ज्ञान, दर्शन, चारित्र और तपस्या के क्षेत्र में आगे बढ़ना श्रावक-श्राविकाओं का प्रमुख लक्ष्य होना चाहिए

Jhabua News - निरंतर जागरूक रहने वाला व्यक्ति ही अपने जीवन का सही उपयोग कर पाता है। चातुर्मास काल में विशेष रूप से धर्म आराधना...

Bhaskar News Network

Jul 14, 2019, 08:50 AM IST
Petlawad News - mp news to move forward in the field of knowledge philosophy charitra and penance should be the main goal of shravak shravastika
निरंतर जागरूक रहने वाला व्यक्ति ही अपने जीवन का सही उपयोग कर पाता है। चातुर्मास काल में विशेष रूप से धर्म आराधना और अपनी आत्मा के हितकारी कार्यों के प्रति जागृत बने रहना है। ज्ञान, दर्शन, चारित्र और तपस्या के क्षेत्र में आगे बढ़ना श्रावक-श्राविकाओं का प्रमुख लक्ष्य होना चाहिए।

यह बात जैन श्वेताम्बर तेरापंथ धर्मसंघ के 11वें अनुशास्ता आचार्यश्री महाश्रमणजी सुशिष्या साध्वीश्री सम्यकप्रभाजी ने डालिम विहार तेरापंथ भवन में श्रावक-श्राविकाओं के समक्ष कही। वे चातुर्मास के लिए शनिवार को मंगल प्रवेश के बाद हुई धर्मसभा को संबोधित कर रही थी। उन्होंने कहा आत्मानुशासन यानी स्वयं के जीवन पर अनुशासन करने वाला ही दूसरों पर अनुशासन करने का अधिकारी हो सकता है। तीर्थंकर भगवान महावीर की वाणी के अनुसार इस दुनिया में 4 बातें दुर्लभ मानी गई है। मनुष्य जीवन की प्राप्ति, धर्म की बात सुनने का अवसर, धर्म के प्रति गहरी श्रद्धा और संयम में पराक्रम। स्वागत कार्यक्रम का संचालन तेरापंथी सभा के मंत्री लोकेशजी भंडारी ने किया।

इस अवसर पर तेरापंथी सभा के अध्यक्ष झमकलाल भंडारी, महासभा के आंचलिक प्रभारी दिलीप भंडारी, महिला मंडल अध्यक्ष मीना मेहता, तुलसी बाल विकास समिति अध्यक्ष पारस गादिया, कन्या मंडल, महिला मंडल पेटलावद, महिला मंडल करवड़, राजेश बम बामनिया, अनिता भंडारी, उपासिका मंजू पीपाड़ा कल्याणपुरा, मालवा सभा उपाध्यक्ष पारस कोटड़िया आदि ने स्वागत किया।

साध्वीश्री सम्यकप्रभाजी की अगवानी करते समाजजन।

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