गेर निकली, ढोल पर थिरकते हुए निकले हुरियारे
धुलेंडी पर नगर रंगों से सराबोर नजर आया। इस साल भी लोगों ने पानी बचाने का संदेश देते हुए सूखे रंगों का ही इस्तेमाल किया। धुलेंडी पर समाजसेवी सुरेशचंद जैन व मित्र मंडल ने गेर का आयोजन किया। इसमें लोगों ने एक दूसरे को रंग-गुलाल लगाया। गेर में शामिल हुरियारे ढोल की थाप पर थिरकते हुए चल रहे थे। गेर की शुरुआत साईं चौराहे से हुई। यहां से गेर दशहरा मैदान, भंडारी चौराहा, आजाद चौक, बस स्टैंड होते हुए पुन: साईं चौराहा पहुंची। इस अवसर पर मित्र मंडल के हरिराम गिरधाणी, आनंदी पडियार, विकास बाफना, सुभाष भाईजी, दिनेश बैरागी, लाला भटेवरा आदि उपस्थित थे।
युवाओं ने होलिका में गेहूं की बालियां सेंककर खाई
पेटलावद | क्षेत्र में होली पर्व उत्साह के साथ मनाया गया। लोगों ने सूखे रंगों से होली खेलकर पानी बचाने का संदेश भी दिया। सोमवार शाम को नगर में लगभग एक दर्जन से अधिक स्थानों पर होलिका दहन हुआ। इस वर्ष विशेष रूप से सभी आयोजकों ने कंडों की होली को महत्व दिया। सुभाष मार्ग पर स्थित होलिका दहन आयोजन में युवाओं ने गेहूं की बालियां भी सेंककर खिलाई।
यह है सौ वर्ष पुरानी पंरपरा : नगर अंबिका चौक में होलिका दहन के दूसरे दिन सुबह होली के अंगारों पर बांटी सेंकी गई। होली पर सेंकी गई बांटी को कुत्तों को खिलाया गया। इस परंपरा का निर्वहन नगर में करीब 100 वर्षों से हो रहा है। इसके लिए एक समिति भी बनी हुई है जो प्रतिवर्ष होलिका के अंगारों पर बांटी सेंककर परंपरा का निर्वहन करती है।
गेर में नगरवासियाें ने शामिल हाेकर एक-दूसरे काे रंग-गुलाल लगाया।