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परोपकार करना पुण्य, दूसरों को पीड़ा देना पाप- माताजी

जैन श्वेतांबर स्थानक भवन में शुक्रवार सुबह पूज्य महासती नूतन प्रभाजी के प्रवचन हुए। उन्होंने बताया भगवान महावीर...

Danik Bhaskar | Mar 04, 2018, 02:50 AM IST
जैन श्वेतांबर स्थानक भवन में शुक्रवार सुबह पूज्य महासती नूतन प्रभाजी के प्रवचन हुए। उन्होंने बताया भगवान महावीर की वाणी 32 आगमों में संकलित है। चिंतन में यह आया कि 32 आगमों को ज्ञान मनुष्य अपने प्रमाद के वशीभूत होकर मस्तिष्क में नहीं रख पाता है।

उस ज्ञान का अर्जन नहीं कर पाता है तो कुछ चिंतन करने का ख्याल आया क्योंकि व्यास गुरु ने जब 18 पुराणों की रचना की तो किसी जिज्ञासु ने निवेदन किया। ऋषि प्रवर क्या अच्छा होता कि इनका सार दो वाक्यों में प्रस्तुत कर देते। ऋषि प्रवर ने चिंतन कर 18 आगमों का सार दो वाक्यों में प्रस्तुत किया। परोपकाराय-पुण्याय यानी परोपकार करना पुण्य है व दूसरों को पीड़ा देना पाप है। इसी प्रकार आगमों का सार सोचा गया। भगवान महावीर का जीवों को मार्गदर्शन देने का लक्ष्य है। पूज्य नूतन प्रभाजी ने बताया कर्मों से मुक्त बनें। गुरुणि मैय्या पूज्य रमणिक कंवरजी ने बताया भगवान महावीर ने कहा है कि हमें अगर वचन प्राप्त हुए, वाणी मिली तो उसका सदुपयोग करें। क्योकि 5 इंद्रियों में एक रसनेंद्रिय ही ऐसी है जिसके 3 काम है। जब भी बोलें हित, मीत, प्रिय व मधुर वचन ही बोलें। कभी कड़वा नहीं बोलना चाहिए। पूज्य महासती वंदनाजी ने प्रवचन में सुमधुर भजनों की प्रस्तुति दी। इस दौरान बड़ी संख्या में समाज के लोग पहुंच रहे हैं। साथ ही विभिन्न धार्मिक आयोजन किए जा रहा है।