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दादाजी मंिदर : नहीं होता ग्रहण का असर, खुले रहेे पट, हवन पूजन भी हुआ

Bhaskar News Network | Last Modified - Feb 01, 2018, 02:30 PM IST

फोटो- विकास चौहान, नवनीत यादव शहर में ऐसे दिखी ऐतिहासिक व रोचक खगोलीय घटना : ब्लड मून से सुपर मून तक कैमरे में कैद...
फोटो- विकास चौहान, नवनीत यादव

शहर में ऐसे दिखी ऐतिहासिक व रोचक खगोलीय घटना : ब्लड मून से सुपर मून तक कैमरे में कैद

ब्लड मून 07:57 बजे

खंडवा | श्रीदादाजी मंदिर में बुधवार को चंद्रग्रहण के दौरान भी हवन पूजन चलता रहा। मंदिर के शिखर पर चंद्र ग्रहण चल रहा था। नीचे हवन पूजन हो रहा था। मंदिर पूरे समय खुला रहा। लोगों ने सामान्य दिनों की तरह दर्शन किए। धूनिमाई में आहुति भी दी। ट्रस्टी सुभाष नागोरी ने बताया पुस्तक केशव विनय के अनुसार दादाजी महाराज दत्तात्रय, दुर्गा, शंकर, मोहम्मद और यीशु का अवतार माने जाते हैं। सभी देवी-देवता का रूप है। ऐसी अवस्था में सूर्य, चंद्र, नव ग्रह सारे परमात्मा से अलग माने जाते हैं। अखंड धूनी अग्नि स्वरूप है। दादाजी के समय से ग्रहण के दौरान अखंड हवन और भोग भंडार चल रहा है।

स्वामी विवेकानंद पुरी ने बताया मंदिर में कभी पट खुलते और बंद नहीं होते। ग्रहण साधना काल है। इस दौरान मूर्ति का स्पर्श क निषेध है लेकिन भजन, तप, हवन करना चाहिए। आश्रम में धूनि और अग्नि को प्रधानता है। धूनि बंद नहीं कर सकते इसीलिए परंपरा चल रही है।

चंद्र ग्रहण 08:28 बजे

सूतक काल में भी ओंकारेश्वर में चलता रहा दर्शन-पूजन, मध्याह्न काल पुजारी ने कहा- निमित्त मात्र पूजन हुआ, स्पर्श नहीं किया

ओंकारेश्वर मंदिर में पट खुले रहे, हालांकि भक्त कम ही आए।

ओंकारेश्वर | बुधवार को चंद्र ग्रहण के कारण सुबह 8.21 बजे से सूतक काल लगते ही देश भर के मंदिरों सहित घरों में पूजा-अर्चना नहीं की गई। वहीं ओंकारेश्वर मंदिर में सूतक काल के दौरान भी श्रद्धालुओं जल, फूल और बिल्व पत्र अर्पित किए गए। मंदिर संस्थान की ओर से मध्याह्न आरती कर भोग लगाया गया। इसे कुछ विद्वानों ने गलत बताया। भीलवाड़ा के ज्योतिषाचार्य पंडित देवेंद्र शास्त्री ने कहा शास्त्रों के अनुसार सूतक काल प्रारंभ होते ही मूर्ति स्पर्श, पूजन और भाेग अर्पण नहीं करना चाहिए। विश्व प्रसिद्ध ज्योतिर्लिंग मंदिर में अन्य स्थानों से विपरीत व्यवस्था रही यह आश्चर्य का विषय है। ओंकारेश्वर मंदिर के मध्याह्न काल पुजारी जितेंद्र शास्त्री ने कहा हमने मध्याह्न भोग आरती के दौरान ज्योतिर्लिंग का दूर से ही निमित्त मात्र पूजन किया। यहां की प्राचीन परंपराओं के अनुसार ही पूजन किया गया। उन्होंने कहा मंदिर संस्थान के अधिकारी अपनी मनमर्जी से यहां नियम बनाते हैं।

ग्रहण से निकलता 08:32 बजे

सुपर मून 08:35 बजे

ओंकारेश्वर | बुधवार को चंद्र ग्रहण के कारण सुबह 8.21 बजे से सूतक काल लगते ही देश भर के मंदिरों सहित घरों में पूजा-अर्चना नहीं की गई। वहीं ओंकारेश्वर मंदिर में सूतक काल के दौरान भी श्रद्धालुओं जल, फूल और बिल्व पत्र अर्पित किए गए। मंदिर संस्थान की ओर से मध्याह्न आरती कर भोग लगाया गया। इसे कुछ विद्वानों ने गलत बताया। भीलवाड़ा के ज्योतिषाचार्य पंडित देवेंद्र शास्त्री ने कहा शास्त्रों के अनुसार सूतक काल प्रारंभ होते ही मूर्ति स्पर्श, पूजन और भाेग अर्पण नहीं करना चाहिए। विश्व प्रसिद्ध ज्योतिर्लिंग मंदिर में अन्य स्थानों से विपरीत व्यवस्था रही यह आश्चर्य का विषय है। ओंकारेश्वर मंदिर के मध्याह्न काल पुजारी जितेंद्र शास्त्री ने कहा हमने मध्याह्न भोग आरती के दौरान ज्योतिर्लिंग का दूर से ही निमित्त मात्र पूजन किया। यहां की प्राचीन परंपराओं के अनुसार ही पूजन किया गया। उन्होंने कहा मंदिर संस्थान के अधिकारी अपनी मनमर्जी से यहां नियम बनाते हैं।

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Web Title: दादाजी मंिदर : नहीं होता ग्रहण का असर, खुले रहेे पट, हवन पूजन भी हुआ
(News in Hindi from Dainik Bhaskar)

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