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बुध के नेतृत्व में देश आर्थिक उन्नति करेगा, वैभव भी बढ़ेगा
इस बार नव संवत्सर प्रमादी नाम का होगा। पंचांग भेद के अनुसार आनंद नाम का उल्लेख भी मिल रहा है। चूंकि नव संवत्सर बुधवार से शुरू हो रहा है। इसलिए इसके राजा बुध होंगे। मंत्री चंद्रमा होगा। बुध के प्रभाव से देश में धर्म व आध्यात्म की ओर लोगों का रुझान बढ़ेगा। धनधान्य, सुख सुविधा, कला संगीत की वृद्धि होगी। व्यापारियों खासतौर से महिलाओं के लिए आने वाला नव संवत्सर लाभदायी सिद्ध होगा।
पंडित हिमांशु शुक्ल बताते हैं 25 मार्च से हिंदू पंचांग का नया साल नव संवत्सर शुरू होगा। इस दिन से संवत 2077 शुरू हो जाएगा। इसका नाम प्रमादी होगा। पंचांग भेद में किन्हीं पंचागों में आनंद नाम का उल्लेख भी मिल रहा है। मंत्री का चंद्रमा रहेंगे। संवत्सर का स्थान वैश्य के घर होने से व्यापारिक तेजी देखने को मिलेगा। चंद्रमा मंत्री है। इसलिए देश का वैभव बढ़ेगा। चंद्रमा तेज गति से चलते है, इसलिए देश में कोई भी स्थिति स्थिर नहीं रहेगी। उतार-चढ़ाव का माहौल बना रहेगा। दूध व सफेद वस्तुओं का उत्पादन इस साल में बढ़ेगा। ज्योतिषियों ने बताया हिंदू धर्म के अनुसार नव संवत्सर के दिन की माता दुर्गा के देवताओं के बीच कार्य विभाजन किया था। इसी दिन से देवताओं को प्रकृति के संचालन की शक्ति प्रदान की गई थी। इसीलिए हिंदू धर्म में इसे नए साल के रूप में मनाया जाता है।
सेनापति सूर्य सेना का बढ़ाएंगे प्रभाव
पंडितों के अनुसार संवत्सर में सेना के स्वामी यानि सेनापति सूर्य है। इसलिए सेना में कठोर नियम बनेंगे। विश्व में सेना का वैभव बढ़ेगा। सेना का इस साल में अत्याधुनिक हथियार मिलेंगे। सरकार कुछ और कठोर कानून लाएगी। जिससे देश में कानून का विरोध बढ़ेगा। जमीन और भवनों के दामों में वृद्धि हो सकती है।
देश को आर्थिक उन्नति प्रदान करेगा
पंडित शुक्ल के अनुसार 25 मार्च को नव संवत्सर की शुरुआत बुधवार को रेवती नक्षत्र व मीन राशिगत चंद्रमा के गोचर मेंं हो रही है। यह एक शुभ संयोग है। जो देश को आर्थिक उन्नति प्रदान करने वाला होगा।
देवी मंदिरों पर 25 मार्च से होंगे धार्मिक आयोजन
चैत्रीय नवरात्र यानि 25 मार्च से देवी मंदिरों पर धार्मिक आयोजनों के साथ जप, अनुष्ठान शुरू होंगे। मंदिरों में इसकी तैयारियों शुरू हो जाएगी। प्राचीन कालिका माता मंदिर में रोजाना विशेष आरती की जाएगी। यहां भक्त अखंड रामायण जाप भी करेंगे। इसके अलावा अम्बे माता मंदिर में भी धार्मिक आयोजन होंगे। चारभुजानाथ मंदिर में स्थापित सर्वमंगलादेवी का विशेष शृंगार व आरती की जाएगी। सप्तमी पर हवन होगा।