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प्रायोगिक परीक्षा में विद्यार्थियों से लिए रुपए, जांच के बाद कार्रवाई नहीं हुई

हाईस्कूल व हायर सेकंडरी बोर्ड परीक्षाएं हो चुकी हैं। इन परीक्षा में हाईस्कूल व हायर सेकंडरी के करीब 1200...

Dainik Bhaskar

Apr 01, 2018, 02:45 AM IST
हाईस्कूल व हायर सेकंडरी बोर्ड परीक्षाएं हो चुकी हैं। इन परीक्षा में हाईस्कूल व हायर सेकंडरी के करीब 1200 विद्यार्थियों ने भाग लिया। इस दौरान प्रायोगिक परीक्षा में शुल्क की अवैध वसूली का मामला सामने आया है। अवैध वसूली की शिकायत सीधे स्कूल शिक्षा मंत्री विजय शाह से की गई। उनके निर्देश पर डीईओ ने जांच भी कराई। जांच प्रतिवेदन भी मिल चुका है लेकिन कार्रवाई अधर में लटकी है।

यह है मामला : मिली जानकारी के अनुसार 20 दिन पहले उत्कृष्ट स्कूल में भूगोल विषय की प्रेक्टिकल परीक्षा में 100 से 200 रुपए प्रति विद्यार्थी शुल्क अवैध रूप से वसूला गया। इसकी शिकायत सीधे स्कूल शिक्षा मंत्री विजय शाह उके िनज सहायक से की गई। जिला शिक्षा अधिकारी पीएस सोलंकी को कार्रवाई के निर्देश मिले। डीईओ सोलंकी ने दो सदस्यीय जांच दल गठित किया। सूत्रों के अनुसार नेहरू स्कूल खंडवा और पंधाना प्राचार्य के इस जांच दल ने विद्यार्थियों और संबंधित शिक्षक के कथन दर्ज कर प्रतिवेदन डीईओ को सौंप िदया। सूत्र यह भी बताते हैं कि शिक्षक द्वारा वसूला गया अवैध शुल्क शिकायत के बाद विद्यार्थियों को लौटा दिया गया।

कार्रवाई तो होगी


शिकायत से व्यवस्था पर उठे सवाल

नियमित और स्वाध्यायी परीक्षार्थियों से प्रायोगिक फीस, सालाना शुल्क के साथ जमा कर लिया जाता है। इसके बावजूद वार्षिक परीक्षा में अवैध रूप से शुल्क वसूले जाने से समूची व्यवस्था पर सवाल खड़े हो रहे हैं। उत्कृष्ट विद्यालय के प्रकरण से कहानी यह सामने आई कि शासकीय और निजी स्कूलों ने वार्षिक परीक्षा के समान प्रायोगिक परीक्षा में शुल्क के नाम पर 50 से 100 रुपए प्रतिव विद्यार्थी वसूले जाते हैं। ऑफ द रिकार्ड यह शुल्क परीक्षा लेने आए प्रेक्षक की खातिरदारी (नाश्ता-भोजन) के नाम िलया जाता है। हालांकि वह खर्च केंद्राध्यक्ष या संबंधित स्कूल के प्राचार्य भी वहन कर सकते हैं। िकंतु मामूली खर्च की आड़ मे बड़ी रकम की वसूली सीधे शिक्षक की जेब में जाती है।

2000 से ज्यादा परीक्षार्थी बैठे

हाईस्कूल में 1539 व हायर सेकंडरी में 686 विद्यार्थियों ने इस साल परीक्षा दी। इनमें नियमित व स्वाध्यायी शामिल हैं। औसत 50 से 100 रुपए की अवैध वसूली से यह राशि एक से दो लाख रुपए हो जाती है। हालांकि कुछ सरकारी विद्यालयों में यह परंपरा इस बार आगे नहीं बढ़ पाई।

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