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बारिश से जल स्रोतों का पानी दूषित, पीएचई ने नहीं दीं सरपंचों को जल परीक्षण के लिए किट

लोक स्वास्थ्य यांत्रिकी विभाग ने वर्ष 2008 के बाद सरपंच-सचिवों को नहीं दी नई टेस्टिंग किट भास्कर संवाददाता |...

Dainik Bhaskar

Aug 10, 2018, 03:45 AM IST
लोक स्वास्थ्य यांत्रिकी विभाग ने वर्ष 2008 के बाद सरपंच-सचिवों को नहीं दी नई टेस्टिंग किट

भास्कर संवाददाता | मुरैना

बारिश के कारण गांव के जलस्रोतों का पानी दूषित हो गया है। कई स्थानों पर कुओं के पानी का स्वाद भी वर्षा के कारण बदल गया है। लोग दूषित जल पीकर बीमार हो रहे हैं लेकिन पीएचई ने जुलाई बीतने तक सरपंचों को पानी जांचने की किट प्रदान नहीं की हैं।

जिले के 20 से अधिक गांव ऐसे हैं जहां के जल स्रोतों में फ्लोराइडयुक्त पानी आता है। कहीं-कहीं पानी में आयरन की मात्रा अधिक होने से वह पीने योग्य नहीं है। खारे पानी की शिकायत तो 100 से अधिक गांव के जलस्रोतों में पायी गई है। पानी की जांच के लिए लोक स्वास्थ्य यांत्रिकी विभाग को माह जून में 100 से अधिक पंचायतों के सरपंचों को पानी जांचने की किट प्रदान करना थी लेकिन बजट का टोटा होने के कारण विभाग ने ऐसा जुलाई बीतने तक नहीं किया। किट की कीमत महज 600 रुपए होने के बाद भी लोक स्वास्थ्य यांत्रिकी विभाग इस पर बजट खर्च नहीं कर पा रहा है। इससे गांवों में सरपंच दूषित जल की जांच नहीं कर पा रहे हैं। बृजगढ़ी के सरपंच महेन्द्र सिंह धाकड़ का कहना है कि गुनापुरा में दूषित जल के कारण एक दर्जन से अधिक लोग बीमार हैं। लेकिन हम पानी की जांच नहीं कर पा रहे हैं।

नहीं हो रही पानी की जांच : पंचायत मुख्यालयों पर पानी की किट उपलब्ध न होने से हैंडपंप व कुओं के प्रदूषित जल की जांच नहीं हो पा रही है। इस कारण पिछले दिनों सबलगढ़, कैलारस व जौरा क्षेत्र में गंदा पानी पीने से लोग बीमार हो रहे हैं।

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