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दुकानों पर बिक रहा सिंथेटिक दूध बनाने का केमिकल

मातृ व शिशु मृत्यु दर कम हो, इसके लिए स्वास्थ्य विभाग ने गर्भवती महिलाओं की सूची को ऑनलाइन कर दिया है। प्रसव होने तक...

Dainik Bhaskar

May 02, 2018, 03:45 AM IST
दुकानों पर बिक रहा सिंथेटिक दूध बनाने का केमिकल
मातृ व शिशु मृत्यु दर कम हो, इसके लिए स्वास्थ्य विभाग ने गर्भवती महिलाओं की सूची को ऑनलाइन कर दिया है। प्रसव होने तक पूरे सिस्टम की मॉनीटरिंग भोपाल में बैठे अफसर कर रहे हैं। इसके जरिए एमएमआर में कमी लाने का प्रयास किया जा रहा है।

मुरैना जिले मे एक लाख प्रसव पर 279 महिलाओं की मृत्यु का आंकड़ा कम करने के लिए स्वास्थ्य विभाग ने गर्भवती महिलाओं की जानकारी को पूरी तरह ऑनलाइन कर दिया है। लक्ष्य है कि मृत्यु दर को कम कर 100 तक लाना है। इसके लिए आंगनबाड़ी केन्द्र से लेकर जिला अस्पताल व सामुदायिक स्वास्थ्य केन्द्रों तक गर्भवती महिलाओं की केयर को बढ़ाया गया है। प्रसूताओं को प्रसव के बाद घर तक पहुंचाने की व्यवस्था जननी एक्सप्रेस से तय की गई है। मॉनीटरिंग के लिए मदर एंड चाइल्ड ट्रेकिंग सिस्टम सोफ्टवेयर को उपयोग किया जा रहा है। बतादें कि मातृ एवं शिशु मृत्युदर में कमी आ सके। इसको लेकर स्वास्थ्य विभाग के वरिष्ठ अधिकारियों द्वारा कार्ययोजना तैयार कर प्रयास किए जा रहे हैं।

प्रसव पूर्व यूरिन व ब्लड की दो-दो बार जांच कराई जाती है: गर्भवती महिलाओं की प्रसव से पहले के नौ महीनों में यूरीन की दो तथा ब्लड की दो प्रकार की जांच कराई जाती हैं। प्रसूता को यदि 14 दिन से खांसी हो तो पांचवी जांच उसकी कराई जाती है।

प्रोत्साहन राशि का नियम: गर्भवती महिलाओं की प्रसव पूर्व पांच जांच पूर्ण कराने वाली आशा कार्यकर्ता को स्वास्थ्य केन्द्र से 300 रुपए की प्रोत्साहन राशि दी जाती है। इसके अलावा 300 रुपए की राशि प्रसूता को प्रसव के लिए सरकारी अस्पताल तक पहुंचाने के एवज में प्रदान की जाती है।



भास्कर संवाददाता | सबलगढ़

गर्मी में दूध की आपूर्ति बनाए रखने के लिए कारोबारियों ने सिंथेटिक दूध बनाने का कारोबार बढ़ा दिया है। डेयरी व्यवसाय से जुड़े लोग अपने घरों पर सपरेटा में रसायन मिलाकर सिंथेटिक दूध बनाकर उसे दुग्ध पदार्थ बनाने वाली फैक्टरियों को भेज रहे हैं।

नगर सहित ग्रामीण क्षेत्रों में संचालित किराने की दुकानों पर सिंथेटिक दूध बनाने वाले ‘आरएम कैमिकल’ व पावडर सहित कमानी ऑइल की बिक्री खुले आम चल रही है। दूधिया को देखते ही परचून दुकानदार उसे मांग के अनुरूप सिंथेटिक दूध के केमिकल उपलब्ध करा देते हैं। आरएम केमिकल की रेट 600 रुपए किलो चल रही है। आरएम केमिकल में छैना दर्शाने वाले पावडर की रेट 60 रुपए किलो चल रही है। ब्रांडेड कंपनी का यह पावडर 20 किलो की पैकिंग में 5500 रुपए के रेट से आता है लेकिन दूधिए अधिक मुनाफा कमाने के लिए हाल ही में उपलब्ध हुए सस्ती रेट के नए पावडर को खरीद रहे हैं। खास बात यह है कि खाद्य सुरक्षा विभाग के सभी अधिकारियों को इस बात की जानकारी है कि सिंथेटिक दूध बनाने वाले कैमिकल कहां कौन बेच रहा है लेकिन उनके स्तर से ऐसे दुकानदारों के खिलाफ एक भी प्रकरण नहीं बनाया गया है।

आरएम केमिकल की धरपकड़ नहीं: शुद्ध दूध का कारोबार कर रहे लोगों का कहना है कि एसडीएम, सिर्फ आरएम कैमिकल की बिक्री को प्रतिबंधित करा दें तो जिले में सिंथेटिक दूध का बनाया जाना काफी हद तक कम हो जाएगा। आरएम केमिकल को पकड़ने के लिए ट्रांसपोर्ट कंपनियों पर शिकंजा कसना पड़ेगा।

दूधियों की चेकिंग नहीं: प्रशासन ने कभी भी दूधियों की टंकियों में भरे दूध की चेकिंग नहीं कराई है। दूधिए दूध बेचकर जब शहर से गांव जाते हैं तो उनकी टंकियों में केमिकल रखा होता है इसलिए दूधियों की वापसी के दौर में भी उनकी जांच-पड़ताल होना चाहिए।

नई व्यवस्था

प्रसव होने तक भोपाल में बैठे अफसर करेंगे मॉनीटरिंग

सिंथेटिक दूध गांव से तैयार करकर डेरियों पर भेजा जा रहा है।

मातृ व शिशु मृत्यु दर घटाने को लेकर स्वास्थ्य विभाग द्वारा किए जा रहे प्रयास, ऑनलाइन दर्ज की गई गर्भवती महिलाओं की सूची

शिशुओं के टीकाकरण पर जोर

एनीमिया का इलाज:गर्भवती महिला के रक्त में हीमोग्लोबिन की मात्रा सात मिलीग्राम से कम हो तो प्रसूता को आयरन सुक्रोज के तीन इंजेक्शन लगाए जाते हैं। सात से 11 मिग्रा हीमोग्लोबिन पाए जाने पर आयरन की 200 टेबलेट दी जाती हैं। 11 मिग्रा से अधिक हीमोग्लोबिन पाए जाने पर महिला को आयरन की 100 टेबलेट प्रदान की जाती हैं ताकि एनीमिया की कमी के चलते प्रसव में जान के लिए कोई खतरा पैदा न हो।

शिशुओं के टीकाकरण पर जोर: मुरैना जिले में एक हजार बच्चे पैदा होने पर 60 शिशुओं की मृत्यु दर के आंकड़े को कम करने के लिए स्वास्थ्य विभाग, बच्चों के टीकाकरण पर जोर दे रहा है। इसके तहत शिशु के पैदा होने से लेकर उसके डेढ़ साल की आयु तक अलग-अलग प्रकार के टीके लगाए जाने के कार्यक्रम को क्रियान्वित किया जा रहा है जिसकी ऑनलाइन फीडिंग की जा रही है। बच्चों को बीसीजी, डीपीटी, पोलियो, खसरा, विटामिन ए सहित बूस्टर के टीके लगाए जाते हैं।

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