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हॉस्टल में नए गद्दे पहुंचे, चादरें भी बदलीं
थांदला क्षेत्र के गांव कुकड़ीपाड़ा के आदिवासी बालक छात्रावास में शनिवार को नए गद्दे और बिस्तर पहुंच गए। दो दिन पहले गांव की रहने वाली व्हीसल ब्लोअर रेखा निनामा ने गांव के लोगों के साथ मिलकर यहां के हाल देखे थे। छात्रों के नाम पर पैसा आने के बावजूद उन्हें सुविधाएं नहीं दी जा रही थी। समाचार शनिवार को दैनिक भास्कर में प्रकाशित होने के बाद ताबड़तोड़ बिस्तर और गद्दे बुलवाए गए।
हालांकि राज्य शासन ने स्कूलों-कॉलेजों की छुट्टी कर दी, ऐसे में यहां अब बच्चे कम ही हैं, जिनकी परीक्षाएं चल रही हैं, लेकिन नया सामान नए सत्र से विद्यार्थियों के काम आ सकेगा। रेखा और गांव के लोगों ने कन्या छात्रावास का भी दौरा किया था। यहां अभी तक सुधार नहीं हुआ। रेखा का कहना है, यहां के जिम्मेदार कहते हैं, आप किस हैसियत से हॉस्टल में आ सकते हो। मैंने जवाब दिया, गांव की हूं तो गांव के लोगों के लिए चल रही योजनाओं की स्थिति का पता करने का अधिकार है। गांव के किसी भी व्यक्ति को है।
गुरुवार को देखे
थे हाल
रेखा ने गांव वालों के साथ बालक छात्रावास, कन्या छात्रावास सहित सभी स्कूल देखे थे। हायर सेकंडरी स्कूल में कई शिक्षकों के पद खाली थे। हाई स्कूल में सिर्फ दो टीचर हैं। माध्यमिक विद्यालय में सिर्फ प्राधानाध्यापक है, बाकी कोई नहीं। सीनियर बालक छात्रावास और कन्या छात्रावास में मीनू के मुताबिक न नाश्ता मिल रहा है न खाना। यहां पलंग टूटे हैं, बिस्तर फटे मिले और कंबल व चादर पुराने, गंदे। जबकि जब हर साल छात्रावास के बच्चों के लिए बिस्तर के लिए राशि आती है। हर छात्र पर 5 हजार 875 रुपए खातों में जमा होते हैं।