• Hindi News
  • Madhya Pradesh
  • Kailaras
  • घोषणा के चार साल बाद भी न शक्कर कारखाना चालू हुआ न अटार-उसैदघाट के पुल बन पाए
--Advertisement--

घोषणा के चार साल बाद भी न शक्कर कारखाना चालू हुआ न अटार-उसैदघाट के पुल बन पाए

2017 में रजौधा की सभा में शक्कर कारखाना शुरू कराने की घोषणा करते हुए।

Dainik Bhaskar

May 28, 2018, 03:55 AM IST
घोषणा के चार साल बाद भी न शक्कर कारखाना चालू हुआ न अटार-उसैदघाट के पुल बन पाए
2017 में रजौधा की सभा में शक्कर कारखाना शुरू कराने की घोषणा करते हुए।



भास्कर संवाददाता | रजनीश दुबे

मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान चार साल पांच महीने में मुरैना जिले के लिए 53 घोषणाएं कर चुके हैं। लेकिन इनमें से 46 फाइलों से बाहर ही नहीं निकलीं। प्रशासन का ही कहना है कि सिर्फ सात घोषणाओं पर अमल हुआ है। जो घोषणाएं अब भी फाइलों में हैं, उसके अमल में न आने पाने का सबसे बड़ा कारण बजट मंजूर न होेना है। बड़ी घोषणाओं में न तो शक्कर कारखाना चालू हुआ और ना ही चंबल एक्सप्रेस बनाने के लिए केन्द्र से पैसा मिल सका। चंबल के अटार व उसैद घाट पर बड़े पुल बनाने के मामले में भी लटके हुए हैं।

जल्द ही इन योजनाओं का क्रियान्वयन कराया जाएगा


10 करोड़ से बनाए जाने वाले ऑडिटोरियम का काम बंद, सीतापुर में एक को छोड़कर कोई दूसरा उद्योग नहीं आया

1. साढ़े चार साल में दो बार घोषणा, अब तक चालू नहीं हुई शुगर मिल

मुख्यमंत्री ने 29 जनवरी 2017 को रजौधा प्रवास के दौरान घोषणा की थी कि आठ साल से बंद कैलारस शक्कर कारखाना को जल्द ही चालू कराया जाएगा। इसके लिए पीपीपी मोड व विभागीय आधार पर कारखाना संचालन का विकल्प तय किया गया था। एक साल पांच महीने बीत जाने के बाद सरकार किसी भी मोड पर शक्कर कारखाना चालू नहीं करा सकी है। कारखाना बंद रहने से जौरा, कैलारस, सबलगढ़ व विजयपुर के चार बाजारों में पैसे का ट्रांजक्शन थमा हुआ है। 10 हजार किसान आठ साल से गन्ना का उत्पादन नहीं कर पा रहे हैं। 400 कर्मचारी बेरोजगार बैठे हुए हैं। सीएम ने कारखाना को चलवाने की घोषणा विधानसभा चुनाव से पहले भी सबलगढ़ व जौरा की सभाओं में की थीं।

2. चंबल एक्सप्रेस-वे के लिए बजट ही मंजूर नहीं

चंबल एक्सप्रेस-वे का काम शुरू कराने के लिए भी सीएम ने रजौधा में 29 जनवरी 17 को घोषणा की थी लेकिन अभी तक इस प्रोजेक्ट के लिए बजट मंजूर नहीं हुआ है। चंबल एक्सप्रेस -वे बनने से मुरैना, श्योपुर व भिंड जिले के 5000 युवाओं को रोजगार के अवसर मिलेंगे। लेकिन सीएम बीते सवा साल में इस अहम प्रोजेक्ट को धरातल पर लाने के प्रयासों को तेज नहीं कर पाए हैं।

3. चंबल महोत्सव को भूला प्रशासन

चंबल के धवल पक्ष को उज्जवल करने के लिए मुख्यमंत्री ने 22 फरवरी 2014 को मुरैना स्टेडियम में घोषणा की थी कि मुरैना में हर साल चंबल महोत्सव का आयोजन होगा लेकिन पहले आयोजन के बाद प्रशासन सीएम की घोषणा को भूल गया। जबकि फाइलों में यह मुद्दा आज भी ज्वलंत है।

4.पर्यटन हब की घोषणा, सड़कों के लिए नहीं दिया बजट

12 दिसंबर 2013 को सीएम मुरैना आए थे। उन्होंने सार्वजनिक कार्यक्रम में घोषणा की थी कि मुरैना, भिंड व श्योपुर जिले में बिखरी पुरासंपदा को एक सीरिज में लाने के लिए चंबल को पर्यटन हब के रूप में विकसित किया जाएगा। इस तारतम्य में लोक निर्माण विभाग ने ककनमठ, मितावली, पढ़ावली व बटेश्वरा की सड़कों के जीर्णोद्धार के लिए राज्य शासन से बजट मांगा था। हाईकोर्ट के दखल के बाद भी शासन ने सड़कों के लिए अब तक 46 करोड़ रुपए का बजट मंजूर नहीं किया है। 29 जनवरी 2017 को पहाडग़ढ़ क्षेत्र के लिखी छाछ को पर्यटन के नक्शे पर लाने के लिए भी सांसद अनूप मिश्रा के प्रस्ताव पर सीएम ने उस प्रोजेक्ट को मंजूर नहीं किया है।

क्षेत्र में यह काम भी अब तक नहीं हो सके पूरे


5. 12 पंचायतों में सड़क पानी व सीवर नहीं



X
घोषणा के चार साल बाद भी न शक्कर कारखाना चालू हुआ न अटार-उसैदघाट के पुल बन पाए
Bhaskar Whatsapp

Recommended

Click to listen..