पाएं अपने शहर की ताज़ा ख़बरें और फ्री ई-पेपर

डाउनलोड करें
  • Hindi News
  • National
  • Jhabua News Mp News Sample Question Sent To Private Lab To Investigate Fake Asphalt Government Lab Report Not Believe

नकली डामर की जांच करने िनजी लैब में भेजा सैंपल सवाल: सरकारी लैब की रिपोर्ट पर विश्वास नहीं ?

एक वर्ष पहले
  • कॉपी लिंक

माफिया के खिलाफ जंग में कुछ लोगों को जानबूझकर छोड़ा जा रहा है। हाईवे पर नकली डामर बनाने वाला प्लांट पकड़ाए जाने के ढाई महीने बाद भी एफआईआर नहीं हुई। अफसर दावा कर रहे हैं, मटेरियल की सैंपल रिपोर्ट नहीं आई, लेकिन सच ये है कि जानबूझकर सैंपल देर से भेजे गए। वो भी सरकारी लैब की बजाय एक निजी लैब में। ताकि इसका फायदा सीधे तौर पर आरोपियों को मिल सके। कारण ये कि अवैध प्लांट संचालित करने वाले सत्ताधारी दल के नेताओं से जुड़े हैं।

इंदौर-अहमदाबाद हाईवे पर झाबुआ से 5 किलोमीटर दूर फूलमाल में नकली डामर बनाने के एक प्लांट पर प्रशासन ने ढाई महीने पहले कार्रवाई की। 27 फरवरी को एसडीएम की टीम ने फूलमाल फाटे पर एक ढाबे के पीछे चल रहे प्लांट को पकड़ा और सील करा दिया। यहां डोलोमाइट पाउडर में केमिकल मिलाकर नकली डामर बनाया जा रहा था। शुरुआती तौर पर पता चला, ढाबा मनावर के सोनू राठौर का है। यहां धारजी भगत के ढाबे के पीछे पतरों की दीवार बनाकर ये अवैध फैक्ट्री चल रही थी। डोलोमाइट पाउडर के 500 बैग जब्त किए। 50 ड्रम नकली डामार, मिक्सिंग मशीन, जनरेटर, एक ट्रक और एक टैंकर भी मिला। पता चला, डोलोमाइट उदयपुर से लाया जाता था।

चलते रहे अवैध प्लांट

अवैध रूप से डामर बनाने और केमिकल चोरी करने वाले प्लांट पर सही कार्रवाई नहीं होने का असर ये हुआ कि हाईवे किनारे ये चलते रहे। पिटोल के पास ऐसे ही एक ढाबे में रखे 10 ड्रम केमिकल में 6 मार्च की रात आग लग गई। इन ड्रमों में विस्फोट के साथ आग लगी। प्रशासन ने फिर वही किया। अगले दिन सुबह जाकर 4 ढाबे सील कर दिए, बस।

दे रहे सफाई: हम गलत नहीं

अभयसिंह खराड़ी, एसडीएम

सुरेंद्रसिंह गडरिया, टीआई, झाबुआ

ढाई महीने पहले पकड़ा था नकली डामर
का प्लांट, अभी तक एफआईआर नहीं हुई


27 दिसंबर काे नकली डामर बनाने का प्लांट पकड़ा था। लेकिन कार्रवाई अभी तक नहीं हुई।

डामर रोड बनाने वाले ठेकेदार
इन नकली डामर बनाने वाले प्लांट से ये खरीदते हैं। ये डामर के मुकाबले आधे से भी कम कीमत में पड़ता है। डोलामाइट पाउडर में केमिकल मिलाने पर ये डामर की तरह ही दिखता है। इसे सड़क बनाने में डामर के साथ मिलाकर उपयोग कर लिया जाता है। नतीजतन सड़क जल्दी उखड़ जाती है। इसमें फायदा सड़क बनाने वाले ठेकेदार को
होता है।


घटिया सड़कें इसी नकली डामर से बनती हैं


ये होना था

प्लांट को सील करने से पहले यहां से सैंपल लेना चाहिए। फौरन इन्हें सीलबंद करके सरकारी लैबोरेटरी में जांच के लिए भेजा जाना चाहिए था। एफआईआर तत्काल दर्ज की जाना चाहिए थी, क्योंकि प्रारंभित तौर पर ये स्पष्ट था कि नकली डामर बनाया जा रहा है। आरोपी की गिरफ्तारी कर कोर्ट भेजना था। सैंपल की सरकारी लैबोरेटरी की रिपोर्ट बाद में कोर्ट में दे दी जाती।

लेकिन ये हुआ

मामला दर्ज नहीं किया गया। सैंपल लगभग डेढ़ महीने बाद भेजे गए। वो भी एक निजी लैबोरेटरी में। राजस्व विभाग ने पहले सैंपल पुलिस के पास भेज दिए, फिर पुलिस ने राजस्व विभाग के पास। बाद में राजस्व विभाग ने 10 हजार रुपए शुल्क जमा करके सैंपल लैब में भेजे।
खबरें और भी हैं...