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दो दिन में बारिश नहीं हुई तो 85 हजार हेक्टेयर में अंकुरित पौधा हो जाएगा नष्ट

बारिश की राह देखते हुए किसान। इन फसलों की किसानों ने की बोवनी फसल (हेक्टेयर में) लक्ष्य पूर्ति बाजरा 1.45 लाख 70...

Dainik Bhaskar

Jul 12, 2018, 05:55 AM IST
दो दिन में बारिश नहीं हुई तो 85 हजार हेक्टेयर में अंकुरित पौधा हो जाएगा नष्ट
बारिश की राह देखते हुए किसान।

इन फसलों की किसानों ने की बोवनी

फसल (हेक्टेयर में) लक्ष्य पूर्ति

बाजरा 1.45 लाख 70 हजार

अरहर 19 हजार 7 हजार

मूंग 5 हजार 800

उड़द 5 हजार 1 हजार

तिल 17 हजार 7 हजार

पानी देने के लिए नहीं साधन दोबारा करनी पड़ेगी बोवनी


फसल को बचाने के लिए कुआं से देना पड़ेगा पानी


प्रति हेक्टेयर, पांच हजार से अधिक खर्च

बारिश होने के बाद किसानों ने पहले खरीफ की बोवनी के लिए एक हेक्टेयर की तीन बार जुताई कराई जिसका खर्चा 3 हजार रुपए हुआ। उसके बाद बाजरा की पांच थैली 1500 रुपए की बाजार से खरीदी। बोवनी के बाद एक बार फिर से ट्रैक्टर से जुताई की। यानि चार बार जुताई व बीज का करीब 55 रुपए एक हेक्टेयर में खर्चा हुआ।

तापमान अधिक इसलिए पौधा झुलसने का है डर

पांच दिन से तापमान 38 व 40 डिग्री चल रहा है। यदि बारिश हो जाए तो तापमान में गिरावट आए जाएगी। लेकिन गर्मी की वजह से खेतों की नमी पूरी तरह से खत्म होती जा रही है। यदि बारिश नहीं हुई तो दो तीन दिन में 50 प्रतिशत पौधा नष्ट हो जाएगा। बचा हुआ एक दो दिन में। किसान हर रोज बारिश होने का इंतजार में बैठा हुआ है। क्योंकि किसानों के पास बारिश के अलावा कोई अन्य साधन नहीं हैं।

पिछले साल बारिश न होने के कारण कम हुआ था उत्पादन

पिछली वर्ष किसानों ने एक लाख हेक्टेयर में खरीफ की बोवनी की थी। बोवनी के बाद भी अच्छी बारिश हुई थी। लेकिन जब फसल में बीज पढ़ने लगा था। उस समय पानी की आवश्यकता थी। लेकिन उस समय बारिश कम हुई। वहीं कुछ किसानों ने तो अपने निजी कृषि पंपों से पानी देकर फसल को बचा लिया था। वहीं उत्पादन में काफी अंतर आया था। वहीं कुछ फसल सूख गई थी। जिससे किसानों को काफी नुकसान हुआ था।

इस समय खरीफ फसल के लिए बहुत जरूरी है बारिश


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