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प्रयोगशाला तैयार, मिट्टी नमूनों की हो सकेगी जांच

फसल बेचने के बाद किसानों की जेब में लागत से कहीं अधिक मुनाफा पहुंचे उसके लिए खेतों के मिट्टी परीक्षण पर जोर दिया जा...

Bhaskar News Network | Last Modified - Mar 04, 2018, 06:15 AM IST

प्रयोगशाला तैयार, मिट्टी नमूनों की हो सकेगी जांच
फसल बेचने के बाद किसानों की जेब में लागत से कहीं अधिक मुनाफा पहुंचे उसके लिए खेतों के मिट्टी परीक्षण पर जोर दिया जा रहा है। प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी की पहल पर मंडी बोर्ड ने जिले में छह प्रयोगशालाओं का निर्माण कराया है जिनमें अगस्त से मृदा के पोषक तत्वों की जांच का काम जल्द शुरू होगा।

मंडी बोर्ड ने अंबाह, पोरसा, कैलारस, सबलगढ़, पहाडग़ढ़ व जौरा में 36-36 लाख रुपए की लागत से छह नई प्रयोगशालाओं का निर्माण कराया है। 20 गुणा 20 मीटर क्षेत्रफल में बनाई गईं प्रयोगशालाओं में किसान अपने खेतों की मिट्टी के नमूने लेकर आएंगे और उन्हीं की मौजूदगी में मृदा परीक्षण किया जाएगा। मिट्टी परीक्षण की रिपोर्ट में किसान को बताया व समझाया जाएगा कि कौन से फसल लेने के कारण उसके खेत की माटी में किस पोषक तत्व की कितनी कमी हुई है। पोषक तत्व की पूर्ति न होने से फसलों की पैदावार पर क्या प्रभाव पड़ेगा और खेतों में खाद का संतुलित डोज देने पर पैदावार में कितनी वृद्धि होगी।

ऐसे समझें किसान

उप संचालक पीसी पटल के मुताबिक, सरसों, सोयाबीन, मूंगफली व तिल की फसल लेने से खेतों की मिट्टी में सल्फर तत्व की कमी हो जाती है। इससे अगली पैदावार में 15 से 20 फीसदी की कमी हो जाती है। सल्फर की कमी से सरसों के दाने में ऑइल परसेंटेज भी कम होता है।

अरहर, मूंग व उड़द की फसलों को लगातार लेने से मिट्टी में फॉस्फोरस तत्व की कमी हो जाती है। खेत की मिट्टी में यदि फॉस्फोरस तत्व की पूर्ति नहीं की जाए तो अगली पैदावार में 10 से 15 फीसदी की कमी से किसान को नुकसान होता है।

मिट्टी में जिंक तत्व की कमी से गेहूं व बाजरा की फसल की पैदावार 20 प्रतिशत घट जाती है। जिंक की कमी से गेहूं के दाने में प्रोटीन व अमीनो एसिड की क्वालिटी भी कमजोर रहती है। मिट्टी को जिंक तत्व मिलने से वह अन्य पोषक तत्वों के लिए उत्प्रेरक का काम करता है।

मंडी बोर्ड ने जिले में 2.16 करोड़ रुपए की लागत से छह प्रयोगशालाओं का कराया निर्माण

पाहड़गढ़ की मिट्टी प्रयोगशाला बनकर तैयार है।

लैब उपकरणों के लिए मांगे 90 लाख

मंडी बोर्ड द्वारा बनवायी छह लैब के लिए कृषि विभाग को मिट्टी परीक्षण अधिकारी, सूक्ष्म तत्वों के विश्लेषक, लैब टेक्नीशियन, रीजेन्ट्स व उपकरणों की आवश्यकता है। इसके लिए कलेक्टर ने प्रमुख सचिव कृषि को 90 लाख रुपए का मांग-पत्र भेजा है। बजट मिलने के बाद छह प्रयोगशालाओं में मिट्टी परीक्षण करने व किसानों को मृदा स्वास्थ्य कार्ड जारी करने का काम शुरू होगा।

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