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महावीर की दीक्षा और साधना का मार्ग जीवन जीने की शिक्षा देता है

महावीर की दीक्षा और साधना का मार्ग जीवन जीने की शिक्षा देता है झाबुआ | प्रभु महावीर ने 30 वर्ष की उम्र में दीक्षा...

Danik Bhaskar | Sep 12, 2018, 03:51 AM IST
महावीर की दीक्षा और साधना का मार्ग जीवन जीने की शिक्षा देता है

झाबुआ |
प्रभु महावीर ने 30 वर्ष की उम्र में दीक्षा ग्रहण की थी। शुभ मुहूर्त में दीक्षा ग्रहण करने के बावजूद उनके जीवन में कई कष्ट आए। कष्ट तो जीवन में आएंगे प्रभु ने भी साढ़े बारह वर्ष तक अनेक कष्ट सहे किंतु उन्होंने अपने लक्ष्य को कभी नहीं छोड़ा और केवल्य ज्ञान प्राप्त कर अनंत ज्ञानी बने।

यह बात साध्वीश्री पुनीत प्रज्ञा श्रीजी ने मंगलवार को पर्युषण पर्व के छठे दिन बावन जिनालय में श्रावक-श्राविकाओं को संबोधित करते हुए कही। उन्होंने कहा प्रभु की दीक्षा और साधना का मार्ग हर व्यक्ति के जीवन की समस्याओं का समाधन और आनंदमयी जीवन निर्वाह की शिक्षा भी देता है। साध्वीश्री प्रमोदयशा श्रीजी ने दीक्षा के पूर्व प्रभु के जन्म से लेकर दीक्षा ग्रहण करने तक संपूर्ण विवरण देते हुए बताया प्रभु के जन्म के बाद तीनों लोक में खुशियां मनाई जाने लगी। उन्होंने कहा प्रभु के आगमन की खबर सिद्धार्थ राजा को प्रियवंदा दासी देती है। प्रभु के बचपन, शाला गमन, विवाह आदि का पूज्यश्री ने सुंदर विवरण प्रस्तुत किया। श्री संघ के प्रवक्ता डाॅ. प्रदीप संघवी व रिंकू रुनवाल ने बताया भगवान की मूलनायक भगवान की आरती का लाभ वितराग नाहर परिवार, श्री केशरियानाथजी की आरती राजेंद्र रुनवाल परिवार, महावीर स्वामी की आरती का लाभ प्रमोद भंडारी परिवार, मंगलदीप का भूपेंद्र राठौर, गौतम स्वामी की आरती का कमलेश कोठारी, सुभाष कोठारी परिवार, नमस्कार महामंत्र का बाबूलाल कोठारी परिवार, दादा गुरुदेव की आरती सोहनलाल कोठारी परिवार द्वारा तथा माणिभद्रजी की आरती का लाभ संतोष कोठारी परिवार द्वारा लिया गया।

कल मनेगा संवत्सरी पर्व -स्थानीय ऋषभदेव बावन जिनालय में 13 सितंबर को समाजजन संवत्सरी महापर्व मनाएंगे। इस दिन सभी समाजजन तप कर प्रतिक्रमण कर संसार के सभी जीवों से क्षमा याचना करेंगे। 14 सितंबर को सामूहिक क्षमा याचना की जाएगी।