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रेत माफिया को खुली छूट, सरपंच और सचिव भी बने खनन कारोबारी

रेत कारोबारी, खनन माफिया इन दिनों क्षेत्र में इनकी ही चर्चा हो रही है। कारण क्षेत्र की हर नदी और बड़े नालों में...

Bhaskar News Network | Last Modified - Feb 01, 2018, 02:30 PM IST

रेत कारोबारी, खनन माफिया इन दिनों क्षेत्र में इनकी ही चर्चा हो रही है। कारण क्षेत्र की हर नदी और बड़े नालों में धड़ल्ले से रेत खनन करने से रोकने-टोकने वाला जो काेई नहीं है। यह सच है। क्षेत्र के किसी नागरिक को भी निर्माण कार्य में रेत की जरूरत है तो वह खुलेआम रेत निकाल सकता है। फिलहाल उन्हें रोकने वाला कोई नहीं आएगा।

उज्जैन जिले के खनिज कलेक्टर महेंद्र पटेल ने भास्कर से चर्चा में स्पष्ट किया है कि प्रदेश सरकार द्वारा तय की गई नई रेत नीति में खनिज विभाग से अवैध खनन के खिलाफ कार्रवाई के अधिकार वापस लेकर जिला पंचायत को सौंप दिए गए हैं। जिपं के माध्यम से पंचायत, नगरीय निकाय को अवैध खनन के खिलाफ कार्रवाई के अधिकार हैं, लेकिन विडंबना है कि नई रेत नीति लागू होने के बाद क्षेत्र की किसी पंचायत में आदेश ही नहीं पहुंचा है, ऐसे में सरपंच, सचिव को भी यह मालूम नहीं है कि पंचायत क्षेत्र में हो रहे खनन पर रोक लगाने अथवा रायल्टी वसूलने का अधिकार शासन ने उन्हें सौंप दिया है।

तो बच नहीं पाएंगे सरपंच, सचिव

नई रेत नीति में भले ही अवैध रेत खनन के खिलाफ कार्रवाई के अधिकार पंचायत को सौंप दिए गए, लेकिन अगर बगैर रायल्टी के रेत का परिवहन और भंडारण होना पाया जाता है तो खनिज विभाग संबंधित पर कार्रवाई कर सकता है। यह भी तय है कि अगर बगैर रायल्टी चुकाए कोई रेत का अवैध परिवहन या भंडारण करता है तो उसके खिलाफ खनिज विभाग को कार्रवाई का अधिकार है। ऐसी स्थिति में कार्रवाई के दायरे में संबंधित पंचायत के जिम्मेदार भी होंगे।

सस्ती की बजाए महंगी हुई रेत

नई नीति लागू करने के पीछे सरकार की मंशा सस्ती दरों पर रेत उपलब्ध कराना है। लेकिन शहर में अभी भी आधी ट्राॅली रेत की कीमत 2500 रुपए है, जबकि इतनी रेत के लिए मात्र 75 रु. ही रायल्टी तय है। वहीं डंपर के लिए 250 रु. ही रायल्टी देना है, किंतु प्रति डंपर 9 से 10 हजार रु. रेत बिक रही है।

कौन रोके, जवाबदेही ही तय नहीं

नई रेत नीति का फायदा रेत माफिया उठा रहे हैं। सरपंच, सचिवों को मुनाफे में हिस्सेदारी का प्रलोभन तक दे रहे हैं। बुधवार के अंक में भास्कर ने चंबल किनारे बसे नायन ग्राम में खुलेआम मशीन से हो रहे रेत खनन की तस्वीरें प्रकाशित की थीं। सरपंच रामनाथ नरूका का कहना था कि नायन में चंबल से लगातार रेत खनन की शिकायत वे खनिज विभाग को कर चुके हैं। बावजूद खनन पर रोक नहीं लगी। खनन करने वाले लोग संगठित है। इसलिए ग्रामीण भी चुप्पी साधे हैं।

पंचायत कर रही खुद का नुकसान

गौरतलब है कि शासन ने जो नई रेत नीति लागू की है वह गांव के विकास के लिए लाभदायक है। कम से कम उन पंचायतों को इस ओर ध्यान देना चाहिए जिनके पंचायत क्षेत्र में रेत की खदान है। क्योंकि रेत के एवज में रायल्टी वसूलने का अधिकार ग्राम सचिव को है। 50 प्रतिशत रायल्टी राशि का उपयोग गांव के विकास में हाेगा। ऐसे में सरपंच और सचिव की जिम्मेदारी है कि अगर वह अपने क्षेत्र का विकास चाहते हैं तो खनन माफियाओं से रायल्टी वसूली में उन्हें जवाबदेही निभाना होगी।

चिह्नित जगह ही खनन किया जा सकता है, नदी में पानी है तो खनन करना अपराध

सवाल :
ग्रामीण क्षेत्र में अवैध रेत खनन हो रहा है, शिकायत के बाद भी रोकने वाला कोई नहीं?

जवाब : नई रेत नीति में खनिज विभाग को अवैध रेत खनन को रोकने का अधिकार नहीं है।

सवाल : तो क्या रेत माफिया को खुली छूट मिल गई है?

जवाब : जी नहीं..ग्रामीण विकास विभाग यानी कि जिला पंचायत को खनन पर रोक लगाने का अधिकार दिया है। पंचायत व निकाय स्तर से कार्रवाई होगी। जरूरत पड़ने पर खनिज विभाग मदद करेगा।

सवाल : क्या पंचायत या निकाय किसी रेत खदान को ठेके पर दे सकेगी?

जवाब : नहीं। जो खदानें पहले से आवंटित हैं, वह यथास्थिति में रहेंगे। नया ठेका पूर्णत: प्रतिबंधित है।

सवाल : क्या नदी में जब पानी हो तो तब रेत खनन किया जा सकता है?

जवाब : चिह्नित स्थानों पर ही खनन किया जा सकता है। अगर नदी में पानी है तो रेत खनन करना अपराध है।

खनिज कलेक्टर महेंद्र पटेल

यह भी जानें

उज्जैन जिले में कुल 40 रेत की खदानें हैं। इनमें नागदा-खाचरौद-उन्हेल ब्लॉक में कुल 16 रेत की खदानें हैं। मेर मुंडला, आलोट जागीर, सेकड़ी सुल्तानपुर, उन्हेल, झिरन्या, इटावा, पाड़सूतिया, हापाखेड़ा प्रमुख खदानें हैं।

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