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50 से अधिक गांवों में पानी का संकट, पीएचई विभाग ने नहीं बनाई प्लानिंग, ईई को नोटिस

Bhaskar News Network | Last Modified - Feb 02, 2018, 02:35 AM IST

रामपुर क्षेत्र में लोग बैलगाड़ी से पीने के पानी का परिवहन कर रहे हैं। चंबल किनारे के गांवों में गिरा जलस्तर ...
रामपुर क्षेत्र में लोग बैलगाड़ी से पीने के पानी का परिवहन कर रहे हैं।

चंबल किनारे के गांवों में गिरा जलस्तर

सबलगढ़ क्षेत्र में चंबल किनारे बसे गांव बटेश्वरा,रतियापुरा, निवाड़ी, रायड़ी-राधेन, कलरघटी, कड़ावना, हबसे का पुरा, छीतरियापुरा में जलस्तर 200 से 250 फीट की गहराई पर होने से हैंडपंपों ने काम करना बंद कर दिया है। इन गांव के लोग चंबल जल से गुजारा करने को मजबूर हैं।

पहाड़गढ़ के इन गांवों में जलसंकट

पहाडग़ढ़ विकासखंड के दूरस्थ गांव पालि, ठेह, झीनियां, धौंधा, कन्हार, बहराई, बघेवर, रकैरा, जड़ेरू, देवरा, गीलापुरा, अमरई, बंदरई, घूमखोह, धोबिनी, औरेठी, गुरजा, ऊमरी, जोगीपुरा, अमोई, कालाखेत, भरकापुरा, मरा व मानपुर ऐसे गांव है जहां कम वर्षा के कारण पीने का पानी 200 फीट से भी नीचे उतर गया है। इसके चलते हैंडपंपों ने पानी देना बंद कर दिया है।

1 किमी दूर से ला रहे चंबल का पानी

सुमावली विधानसभा के जैतपुर गांव में लोग एक किलोमीटर दूर बह रही चंबल नदी से पानी भरकर ला रहे हैं। इसके अलावा सावदा, ठेह,कैमारी, मुरान, बंडपुरा, चंद्रपुरा, धवारा, चौचाई व बेड़ापुरा में भी पेयजल की किल्लत है।

नोटिस देकर कलेक्टर ने पूछा- कहां चली गई मोटरें

पेयजल संकट को गंभीरता से लेते हुए कलेक्टर भास्कर लाक्षाकार ने गुरुवार को पीएचई के कार्यपालन यंत्री केआर गोयल को नोटिस से तलब करते हुए पूछा है कि विभाग ने जिले को 60 सिंगल फेस मोटरें हैंडपंपों में डालने के लिए दी थीं लेकिन पीएचई ने अभी तक 15 से 18 मोटरों को ही बंद हैंडपंपों में डलवाया है। शेष मोटरों का उपयोग क्यों नहीं किया गया इसका जबाव ईई से मांगा गया है।

रामपुर क्षेत्र के 16 गांवों में जलसंकट

सबलगढ़ विकासखंड के रामपुरकलां अंचल के 16 गांव में पीने के पानी की समस्या विकराल है। बेरखेड़ा, सिंगारदे व भवरेछा गांव के लोग, पौन किलोमीटर दूर बांसुरी नाले के रुके हुए पानी को भरकर पीने के लिए घर लाते हैं। जौंसिल का पुरा गांव में अभी भी कुएं के पानी से पेयजल की पूर्ति हो रही है।

गणेशपुरा व नंदा का पुरा गांव के वाशिंदे खेतों में लगे ट्यूबवैलों से पीने का पानी भरकर ला रहे हैं। सलमपुर एक ऐसा गांव है जहां के महिला- पुरुष खेतों में लगे ट्यूबवैलों से पानी को बैलगाडिय़ों के जरिए घर तक लाते हैं। पानी वहां दूध से भी ज्यादा कीमती है।

इस अंचल में गोबरा,जरैना, अठैयापुरा, गडरियापुरा, जसलामनी, जलालगढ़, नगावनी व सराय के ग्रामीण हैंडपंपों से पीने का पानी भर रहे हैं। आठ गांव में लगे हैंडपंपों में से आधे हैंडपंप जलस्तर गिर जाने के कारण बंद हो गए हैं। इससे उक्त गांवों में पेयजल की किल्लत पैदा हो गई है।

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Web Title: 50 से अधिक गांवों में पानी का संकट, पीएचई विभाग ने नहीं बनाई प्लानिंग, ईई को नोटिस
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