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चंबल किनारे के 60 गांवों में अलर्ट पर न मोटरबोट तैयार हैं न गोताखोर

चंबल में बाढ़ के हालत के बाद भी आपदा प्रबंधन की कोई तैयारी नहीं है। चंबल नदी पर जिसकी ड्यूटी, उसे ईवीएम की निगरानी...

Bhaskar News Network | Last Modified - Jul 29, 2018, 02:55 AM IST

चंबल किनारे के 60 गांवों में अलर्ट पर न मोटरबोट तैयार हैं न गोताखोर
चंबल में बाढ़ के हालत के बाद भी आपदा प्रबंधन की कोई तैयारी नहीं है।

चंबल नदी पर जिसकी ड्यूटी, उसे ईवीएम की निगरानी में लगाया

चंबल नदी में कोटा बैराज से पानी छोड़े जाने व जलस्तर की लगातार निगरानी के लिए जल संसाधन विभाग के सब इंजीनियर आरके शर्मा को जिम्मेदारी सौंपी गई है, लेकिन श्री शर्मा की ड्यूटी आजकल ईवीएम की निगरानी में लगा रखी है। उनके सीनियर एग्जीक्यूटिव इंजीनियर बीके जैन मुख्यालय पर नहीं रहते। ऐसी स्थिति में संबंधित एसडीओपी व एसडीएम को चंबल के जलस्तर घटने-बढ़ने की समय पर सूचना भी नहीं मिल पा रही है।

खतरे के निशान से 13 मीटर नीचे 125.50 मी. पर बह रही चंबल नदी

24 घंटे से अंचल में बारिश न होने की वजह से चंबल का जलस्तर कम हुआ है। 129 मीटर पर बह रही चंबल नदी अभी 125.50 मीटर पर आ गया है। यह स्थिति खतरे के निशान से 13 मीटर नीचे है। हालांकि चंबल में उफान कोटा-वैराज से पानी छोड़ने पर बढ़ता है।

गांवों में भरता है पानी

सबलगढ़: देवलाल का पुरा, मदनपुरा, लक्ष्मणपुरा, बुद्धा का पुरा, सीता का पुरा, कलरघटी, बटेश्वरा, जिगना, घेर, कोड़रे का पुरा, रामचंद्र का पुरा। कैलारस: वीलगढ़ा, भालपुरा, जुगनुआपुरा, आमलीपुरा, छऊ का पुरा, गिरजापुरा। जौरा: बर्रेड, छउआपुरा, सिगरौली, वेदपुरा, चिन्नौनी चंबल, डांडेका पुरा, बृजगढ़ी, तिंदोखर, छिनवरा, उत्तमपुरा, ताजपुर, खांड़ौली। अंबाह: इंद्रजीत का पुरा, सुखधान का पुरा, रामगढ़, रतनबसई, वीलपुर, कुथियाना, मलबसई, किसरौली।

हमारा अमला अलर्ट है

चंबल नदी के किनारे बसे 60 गांवों तक आपदा की स्थिति में मदद पहुंचाने के लिए हमारा अमला अलर्ट है। गांवों में कोटवार व पटवारियों की ड्यूटी लगाई गई है। सभी अनुविभागीय अधिकारियों व एसडीओपी को अलर्ट कर कंट्रोल रूम को हर पल की स्थिति पर नजर रखने के लिए कहा गया है। भरत यादव, कलेक्टर मुरैना

एसडीओपी व एसडीएम को करनी थी यह तैयारी

चंबल किनारे बसे गांवों की सूची तैयार कर वहां सतत निगरानी रखी जाए।

होमगार्ड गोताखोरों के नाम व मोबाइल नंबर तैयार करके रखें, ताकि उनकी तत्काल मदद ली जा सके।

डूब क्षेत्र में आने वाले गांवों में ऊंचाई पर बने स्कूल भवन, आंगनबाड़ी केंद्र व अन्य सरकारी इमारतों की सफाई करके रखें ताकि गांव में पानी आने पर ग्रामीणों को इनमें शिफ्ट किया जा सके।

गांव के कोटवारों को अलर्ट कर उनके मोबाइल नंबर एकत्रित करके रख जाएं।

वन विभाग से समन्वय रखें ताकि मोटर बोट आदि तैयार रहें, जिससे आपदा में फंसे लोगों तक तत्काल मदद पहुंच सके।

सबलगढ़, कैलारस व जौरा क्षेत्र के ऐसे ग्रामीणों के नाम व मोबाइल नंबर एकत्रित करे, जो कुशल तैराक हैं व गोताखोर हैं।

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