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चंबल में जमा 155 एमसीएफटी पानी का आज से पीएचई रखेगा हिसाब

ग्रेसिम सहित नागदा-खाचरौद ले रहे कितना पानी, तैयार होगा डेटा भास्कर संवाददाता | नागदा पेयजल की उपलब्धता...

Bhaskar News Network | Last Modified - May 01, 2018, 03:20 AM IST

ग्रेसिम सहित नागदा-खाचरौद ले रहे कितना पानी, तैयार होगा डेटा

भास्कर संवाददाता | नागदा

पेयजल की उपलब्धता सुनिश्चित करने के लिए जिला प्रशासन के आदेश पर पीएचई मंगलवार से चंबल के डैमों में सुरक्षित पानी की मॉनिटरिंग शुरू कर देगा। हर तीसरे दिन पानी का डेटा जमा किया जाएगा। 30 अप्रैल को डैम सहित जलवाल और टकरावदा तालाब में 155 एमसीएफटी सुरक्षित था। ग्रेसिम में उत्पादन प्रक्रिया को सुचारु रखने सहित नागदा-खाचरौद व रेलवे को पेयजल आपूर्ति पर प्रतिदिन ढाई एमसीएफटी पानी खर्च हा़े रहा है। 15 जून तक मानसून आने में 46 दिन बाकी है। इस मान से 115 एमसीएफटी पानी की जरूरत है। 40 एमसीएफटी पानी सरप्लस जरूर है लेकिन डैम से पानी चोरी भी हो रहा है। जिससे पेयजल संकट की स्थिति बन सकती है।

गत वर्ष कोटिंग कर बचाया था 32 एमसीएफटी पानी

बीते वर्ष अप्रैल में ग्रेसिम ने व्यक्तिगत खर्च पर पानी बचाने के लिए डैम और तालाब में जमा पानी पर केमिकल कोटिंग कराई थी। ताकि तेज गर्मी में पानी का वाष्पीकरण कम हो। वाटर रिडारडेंट प्रक्रिया से लगभग 32 एमसीएफटी पानी की बचत कर नागदा-खाचरौद और रेलवे को जलप्रदाय के लिए 64 दिन का पानी बचाया था।

बनबना तालाब सूखने से गहराई चिंता

गौरतलब है कि बनबना तालाब अप्रैल के पहले सप्ताह में ही सूख चुका है। इससे शहर की एक दर्जन कॉलोनियों का जलस्तर मेंटेन रहता था। नलों से ज्यादा इन कॉलोनियों में बोरिंग से ही पानी की आपूर्ति की जा सकती थी। लेकिन तालाब सूखने से 80 प्रतिशत बोरिंग बंद हो गए हैं। जो चल रहे हैं वो बमुश्किल 10 मिनट पानी दे रहे हैं। चिंता इसलिए है क्योंकि पेयजल आवर्धन योजना में संपूर्ण शहर में पाइप लाइन डल चुकी है। इसके बाद नपा ने सरकारी बोरिंग बंद करना शुरू कर दिया है। इससे पेयजल की आपूर्ति का सारा दबाव नलों से सप्लाई पर है। इससे पानी की खपत बढ़ सकी है। फिलहाल नागदा नपा 70 लाख लीटर पानी रोज चंबल से ले रही है।

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