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महेश चौहान, कसरावद |

भंडारा: जूठन ही नसीब होता है कुत्तों को, इससे दु:खी ‘सरकार’ 11 गांव में घूमे, जहां भी कुत्ते दिखे दावत दी, पत्तल में...

Danik Bhaskar

Mar 01, 2018, 03:40 AM IST
भंडारा: जूठन ही नसीब होता है कुत्तों को, इससे दु:खी ‘सरकार’ 11 गांव में घूमे, जहां भी कुत्ते दिखे दावत दी, पत्तल में परोसी खीर-पूड़ी और बूंदी


महेश चौहान, कसरावद | अब तक आपने भंडारों में लोगों को भोजन करते देखा होगा। लेकिन यहां एक संत ने कुत्तों के लिए भंडारे का आयोजन किया। भक्तों का दावा है कि एक-दो नहीं करीब 1300 कुत्तों को बकायदा पत्तल पर भोजन परोसकर खिलाया गया। पत्तल पर खीर, पूड़ी व बूंदी पराेसी गई। एक पखवाड़े पहले भी कुत्तों को जलेबी व पूड़ी का भंडारा दिया गया था। गुजरात से नर्मदा परिक्रमा कर रहेे अवधूत 1008 संतश्री टाटंबरी सरकार ने बुधवार को 11 गांवों में पहुंचकर कुत्तों को भंडारा दिया। संत ने सुबह 10 बजे नावड़ातौड़ी से भंडारे की शुरुआत की। सायता, बोथू, डोंगरगांव, भीलगांव, साटकुर, बड़गांव, ओटा, कठोरा, माकड़खेड़ा, शांतिनगर, दोगावां में दावत दी।

सम्मान से भोजन का अधिकार कुत्ते को

सरकार का मानना है कि कुत्ता भी जीव है और उसे भी सम्मान से भोजन का अधिकार है। अकसर उसे जूठन ही मिलता है। उसके लिए भी मानव के मन में आदर का भाव होना चाहिए। श्रद्धालुओं ने भंडारे में सहयोग किया।

50 साल से खुद छोड़ चुके हैं अन्न

श्रद्धालु करणसिंह पटेल ने बताया रोज श्रद्धालु आश्रम पहुंच रहे हैं। यहां जप-तप के साथ हवन किया जा रहा है। संत टाट पहनते हैं। टाट पर ही बैठते व सोते हैं। पिछले 50 सालों से उन्होंने अन्न का त्याग कर दिया है।

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