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सत्य का पालन करना ही सबसे बड़ा धर्म: रामसुभग

लाख पूजा करो पर उसमें सत्य नहीं तो कोई फायदा नहीं। कई लोग इतने धार्मिक होते हैं कि वे प्याज, लहसुन तक नहीं खाते।...

Bhaskar News Network | Last Modified - May 06, 2018, 07:00 AM IST

सत्य का पालन करना ही सबसे बड़ा धर्म: रामसुभग
लाख पूजा करो पर उसमें सत्य नहीं तो कोई फायदा नहीं। कई लोग इतने धार्मिक होते हैं कि वे प्याज, लहसुन तक नहीं खाते। लेकिन वे घूस खाने में कतई संकोच नहीं करते। गलत काम के जरिए अर्थ संग्रह करते हैं। इस तरह के धार्मिक लोगों को कभी शांति प्राप्त नहीं होती। सत्य का पालन करना ही मनुष्य का धर्म है। यह उपदेश शनिवार को जंगल क्षेत्र मे स्थित ईश्वरा महादेव मंदिर पर चल रहे 108 कुंडीय श्रीराम महायज्ञ के दौरान साकेत धाम अयोध्या से पधारे संत रामसुभग देवाचार्य/ बिनैका बाबा श्रद्धालुओं को सुना रहे थे।

108 जोड़े आहुतियां दे रहे हवन कुंडो में

पहाडग़ढ़ सहित आसपास के ग्रामीणों के सहयोग से कराए जा रहे इस धार्मिक आयोजन में प्रतिदिन 108 जोड़े आहुतियां दे रहे हैं। विद्घानों के सानिध्य में यहां विश्वकल्याण की कामना से श्रीराम महायज्ञ का आयोजन चल रहा है। पहाडग़ढ़, जौरा व कैलारस क्षेत्र के ग्रामीण यहां भारी संख्या में धार्मिक लाभ लेने आ रहे हैं।

जंगल में स्थित ईश्वरा महादेव पर चल रहा 108 कुंडीय श्रीराम महायज्ञ

हवन कुंड की परिक्रमा करते श्रद्धालू।

रात्रि बेला में एयर कूल्ड पंडाल में होती है रामलीला

श्रीराम महायज्ञ में सुबह हवन-पूजा आदि गतिविधियां हो रहीं हैं। अपरान्ह 3 से 4 बजे तक संतजन की प्रवचन श्रंखला चलती है। इसके बाद शाम 6 बजे अयोध्या से पधारे संत बिनैका बाबा के मुखार बिंदु से रामकथा का वाचन होता है। रात्रि बेला में 8 से 10 बजे तक यहां वृंदावन से आए कलाकारों द्वारा रामलीला का रोचक मंचन किया जा रहा है। जिसमें ताड़का वध, धनुष यज्ञ, राम विवाह का मंचन दर्शकों का प्रमुख आकर्षण का केंद्र रहा।

मान्यता: अदृश्य शक्ति शिवलिंग पर चढ़ाती है विल्वपत्र

ईश्वरा महादेव मंदिर कैलारस से 22 किलोमीटर दूर जंगल में स्थित है। श्रद्धालुओं की सुविधा के लिए वर्तमान में यहां पक्काी सड़क बन गई है, लेकिन यहां स्वयं के साधन से ही मंदिर पर पहुंचा जा सकता है। एसी मान्यता है कि सूर्याेदय से पूर्व यहां अदृश्य शक्ति शिवलिंग पर बिल्वपत्र व फूल चढ़ाने आती है। इस मंदिर के आसपास तीन, सात व ग्यारह पत्ते वाले बिल्वपत्रों के वृक्ष लगे हुए हैं।

एयर कूल पंडाल में बेहतर इंतजाम

धार्मिक आयोजन के दौरान श्रद्धालुओं को परेशानी न हो इसके लिए ग्रामीण आयोजकों द्वारा न केवल एयरकूल पांडाल लगाई गई है, बल्कि पानी, भोजन प्रसादी आदि का भी उचित इंतजाम किया गया है।

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