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चल रहा तप का दौर, संत दे रहे प्रवचन की प्रसादी

जैन श्वेतांबर स्थानक भवन में होली चातुर्मास के लिए विराजित पूज्य गुरुणि मैया निमाड़ सौरभ रमणिक कंवर जी, नूतन...

Danik Bhaskar | Mar 02, 2018, 03:45 AM IST
जैन श्वेतांबर स्थानक भवन में होली चातुर्मास के लिए विराजित पूज्य गुरुणि मैया निमाड़ सौरभ रमणिक कंवर जी, नूतन प्रभाजी, निर्मल प्रभा जी, पूनम श्री जी, वंदना श्री जी के सानिध्य में अनेक तप आराधना हुई। समाजजनों ने उपवास, एकासन, आयम्बिल का तप आराधना की। दोपहर में मांगलिक भवन में चौबीसी हुई। समाज की महिलाओं ने चौबीस तीर्थंकरों की स्तुति व भजन गाए। सती मंडल ने भी सुमधुर भजन गाए।

जैन स्थानक भवन में सुबह प्रवचन के दौरान पूज्य पूनम श्रीजी ने होली चातुर्मास प्रसंग पर कहा हम महावीर को मानते हैं लेकिन महावीर को नहीं मानते। अगर हम महावीर की मानने लग जाए तो हमारे आत्म विकास में देर नहीं लगेगी। महावीर भगवान ने कहा आवश्यक कार्य में विवेक रखे व अनावश्यक कार्य का त्याग करें। धर्म सभा को संबोधित करते हुए नूतन प्रभा जी ने कहा जिन शासन में कैसी व्यवस्था है प्रभु ने कर्म से बचते रहने की बात कही। दिनभर के पाप के अपराध पाप व रात के पाप से मुक्त होने के लिए सुबह का प्रतिक्रमण करना व अगर कोई रोज न कर सके तो 15 दिन। उसमें भी नहीं कर सके तो 4 महीने बाद आत्मा अजर है लेकिन सिद्ध, बुद्ध मुक्त है। गुरुणि मैया रमणिक कंवर की ने जिनवाणी के माध्यम से बताया संत का सानिध्य जीवन के लिए श्रेयकार है। संत की ऊर्जा साधना से हमारे कर्मों के क्षय होता है। संत का महत्व बताते हुए कहा गंगा मैया इतने व्यक्ति के पाप के बोझ से सोचने लगी है कि मेरे ऊपर से यह पापों का बोझ कैसे खत्म होगा। वह ब्रह्मा जी के पास पहुंची। ब्रह्मा जी ने कहा कोई सच्चा सदगुरु संत तेरे द्वार से निकलेंगे व उनकी दृष्टि तुम पर गिरेगी। उस समय तुम पाप के बोझ से मुक्त हो जाओंगे। कितना बड़ा संत दर्शन या संत के साधना का फल है।

श्वेतांबर जैन स्थानक भवन में होली चातुर्मास के लिए पहुंचे संतों के सानिध्य में हो रहे धार्मिक आयोजन

जैन श्वेतांबर स्थानक भवन में प्रवचन देते संत।

होली पर दिया संदेश

होली पर गुरुणि मैया व साध्वी मंडल में उपस्थित जनसमुदाय को होली चातुर्मास का महत्व बताते हुए कहा घृणा, नफरत खत्म करना चाहिए। प्राणी मात्र में प्रेम होना चाहिए। पानी व्यर्थ नहीं बहाना चाहिए। प्रवचन के आखरी में महामांगिल हुई।