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बैक्टीरिया वाला पानी पिला रहा रेलवे, पीएचई की रिपोर्ट में हुई पुष्टि

प्रशांत शर्मा | खंडवा रेलवे स्टेशन के प्लेटफार्म व कॉलोनियों में बंटने वाले पानी में बैक्टीरिया है। यात्री व...

Bhaskar News Network | Last Modified - Mar 01, 2018, 03:45 AM IST

बैक्टीरिया वाला पानी पिला रहा रेलवे, पीएचई की रिपोर्ट में हुई पुष्टि
प्रशांत शर्मा | खंडवा

रेलवे स्टेशन के प्लेटफार्म व कॉलोनियों में बंटने वाले पानी में बैक्टीरिया है। यात्री व रेलवे अधिकारी-कर्मचारी यही पानी पी रहे हैं। रेलवे के खुले कुएं से कॉलोनियों में भेजे जा रहे पानी में बैक्टीरिया की पुष्टि पीएचई की रिपोर्ट में हुई है। डॉक्टरों के मुताबिक बैक्टीरिया वाले पानी से उल्टी-दस्त के साथ पेट संबंधी कई रोग हो सकते हैं।

स्टेशन पर चल रहे पानी के खेल को उजागर करने के लिए भास्कर टीम ने जूनियर इंजीनियर कार्य नीरज सोनी के कैबिन के पास के नल से सैंपल लेकर पीएचई में जांच कराई। गाइडलाइन के अनुसार पीने के पानी में बैक्टीरिया शून्य होना चाहिए। जांच रिपोर्ट में प्रति 100 मिली में 34 मिलिग्राम हानिकारक बैक्टीरिया है।

रेलवे ने आबना नदी पर बड़ा कब्रिस्तान के पास बांध बनाया है। यहां बारिश व कालोनियों से रिसकर आया पानी जमा है। कब्रिस्तान में बने रेलवे के पंप हाउस से पानी घासपुरा ट्रीटमेंट प्लांट जाता है। यहां एलम और केमिकल से ट्रीटमेंट के बाद नदी के साथ प्लांट के बोरिंग का पानी मिक्स कर प्लेटफार्म नंबर-6 के पास सूरजकुंड कॉलोनी में बने कुएं में जाता है। कुएं से पानी की सप्लाई प्लेटफार्म के साथ रेलवे की सूरजकुंड, राजधानी, चिड़िया मैदान के साथ वेस्टर्न कॉलोनी में होती है। कॉलोनी में 600 परिवार यह पानी पीते है।

स्टेशन और कॉलोनियों में बंटने वाले पानी की रेलवे नहीं कराता जांच, रेलवे वाटर ट्रीटमेंट प्लांट में जमी काई, कुआं भी खुला पड़ा

काला हुआ आबना नदी का पानी, 15 साल से रेलवे ने नहीं की सफाई

भीमकुंड से लेकर बड़ा कब्रिस्तान बांध तक रूके पानी का रंग काला व हरा हो गया है। रेलवे कर्मचारियों ने बताया 15 सालों से नदी की सफाई नहीं हुई। 15 साल पहले रेलवे बांध से लेकर भीमकुंड तक नदी की सफाई नियमित रूप से करवाता था।

सिक्के से नहीं मिल रहा वेडिंग मशीन से पानी

स्टेशन यात्रियों को मिनरल वॉटर उपलब्ध कराने के लिए तीन वेडिंग मशीन लगाई गई है। स्टेशन की देखरेख करने वाले जूनियर इंजीनियर कार्य नीरज सोनी के केबिन के पास लगे वेडिंग मशीन से सिक्के से पानी नहीं मिल रहा है। ठेकेदार ने तीनों ही ऑटोमेटिक मशीन के सिक्के वाले सिस्टम को खराब कर दिया है। मशीन एक और पांच के सिक्के के बदले पानी नहीं दे रही है। केबिन में बैठा ठेकेदार का कर्मचारी मैन्युअल काम कर रहा है।

स्टेशन और कॉलोनियों में बंटने वाले पानी का टेस्ट कराया जाता है। पानी की जांच रिपोर्ट हमारे पास आती है। पानी में बैैक्टीरिया है तो उसका क्लोरिनेशन कराएंगे। -एसबी सिंघल, सीनियर सेक्शन इंजीनियर

रेलवे की भुसावल लैब में 6 महीने में बैैक्टीरिया टेस्ट कराया जाता है। स्थानीय लैब पर फिजिकल एवं केमिकल टेस्ट कराते हैं। बैैक्टीरिया की जांच भुसावल में कराएंगे। -प्रगति गुप्ता, हेल्थ इंस्पेक्टर

बैक्टीरिया वाले पानी से पेचिस, पीलिया, डायरिया सहित अनेक प्रकार की जलजनित बीमारियां होती हंै। पानी अच्छी तरह क्लोरिनेशन के बाद पीने के लिए प्रयोग करना चाहिए। -डॉ.संजय श्रीवास्तव, एमडी मेडिसिन

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