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हॉस्टलों में मिले फटे गद्देे, खाने में दी दाल-रोटी

एक वर्ष पहले
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जिले की पहली व्हिसल ब्लोअर बनी थांदला क्षेत्र के कुकड़ीपाड़ा गांव की रेखा निनामा ने गुरुवार को गांव के लोगों के साथ छात्रों और छात्राओं के हॉस्टलों की स्थिति जानी। यहां के हाल देखकर सारे लोग दंग रह गए। हर साल नया बजट मिलने के बावजूद यहां न टूटे पलंग, बिस्तर के लिए फटे गद्दे, पुरानी चादरें और बदबूदार कंबल थे। बच्चों के लिए खाना भी पूरा नहीं बन रहा। सिर्फ दाल-रोटी थी। जबकि मीनू में सब्जी लिख रखा था। दोनों हॉस्टलों के हाल एक जैसे ही थे।

रेखा ने अब एक पत्र बनाया है। वो यहां की स्थिति की जानकारी झाबुआ और भोपाल के अफसरों को भेजेंगी। रेखा ने बताया गांव में आदिवासी सीनियर बालक छात्रावास और सीनियर बालिका छात्रावास है। यहां बच्चों को सही तौर पर सुविधाएं नहीं मिलने की बात लगातार सुनते थे। सिर्फ यहां ही नहीं, आसपास के हर हॉस्टल के यही हाल हैं। इसलिए गांव के लोगों के साथ जानकारी लेने पहुंचे। हमने पूरी शालीनता के साथ जाकर हाल देखे। गांव के लोग होने के नाते हमें पता होना चाहिए कि यहां सरकारी योजनाओं और सुविधाओं पर ठीक से काम हो रहा है या नहीं। हमारे गांव के भी गरीब परिवारों के बच्चे यहां रहते हैं। इन लोगों ने स्कूलों की स्थिति भी देखी।

ये मिला गांव में

{हायर सेकंडरी स्कूल में आर्ट्स और विज्ञान के शिक्षक नहीं हैं। विज्ञान के अतिथि शिक्षक भी नहीं हैं। हाई स्कूल में सिर्फ सामाजिक विज्ञान और हिंदी के टीचर हैं। माध्यमिक विद्यालय में सिर्फ प्रधानाध्यापक हैं, बाकी कोई नहीं। प्रायमरी स्कूल भवन नहीं है।

{सीनियर बालक छात्रावास में सुबह नाश्ते में चने की जगह बिस्किट दिया गया। खाने में हरी सब्जी नहीं थी। हॉस्टल अधीक्षक ने बताया हरी सब्जी खत्म हो गई थी। फोन पर बोले, मैं खुद बाजार सब्जी लेने आया हूं। बिस्तर पूरी तरह से खराब और पुराने थे। गद्दे फटे मिले।

{सीनियर कन्या छात्रावास में भी नाश्ते में बिस्किट दिए गए। जबकि गुरुवार को चने देना थे। बिस्किट रविवार को दिए जाना थे। अधीक्षिका ने बताया, दसवीं की लड़कियों का पेपर था, उन्हें जल्दी जाना था।
यहां भी बिस्तर और पलंग के ऐसे ही हाल मिले।

हर साल आता है नए बिस्तर का पैसा : हॉस्टलों के ये हाल तब हैं, जब हर साल छात्रावास के बच्चों के लिए बिस्तर के लिए राशि आती है। हर छात्र पर 5 हजार 875 रुपए दिए जाते हैं। ये उनके खातों में जमा होते हैं।

जल्दी ही व्यवस्था करेंगे

लक्ष्मणसिंह, बालक छात्रावास

5 छात्राओं ने ही पैसे दिए

जमना भूरिया, बालिका छात्रावास

गांव के लोगों के साथ हॉस्टलों की स्थिति देखने पहुंची रेखा निनामा।
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