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सबलगढ़-जौरा विस के बीच झूल रहा कैलारस नगर, विकास के नाम पर मिले सिर्फ वादे

वर्ष 1967 से 2008 तक शक्कर कारखाने की वजह से मशहूर कैलारस नगर राजनैतिक उदासीनता की वजह से विकास की दृष्टि से पिछड़ रहा है।...

Bhaskar News Network | Last Modified - Jun 23, 2018, 04:25 AM IST

सबलगढ़-जौरा विस के बीच झूल रहा कैलारस नगर, विकास के नाम पर मिले सिर्फ वादे
वर्ष 1967 से 2008 तक शक्कर कारखाने की वजह से मशहूर कैलारस नगर राजनैतिक उदासीनता की वजह से विकास की दृष्टि से पिछड़ रहा है। विगत आठ साल से शक्कर कारखाना बंद रहने से क्षेत्रीय किसानों को आर्थिक नुकसान झेलना पड़ रहा है, वहीं नगर में सिविल न्यायालय, ट्रेजरी, गर्ल्स कॉलेज सहित अस्पताल में ब्लड बैंक जैसी सुविधाएं नहीं है। यहां रहने वाले सामाजिक विश्लेषकों का मानना है कि कैलारस नगर पूर्व में सबलगढ़ विधानसभा क्षेत्र में आता था, वहीं नए परसीमन के बाद इसे जौरा विधानसभा में शामिल कर दिया गया। इन विधान सभाओं में कांग्रेस व भाजपा जैसी बड़ी पार्टियों के विधायक चुनकर आए, लेकिन कैलारस का विकास करने किसी ने भी ठोस कदम नहीं उठाए।

नगर सहित 32 पंचायत शामिल हैं जौरा विधानसभा क्षेत्र में: कैलारस जनपद क्षेत्र में 65 ग्राम पंचायतें शामिल हैं। जिसमें 32 ग्राम पंचायतें जौरा विधानसभा क्षेत्र में शामिल हैं तथा 33 ग्राम पंचायतें सबलगढ़ विधान सभा क्षेत्र में आती हैं। वर्तमान में कैलारस नगर में मतदाताओं की संख्या 20 हजार से अधिक हो चुकी है, वहीं 32 ग्राम पंचायतों में 40 हजार मतदाता निवासरत हैं। इस लिहाज से कैलारस तहसील में 60 जौरा विधान सभा क्षेत्र के 60 हजार से अधिक मतदाता निवास करते हैं। बावजूद इसके विकास की दृष्टि से कैलारस पिछड़ हुआ है।

60 हजार मतदाता होने के बाद भी विकास से अछूता कैलारस

कैलारस में आठ साल से बंद पड़ा कैलारस शक्कर कारखाना।

25 साल सबलगढ़ विधानसभा में रहा कैलारस

बता दें कि वर्ष 1972 से 2007 तक कैलारस नगर सबलगढ़ विधान सभा क्षेत्र में शामिल रहा। इसके बाद हुए परसीमन (वर्ष 2008 से) में इसे जौरा विधान सभा क्षेत्र में शामिल कर दिया गया। इसके पीछे एक वजह यह भी रही कि सबलगढ़ से कैलारस की दूरी 22 किलोमीटर है, वहीं जौरा से कैलारस की दूरी 18 किलोमीटर रह जाती है।

इन सुविधाओं के बगैर परेशानी झेल रही नगर की जनता

शक्कर कारखाना: 1967 में कैलारस में स्थापित किया गया शक्कर कारखाना वर्ष 2008 से बंद है। इस हाल में इस क्षेत्र में रहने वाले 25 हजार किसान एवं एक हजार कर्मचारी की रोजी-रोटी प्रभावित है। मुख्यमंत्री स्वयं शक्कर कारखाना चालू कराने की घोषणा कर चुके हैं, लेकिन मुख्यमंत्री का वायदा अब तक पूरा नहीं हुआ।

सिविल न्यायालय: कैलारस क्षेत्र में रहने वाले लोगों को न्यायालयीन कामकाज के लिए सबलगढ़ न्यायालय जाना पड़ रहा है। ऐसे में लोगों का अतिरिक्त समय व पैसा दोनों खर्च हो रहा है। अभिभाषक संघ यहां कई साल सिविल न्यायालय खोलने की मांग कर रहा है, लेकिन वकीलों व जनता मांग अब तक पूरी नहीं हुई।

सरकारी कॉलेज: कैलारस नगर में एक भी सरकारी कॉलेज नहीं है। ऐसे में यहां रहने वाले छात्रों को महंगी फीस चुकाकर निजी कॉलेज में पढ़ना पड़ रहा है। जबकि मुख्यमंत्री यहां सरकारी कॉलेज खोलने की घोषणा कर चुके हैं, लेकिन अमल अब तक नहीं हुआ।

ब्लड बैंक की सुविधा नहीं: सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र में ब्लड बैंक की सुविधा नहीं होने से दुर्घटना में घायल एवं गंभीर मरीजों को जिला अस्पताल रैफर करना पड़ रहा है।

घोषणाओं तक सीमित हैं मुख्यमंत्री के वादे

कांग्रेस व भाजपा के विधायकों ने हमेशा वोट बैंक की ओर ध्यान दिया है। कैलारस क्षेत्र की समस्याएं केवल इनके लिए केवल चुनावी मुद्दा हैं। मप्र मुख्यमंत्री स्वयं कैलारस आकर यहां शक्कर कारखाना एवं सरकारी कॉलेज खोलने की घोषणा कर चुके हैं। बावजूद इसके इन घोषणाओं मूर्तरूप प्रदान नहीं किया गया। अशोक तिवारी, पूर्व नगर पंचायत अध्यक्ष

अब मतदाता अपना निर्णय देंगे

कैलारस क्षेत्र के मतदाता राजनीति का शिकार होते रहे हैं। लेकिन अब विकास को केंद्र में रखकर मतदाता अपना निर्णय देंगे। इसके लिए चुनावी समर में मतदाता जागरूकता अभियान चलाएंगे। मातादीन सर्राफ, अध्यक्ष अग्रवाल समाज कैलारस

नगर को सुविधाएं नहीं मिलीं

कैलारस नगर सिविल न्यायालय, ट्रेजरी, एसडीएम कोर्ट जैसी सुविधाओं से महरूम है। इसके लिए अभिभाषक संघ एवं नगर की जनता ने समय-समय पर मांग की है। लेकिन नगर को यह सुविधाएं अब तक मुहैया नहीं कराई गई। दिनेश हरदेनियां, अध्यक्ष अभिभाषक संघ कैलारस

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