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देवास जिला: एक लाख दस हजार संग्राहक जुटेंगे तेंदूपत्ता तुड़ाई में

भास्कर संवाददाता | पुंजापुरा उप वनमंडल बागली के अंतर्गत चार वनपरिक्षेत्र सहित जिले के 10 वन परिक्षेत्रों में 29...

Danik Bhaskar | May 18, 2018, 04:55 AM IST
भास्कर संवाददाता | पुंजापुरा

उप वनमंडल बागली के अंतर्गत चार वनपरिक्षेत्र सहित जिले के 10 वन परिक्षेत्रों में 29 प्राथमिक लघु वनोपज समितियों के माध्यम से तेंदूपत्ता संग्रहण का कार्य करेगी। पत्तों की उपलब्धता और बारिश पूर्व लगभग 30 मई तक संग्रहण का कार्य चलेगा। इसमें जिलेभर के करीब एक लाख 10 हजार संग्राहक जुटेंगे। ग्रामीण क्षेत्रों में संग्राहक बड़ी संख्या में जंगल में पत्ते तोड़ने का कार्य कर रहे हैं, वहीं पत्तों का गट्टा बनाकर अपने घर लेकर आ रहे हैं। घर पर बच्चों से लेकर बुजुर्ग तक गड्डी बनाने का कार्य कर रहे हैं।

देवास जिले की 10 वन समितियों देवास, बागली, पुंजापुरा, उदयनगर, जिनवानी, कांटाफोड़, सतवास, कन्नौद-खातेगांव व पानीगांव वन परिक्षेत्रों को करीब 77400 मानक बोरा का लक्ष्य रखा गया है। इन परिक्षेत्रों में विभाग द्वारा शाख कर्तन का कार्य पहले ही किया जा चुका है। संग्रहण के लिए 200 रुपए प्रति 100 तेंदूपत्ता की दर पर मजदूरी का भुगतान होगा। संग्रहण के लिए 29 समितियां बनाई गई हैं। 29 प्रबंधकों को नियुक्त किया है, जबकि 424 संग्रहण केंद्रों में 424 फड़ मुंशी कार्य करेंगे। तेंदू पत्ते की 100 गड्डी 200 रुपए की दर निर्धारित की गई है। जिसका मानक बोरा 2000 रुपए की दर से मजदूरी भुगतान होगा।

नई मुख्यमंत्री तेंदूपत्ता संग्राहक सहायता योजना के अंतर्गत तेंदूपत्ता संग्राहक की आयु 18 वर्ष से 60 वर्ष के मध्य होने की दशा में सामान्य मृत्यु पर दस हजार, आंशिक अपंगता में 20 हजार, पूर्ण अपंगता होने पर 50 हजार, दुर्घटना में मृत्यु होने की दशा में दो लाख रुपए तक का मुआवजा राज्य शासन की ओर से दिया जाएगा।

तेज गर्मी में हुआ पत्तों का पकाव

इस वर्ष वनों में आग की घटनाएं अधिक हुई हैं। वन के विशेषज्ञों व वनों से लघुवनोपज प्राप्त करने वाले ग्रामीणों का कहना है कि आग की घटनाओं से वनों की अन्य वनस्पतियों को तो नुकसान होता है। लेकिन तेंदूपत्ता के पौधों को आग से उत्पन्न होने वाली गर्मी से लाभ पहुंचता है। क्षेत्र में यह माना जाता है कि तेंदूपत्ता की आवक बढ़ाने के लिए ही वनों में आग लगाने की घटनाएं अंजाम दी जाती हैं। बहरहाल पिछले दो दिनों से तापमान में गिरावट दर्ज हुई है। लेकिन लगातार तीव्र गर्मी पड़ने से पत्तों का पकाव अच्छा रहा है।