवट 4.356

झाबुआ डूंगरा लालू 4.399

कुल 37.46

अब कहीं सरकारी जमीन देना नहीं बचा, पिछले साल अप्रैल तक तेजी से चला योजना का काम, अभी बंद है
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