हम अपने में लेने की नहीं देने की प्रवृत्ति विद्यमान करें

Jhabua News - जब तक मनुष्य अपनी सोच नहीं बदलेगा तब तक उसके जीवन में परिवर्तन नहीं आएगा। हमें बदलने की शुरुआत स्वयं से करना होगी,...

Dec 04, 2019, 09:12 AM IST
जब तक मनुष्य अपनी सोच नहीं बदलेगा तब तक उसके जीवन में परिवर्तन नहीं आएगा। हमें बदलने की शुरुआत स्वयं से करना होगी, हम बदलेंगे युग बदलेगा। मनुष्य के अंदर देवत्व भाव जागृत होना जरूरी है। स्वार्थ छोड़ त्याग की भावना होना आवश्यक है। यह बात अखिल विश्व गायत्री परिवार के प्रमुख प्रणव पंड्या के पुत्र, देव संस्कृति विश्वविद्यालय के प्रति कुलपति डॉ. चिन्मय पंड्या ने कॉलेज रोड स्थित गायत्री मंदिर पर कही। वे सोमवार को एक दिवसीय प्रवास पर झाबुआ आए थे।

वे पहले बसंत कॉलोनी गायत्री मंदिर पहुंचे। यहां से कॉलेज मार्ग स्थित गायत्री शक्तिपीठ पहुंचे। उन्होंने कहा हम कुछ लेने की प्रवृत्ति को बदलकर अपने अंदर देने की प्रवृत्ति को विद्यमान करें। यदि कोई काम निष्काम भाव एवं निस्वार्थ भाव से करते हैं तो हमें अपने अंदर आत्म शांति की असीम प्राप्ति होती है।

गायत्री परिवार ने किया स्वागत

शुरुआत में डॉ. पंड्या का स्वागत गायत्री परिवार के जिला समन्वयक पं. घनश्याम बैरागी, नारी जागरण अभियान की जिला संयोजक नलिनी बैरागी ने किया। पंड्या के साथ मंच पर योगेंद्र गिरी, राकेश गुप्ता, युवा विवेक चौधरी, रामचंद्र गायकवाड़, कृष्ण शर्मा, अमर धाकड़ भी थे। सुभाष गिधवानी ने डॉ. पंड्या को आदिवासी संस्कृति के अनुरूप गुड़िया भेंट की। इस अवसर पर गायत्री परिवार के अर्चना राठौर, हरिप्रिया निगम, मनोरमा डावर, राजकुमारी खंगोरत, प्रशांत डावर, मयंक शर्मा, हर्ष भट्ट सहित बड़ी संख्या में गायत्री परिजन मौजूद थे।

आने वाला समय खतरनाक, अपनी सोच और विचारों में परिर्वतन लाएं

पंड्या ने कहा आज का समय विषम परिस्थितियों वाला है। आने वाला समय और खतरनाक होगा, इसलिए अभी से अपनी सोच और विचारों में परिर्वतन लाए, धर्म मार्ग की ओर अग्रसर हो। इस ओर संकल्प लेकर आगे बढ़े। व्याख्यात पश्चात डॉ. पंडया के साथ अलग-अलग संप्रदाय के लोगों में जैन समाज से यशवंत भंडारी, हिंदू संप्रदाय से डॉ. केके त्रिवेदी, अजय रामावत, मुस्लिम संप्रदाय से जिला सदर मुर्तजा खान, शहर सदर अब्दुल गफूर, नायब सदर कुतुबुद्दीन शेख, हाजी सलीम कादरी, हाजी सलीम खान, पंजाबी समाज से बलवीरसिंह सोहेल, आसरा पारमार्थिक ट्रस्ट से राजेश नागर ने सामूहिक रूप से मशाल प्रज्वलित की। सर्व संप्रदाय के लोगों को डॉ. पंड्या ने साहित्य भेंट किया।

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