--Advertisement--

यहां महिला-पुरुषों के लिए अलग-अलग जलती है होली

चार हजार की आबादी वाले कालमुखी में वर्षों से चली आ रही परंपरा भास्कर संवाददाता | कालमुखी हर छोटे-बड़े गांव में...

Danik Bhaskar | Mar 02, 2018, 03:40 AM IST
चार हजार की आबादी वाले कालमुखी में वर्षों से चली आ रही परंपरा

भास्कर संवाददाता | कालमुखी

हर छोटे-बड़े गांव में पुरुषों और महिलाओं के लिए संयुक्त रूप से होलिका का पूजन व दहन होता है, लेकिन 4 हजार की आबादी वाले कालमुखी में महिला एवं पुरुषों के लिए अलग-अलग स्थानों पर होलिका दहन किया जाता है। यह परंपरा वर्षों से चली आ रही है।

प्राचीन राम मंदिर की तलहटी में कावेरी नदी के किनारे स्थित हनुमान मंदिर के दाएं महिलाओं एवं बाएं पुरुषों के लिए होलिका पूजन एवं दहन का कार्यक्रम किया जाता है। ऐसा क्यों होता है इस बारे में पूछने पर भी गांव के बुजुर्ग सटीक जानकारी नहीं दे पाते हैं। गांव में होलिका दहन ग्राम के पटेल परिवार द्वारा धुलेंडी के दिन तड़के किया जाता है और दहन के पूर्व कोटवार द्वारा तड़के 4 बजे होलिका दहन में शामिल होने की मुनादी ग्रामीणों के लिए की जाती है।

नहीं है पाबंदी

महिलाओं-पुरुषों के लिए भले ही होलिका पूजन व दहन कार्यक्रम अलग-अलग किए जाते हैं, लेकिन एक-दूसरे के कार्यक्रमों में जाने पर पाबंदी नहीं है। बुजुर्ग बताते हैं परंपरा और मान-मर्यादा के चलते महिलाएं व पुरुष एक-दूसरे के कार्यक्रमों में नहीं जाते हैं।

परंपरा के रंग

बुजुर्गों के पास भी सटीक जवाब नहीं

90 वर्षीय गंगाराम गुर्जर ने भी ज्यादा जानकारी होने से इनकार करते हुए कहा पूर्वजों के जमाने से परंपरा चली आ रही है। एक अन्य ग्रामीण रामेश्वर केलकर ने बताया कि शायद पूर्व में महिलाओं वाले स्थान पर ही पूरे गांव का संयुक्त होलिका दहन कार्यक्रम होता था, लेकिन कालमुखी के नजदीक जंगल होने एवं लकड़ियां आसानी से उपलब्ध होने के चलते होलिका पर लकड़ियों का ढेर ऊंचा हो जाता होगा व उसमें किसी दुर्घटना के कारण होलिका दहन को दो भागों में बांटा गया हो।