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जमीन हेराफेरी के मामले में अब स्कूल संचालक व भाजपा नेता ओमप्रकाश शर्मा सहित 19 को नोटिस
सहकारिता विभाग ने सोसायटी बनाकर सदस्यों को प्लॉट नहीं देने और प्लॉट के आवंटन में हेराफेरी करने के मामले में भाजपा से जुड़े शारदा ग्रुप ऑफ एज्युकेशन के संचालक ओमप्रकाश शर्मा सहित 19 लोगों को नोटिस जारी किया है। इनमें ज्यादातर सरकारी या रिटायर्ड कर्मचारी हैं। आरोप है कि हाउसिंग सोसायटी सहकारिता विभाग द्वारा बंद कराने के बाद इसे नियम विरुद्ध फिर जीवित कर लिया गया। संस्था के एक पूर्व अध्यक्ष ने एफिडेविट पर दिए गए बयान में लिखा, मैंने किसी चुनाव में हिस्सा नहीं लिया था। मुझे वाट्सएप पर अध्यक्ष बनने के बारे में सूचना दी गई। कई जगह मेरे फर्जी साइन किए गए।
संस्था में प्लॉट के फर्जीवाड़े की शिकायत विधायक कांतिलाल भूरिया ने की थी। शिकायत में आरोप था कि संध्या कुलकर्णी के प्लॉट की साइज बढ़ाकर नरेंद्रसिंह पंवार ने रजिस्ट्री करवाई। दस्तावेजों में भी हेरफेर की गई। सहकारिता विभाग ने इसे आपराधिक कृत्य मानते हुए कार्रवाई शुरू की है। खबर है कि काफी जांच की जा चुकी है। दर्जनों लोगों के बयान भी हुए हैं। इसके बाद नोटिस दिए गए। ओम शर्मा के ही मां त्रिपुरा नर्सिंग कॉलेज और शारदा स्कूल की जमीन पर अतिक्रमण की शिकायत भी भूरिया ने की थी, जिसके बाद एसडीएम ने ये निर्माण तोड़ दिए थे। ये मामला अभी हाईकोर्ट में चल रहा है। अब सहकारिता विभाग ने ओम शर्मा को नई मुसीबत में डाल दिया।
जांच में ये किया : सहकारिता विभाग ने सदस्यों से लेकर उन ऑडिटरों के बयान लिए, जिन्होंने संस्था का कभी न कभी ऑडिट किया। साथ ही इंस्पेक्टरों के बयान भी लिए। उपायुक्त अंबरीष वैद्य ने बताया, इन बयानों में एक बात कॉमन थी। सबने कहा, पदाधिकारी कोई भी हो, कर्ताधर्ता एक ही व्यक्ति रहा है।
इन्हें दिए नोटिस
ओमप्रकाश शर्मा, संध्या कुलकर्णी, निर्मल सिसोदिया, सुशीला गुप्ता, प्रदीप भालेराव, अंबिका प्रसाद पाठक, अशोक गर्ग, महेंद्रसिंह राठौर, अशोक परमार, मणिकांत भट्ट, उषा मेड़ा, विनोद कुमार मिश्रा, राजेंद्र जोशी, प्रहलादसिंह परिहार, सुभाष बर्वे, दिनेश अग्रवाल, रविंद्र शर्मा, मंगला पोत्दार, पूरणसिंह बैस। इनमें से ज्यादातर स्वास्थ्य विभाग के हैं।
इन्होंने की कार्रवाई
अंबरीष वैद्य पिछले साल यहां आए। इसके पहले चिटफंड कंपनी और इंवेस्टमेंट कंपनी पर कार्रवाई की। बड़ी कार्रवाई मेघनगर विपणन सहकारी संस्था के संजय श्रीवास और गणेश प्रजापत पर की। पूर्व में इंदौर में रहते हुए भूमाफियाओं पर सबसे ज्यादा प्रकरण दर्ज कराए। सीनियर अफसर होने के साथ सहकारिता कानून के अच्छे जानकार हैं।
एक्सपर्ट व्यू
कार्रवाई क्या हो सकती है
इंदौर हाईकोर्ट के वकील शरद पंवार के अनुसार को ऑपरेटिव सोसायटीज एक्ट 1960 में अध्याय 8 क जोड़कर वो कृत्य परिभाषित किए गए हैं, जिन्हें अपराध माना जाएगा। इसकी धारा 72 (ई) में डिप्टी कमिश्नर को ताकत दी गई है कि वो किसी भी वर्तमान या पूर्व सोसायटी के अध्यक्ष, उपाध्यक्ष, संचालक या कर्मचारी को अधिकतम 5 लाख रुपए जुर्माने या 3 साल के कारावास की अनुशंसा प्रथम श्रेणी मजिस्ट्रेट को भेज सकता है।
नोटिस भेजा है
अंबरीष वैद्य, उपायुक्त सहकारिता
ये आरोप हैं जिनके नोटिस में जवाब मांगे गए हैं
{2012 में हाउसिंग सोसायटी सहकारिता विभाग ने बंद करा दी थी। यानी इसे परिसमापन में ले लिया गया था, लेकिन 2017 में इसे पुनर्जीवित कर लिया गया। अध्यक्ष और संचालक मंडल नामांकित किया गया। जबकि सहकारी संस्थाओं के चुनाव मध्यप्रदेश राज्य निर्वाचन पदाधिकारी द्वारा कराए जाते हैं, जो एक आईएएस स्तर का अफसर होता है।
{ संचालक मंडल के पूर्व अध्यक्ष पुलिस अस्पताल के कर्मचारी विनोद कुमार मिश्रा ने शपथ पत्र में लिखकर दिया कि वो अध्यक्ष नहीं हैं। जबकि वो काफी समय तक अध्यक्ष बने रहे। मिश्रा ने ये भी कहा, उन्होंने अध्यक्ष के तौर पर कोई कागजी कार्रवाई नहीं की।
{ सहकारिता विभाग के रिकाॅर्ड में इस सोसायटी में कोई भी कर्मचारी होने की जानकारी नहीं है। फिर भी संध्या कुलकर्णी के प्लॉट में नरेंद्रसिंह पंवार ने रजिस्ट्री कार्यालय में संशोधन किया। ये आपराधिक कृत्य है।
{ मनोरमा रंगराव यावले ने बयान दिए। उन्होंने बताया, साल 1990 में पूरी राशि जमा कर दी थी। प्लॉट नंबर 64 आवंटित किया गया था, लेकिन इस पर किसी और का कब्जा है।
संस्था में प्लॉट के फर्जीवाड़े की शिकायत विधायक कांतिलाल भूरिया ने की थी