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इंदौर की रेस्क्यू टीम ने दो जगह लगाए थे पिंजरे, दूसरी बार शिकार खाने आया तब कैद हुआ चार साल का नर तेंदुआ

Jhabua News - भास्कर संवाददाता | उदयगढ़-जोबट-आलीराजपुर गत 14 व 15 जुलाई को लगातार दो दिन में जिस हिंसक तेंदुए ने उदयगढ़ के वन...

Jul 25, 2019, 10:00 AM IST
Thandala News - mp news the rescue team of indore had put two cages the cage came for hunting for the second time then the four year old male leopard
भास्कर संवाददाता | उदयगढ़-जोबट-आलीराजपुर

गत 14 व 15 जुलाई को लगातार दो दिन में जिस हिंसक तेंदुए ने उदयगढ़ के वन क्षेत्र ग्राम थांदला व टेरका तथा जोबट के ग्राम कोसदुना व देशनपुर में तीन बालक-बालिका सहित करीब आठ ग्रामीणाें को घायल किया था। वह बुधवार सुबह इंदौर की रेस्क्यू टीम द्वारा लगाए गए पिंजरे में कैद हो गया। जैसे ही ये खबर लोगों तक पहुंची। सभी ने राहत की सांस ली। पकड़ा गया तेंदुआ नर है और उसकी उम्र करीब चार साल है।

क्षेत्र में खूंखार तेंदुए के हिंसक होने के चलते शुरुआती दो दिनों में वन विभाग कोई खास कदम नहीं उठा पाया। स्थानीय अमले के माध्यम से तेंदुए की सर्चिंग की जाती रही। भास्कर ने इस मामले को प्रमुखता से उठाया। जिसके बाद डीएफओ गोपाल कछावा के निर्देशन में इंदौर से 16 जुलाई को एक आठ सदस्यीय रेस्क्यू टीम बुलाई गई। जिसने जोबट वन परिक्षेत्र की बीट बलेड़ी में वन क्षेत्र क्रमांक 370 में अलग अलग दो पिंजरे लगाकर करीब एक सप्ताह से तेंदुए को पकड़ने का प्रयास किया। मामले में दिलचस्प पहलू ये सामने आया कि ये तेंदुआ बड़ा चालक था, जाे एक बार वन विभाग के अमले को चकमा देकर पिंजरे में रखा बकरा बाहर के बाहर खाकर चला गया था। यह बात एक वन रक्षक ने नाम नहीं बताने की शर्त पर बताई। इस प्रकार तेंदुआ वन विभाग के सामने ही अपना शिकार चट करते हुए चलता बना था। इसके बाद दूसरी बार फिर से बकरे को पिंजरे के कुछ अंदर बांधा गया । तेंदुआ फिर बकरे को खाने आया और पिंजरे में कैद हो गया।

पकड़ने में रेस्क्यू टीम के 8 और वन अमले के 15 लोग लगे थे, कैद में आने की खबर मिलते ही जंगल में लगी भीड़

तेंदुए को देखने उमडी़ भीड़।

इस तेंदुए को पकड़ने में रेस्क्यू टीम के सदस्य डिप्टी रेंजर आरआर कल्याणे, वन पाल मुरारीलाल, एसएस कहार, वन रक्षक सोहनलाल दसोरिया, सुरक्षाकर्मी तोताराम, इंदर अहिरवार, भावसिंह कटारे, हरिप्रसाद योगी के अलावा शेरसिंह कटारा, प्रकाश बोके, प्रवीण मीणा (राला मंडल इंदौर) का योगदान रहा। जबकि एसडीओ (चंद्र शेखर आजाद नगर) एमएस चौहान, जोबट रेंजर एमएस चौहान, सब रेंज उदयगढ़ के पीसी मकवाना, सब रेंज आम्बुआ की वन पाल हतरी चौहान, सब रेंज जोबट के वन पाल नरेंद्र टवली व एसएल भूरिया, सब रेंज बोरी के वन पाल जीसी मावी आदि अपने स्टाफ सहित इस मिशन में लगातार वन क्षेत्र में सतर्कता पूर्वक सर्चिंग कर इंदौर से आई टीम को सहयोग करते रहे। यही कारण है कि आखिर सब की मेहनत रंग लाई और 9वें दिन तेंदुआ बुधवार तड़के 4 बजे पिंजरे कैद हो गया। वहीं हिंसक तेंदुए के पिंजरे में आने की सूचना फैलते ही ग्रामीण व शहरी लोग सहित मीडिया भी जंगल की और दौड़ पड़ा। जबकि डीएफओ कछावा मौके पर करीब 9 बजे पहुंचे। उसके बाद इंदौर की रेस्क्यू टीम तेंदुए के पिंजरे को उठाकर कैंपर की बाॅडी में डाला व जंगल से बाहर लाई। जहां उसे इंदौर से आए वन विभाग के ट्रक में वन क्षेत्र कट्ठीवाड़ा के लिए रवाना किया। इससे पहले वन विभाग ने पशु चिकित्सालय जोबट से एक डाॅक्टर को भी बुलाया था।

चंद्रशेखर आजादनगर-कट्‌ठीवाड़ा के जंगल में छोड़ा तेंदुआ

इस संबंध में डीएफओ गोपाल कछावा ने बताया कि हिंसक तेंदुए को चंद्रशेखर आजाद नगर-कट्‌ठीवाड़ा के जंगल में उसके प्राकृतिक आवास में छोड़ा गया है। उन्होंने कहा कि तेंदुआ हिंसक नहीं था। क्योंकि यदि हिंसक होता तो यह क्षेत्र में और किसी को नुकसान पहुंचाता। जबकि 14 व 15 जुलाई के बाद उसने किसी को नुकसान नहीं पहुंचाया। उन्होंने बताया कि तेंदुए का मेडिकल परीक्षण भी करवाया गया और वह पूरी तरह तंदुरूस्त पाया गया।

तेंदुए को पकड़ने में करीब 2 लाख खर्च होने का अनुमान

वहीं पिछले नौ दिन से वन विभाग द्वारा तेंदुए को पकड़ने के लिए लगाए गए अमले और इंदौर से बुलाई गई रेस्क्यू टीम के सदस्यों सहित करीब दो दर्जन लोग लगे हुए थे। तेंदुए को पकड़ने के लिए चलाए गए संपूर्ण अभियान और पकड़ने के बाद जंगल में छोड़ने तक के संपूर्ण मिशन में करीब दो लाख रुपए से अधिक राशि खर्च होने का अनुमान है। हालांकि इस संबंध में डीएफओ कछावा ने बताया कि हम खर्च का हिसाब लगा रहे हैं। इस संबंध में कल जानकारी उपलब्ध करवा दी जाएगी।

लोगों ने ली राहत की सांस, पर और भी तेंदुआ होने की आशंका क्योंकि कुछ ग्रामीणों ने बताया था शावक को भी देखा है - इस तेंदुए के पकड़े जाने पर क्षेत्र के लोगों ने राहत की सांस जरूर ली है। लेकिन कुछ ग्रामीणों ने गत दिनों बताया था कि तेंदुआ के साथ उसका शावक भी घूमता हुआ दिखा था। ऐसे में क्षेत्र के जंगल में अन्य तेंदुआ अभी भी होने की अाशंका ग्रामीण जता रहे हैं।

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