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नैरोगेज ट्रेन में ओवरलोडिंग से हो सकता है हादसा, 105 वर्ष पुराने पुल-पुलिया कमजोर

मुरैना | ग्वालियर-श्योपुर नैरोगेज पैसेंजर ट्रेन में यात्रियों की ओवरलोडिंग के चलते कभी भी हादसा हो सकता है। रेलवे...

Bhaskar News Network | Last Modified - May 25, 2018, 04:00 AM IST

मुरैना | ग्वालियर-श्योपुर नैरोगेज पैसेंजर ट्रेन में यात्रियों की ओवरलोडिंग के चलते कभी भी हादसा हो सकता है। रेलवे के अफसर न तो ओवरलोडिंग रोक पा रहे हैं और ना हीं बारिश से पहले पुराने नैरोगेज ट्रैक की मरम्मत करा रहे हैं। ट्रेन के संचालन से जुड़ी व्यवस्थाओं में सुधार कैसे होगा, इस पर रेल प्रशासन गंभीर नहीं है। 105 वर्ष पुरानी नैरोगेज पैसेंजर ट्रेन में ओवरलोडिंग के कारण कोचों के एक्सल गर्म होकर जलने लगते हैं। ऐसे में ट्रेन के कोच में आग लगने का अंदेशा बना रहता है। इसके अलावा ओवरलोडिंग से नैरोगेज ट्रैक भी अनबैलेंस हो जाता है। इन हालातों में नैरोगेज पैसेंजर ट्रेन का डिरेलमेंट आए दिन होता रहता है। बीते डेढ़ साल में डिरेलमेंट की घटनाओं पर गौर करें तो ट्रेन के कोच 15 बार से ज्यादा पटरियों से नीचे उतरे हैं ।

यहां होता है अक्सर डिरेलमेंट : ग्वालियर स्टेशन से घोसीपुरा के बीच कटी घाटी के पास नैरोगेज पैसेंजर ट्रेन चाहे जब फेल हो जाती है। बानमोर से सुमावली स्टेशन के बीच 45मिनट के सफर में ट्रेन के कोच पटरी से उतर जाते हैं। या इंजन फेल हो जाता है। बानमोर से सुमावली के बीच घोड़ा पछाड़ नदी पर ओवरलोडिंग के कारण ट्रेन का संचालन बंद हो जाता है।कैलारस से सबलगढ़ के बीच नैरोगेज पैसेंजर ट्रेन का डिरेलमेंट कई बार हो चुका है। सेमई से सबलगढ़ के बीच नैरोगेज ट्रैक 100 साल पुराना होने से कहीं-कहीं अनबैलेंस हो गया है। वहां ट्रेन के कोच पटरी से उतर जाते हैं।

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