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लड़ाई / बुरहानपुर में बिना अनुमति करा दी पाड़ों की टक्कर, 50 पाड़े भिड़े, 7 लोग घायल



इस प्रकार एक दूसरे से भिड़े। इस प्रकार एक दूसरे से भिड़े।
7 live wounded in battle of buffaloes
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इस प्रकार एक दूसरे से भिड़े।इस प्रकार एक दूसरे से भिड़े।
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  • शाहपुर की अमरावती नदी 27 दिन बाद लगा पड़वा पर लगने वाला मेला
  • बुरहानपुर सहित आसपास के गांवों से पहुंचे पांच हजार से ज्यादा लोग
  • घायलों को एंबुलेंस से शाहपुर अस्पताल भेजा
  • यहां तैनात जवान भी खुद को बचाने के लिए भागे

Dainik Bhaskar

Dec 06, 2018, 12:43 PM IST

बुरहानपुर. शाहपुर की अमरावती नदी में पड़वा पर परंपरानुसार होने वाली पाड़ों की टक्कर चुनावी आचार संहिता के कारण पड़वा से 27 दिन बाद अमरावती की सूखी नदी में बुधवार को कराई गई। साथ ही मेला भी लगाया गया। बिना अनुमति कराई टक्कर में करीब 50 पाड़े भिड़े। इस दौरान पाड़ों के भीड़ में घुसने सहित मची भगदड़ में करीब सात लोग घायल हो गए। टक्कर देखने के लिए बुरहानपुर सहित आसपास के गांवों से करीब पांच हजार से अधिक लोग पहुंचे।

 

अमरावती नदी में पाड़ों की टक्कर देखने के लिए सुबह से ही कई गांवों के लोग बुरहानपुर पहुंच गए। दोपहर में नदी किनारे जिसे जहां जगह मिली, वह टक्कर देखने के लिए आ बैठा। आसपास के गांवों से पशुपालक भी अपने-अपने पाड़ों को आकर्षक रूप से सजाकर टक्कर में लाए। मैदान में उतरे पाड़ों के नाम भी लोगों के आकर्षण का केंद्र रहे।

लड़ाई देखने पहुंचे हजारों लोग।

किसी का नाम काल भैरव था तो किसी का महाकाल। कोई बजरंगी भाईजान था तो कोई बजरंग शक्ति और सीताराम। कुछ पशुपालक पाड़ों पर अपने गांव और वार्ड का नाम लिखकर टक्कर में पहुंचे। इनमें नरसिंह, सेलगांव, वार्ड नंबर पांच सहित अन्य नाम लिखे पाड़े शामिल थे। टक्कर में चुनावी माहौल का असर भी देखने को मिला। एक पाड़े पर लिखा था-शेरा आया।

पाड़े ही नहीं भीड़ भी होती रही बेकाबू, पुलिस ने भांजी लाठियां :  टक्कर के दौरान कई बार पाड़े बेकाबू होकर भीड़ में जा घुसे। इससे भगदड़ मच गई। कई बार उत्साही भीड़ टक्कर के मैदान में घुस गई। ऐसे में उन्हें संभालने के लिए पुलिस को खासी मशक्कत करना पड़ी। जवानों ने भीड़ को संभालने के लिए कई बार लाठियां भांजी। बेकाबू होकर भाग रहे पाड़ों ने दो युवकों को उठाकर पटक दिया। गंभीर चोट आने के कारण उन्हें एंबुलेंस 108 से शाहपुर के अस्पताल पहुंचाया गया। पाड़ों के भीड़ में घुसने और भगदड़ मचने के कारण करीब पांच अन्य लोग भी घायल हुए।

 

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मैदान में जिसे जहां जगह मिली वह वहीं पर डट गया : टक्कर देखने के लिए पहुंचे हजारों लोगों ने पाड़ों की जोर आजमाईश देखने के लिए खासी मशक्कत की, जिसे मैदान के पास जगह मिल गई, वह तो ठीक से टक्कर देख पाया लेकिन बाकी लोगों ने नदी के ऊपरी किनारे पर खड़े होकर टक्कर देखी। जिसे नदी के आसपास जगह नहीं मिली, वह आसपास के पेड़, बिल्डिंग और इनकी छत पर जा पहुंचा। यहां से लोगों ने टक्कर देखी। बेकाबू पाड़ों के भीड़ में घुसने के दौरान सुरक्षा के लिए तैनात पुलिस जवान भी खुद हो बचाने के लिए भागते नजर आए।

पार्षद विनोद चाैधरी का पाड़ा रहा सबसे दमदार : टक्कर में शाहपुर नगर परिषद के पार्षद विनोद चौधरी का पाड़ा महाकाल 50 पाड़ों में सबसे दमदार रहा। उसने प्रतिद्वंदी पाड़े को मैदान छोड़कर भागने पर मजबूर कर दिया। टक्कर देखने के साथ ही यहां आए लोगों ने मेले का भी लुत्फ उठाया। नदी किनारे लगे मेले में झूलों सहित अन्य कई तरह दुकानें भी लगीं। आसपास के गांवों से लोग परिवार सहित मेले में पहुंचे। बच्चों और युवाओं ने झूलों का आनंद लिया। शाम करीब 5 बजे तक चली टक्कर में मेला समिति द्वारा बेहतर प्रदर्शन करने वाले पाड़ों के मालिकाें को पुरस्कृत किया गया।


अफसर बोले- मेले की थी अनुमति, टक्कर की नहीं : मामले में एसडीएम प्रगति वर्मा ने कहा- मेला समिति को सिर्फ मेला लगाने की अनुमति दी गई थी। पाड़ों की टक्कर कराने की नहीं। उधर, मेला समिति अध्यक्ष लक्ष्मण महाजन ने भी इस बात को स्वीकार किया। उन्होंने कहा- समिति को मेला लगाने की अनुमति मिली थी। इसमें परंपरानुसार पाड़ा मालिक अपने पाड़ों के दमखम का प्रदर्शन करने पहुंचे। कई वर्षों से चली आ रही इसी परंपरा के तहत पशुपालक पाड़ों को पालते हैं। बेहतर खानपान के साथ उनकी अच्छी तरह देखभाल करते हैं। यह भी तो पशु प्रेम ही है।
 

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