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नए कलेक्टोरेट भवन की जिस पार्किंग के प्रस्ताव को नपा परिषद ने निरस्त किया उसी जगह प्रशासन ने करा दी खुदाई

Khargon News - जिला मुख्यालय स्थित श्रीनवग्रह मंदिर तिराहा पर 13 करोड़ 71 लाख रुपए से नए कलेक्टोरेट भवन के लिए नवग्रह मेले की जमीन को...

Dainik Bhaskar

Apr 02, 2018, 03:45 AM IST
नए कलेक्टोरेट भवन की जिस पार्किंग के प्रस्ताव को नपा परिषद ने निरस्त किया उसी जगह प्रशासन ने करा दी खुदाई
जिला मुख्यालय स्थित श्रीनवग्रह मंदिर तिराहा पर 13 करोड़ 71 लाख रुपए से नए कलेक्टोरेट भवन के लिए नवग्रह मेले की जमीन को प्रशासन ने कब्जे में लेकर बाउंड्रीवाल का काम शुरू करा दिया।

नगरपालिका परिषद में मेले की जमीन पर पार्किंग का प्रस्ताव कैंसिल कर दिया। इसके बावजूद मेले की 400 वर्गफीट जमीन पर पार्किंग प्रस्तावित है। मेला मैदान का आधा हिस्सा दायरे में आ रहा है। इससे 126 साल पुराने ऐतिहासिक व सांस्कृतिक मेले के अगले साल उसी स्थान पर लगाने में संशय की स्थिति बन रही है। 33 एकड़ मेला क्षेत्र है। इसमें मेले हरसाल 400 से ज्यादा व्यवसायिक दुकानों के अलावा अंतरराज्यीय मवेशी बाजार भी लगता है। नवग्रह मंदिर देशभर में प्रसिद्ध है। समापन पर भगवान की पालकी निकलती है। यहां जगह पहले ही कम पड़ रही है। दो दिन से बाउंड्रीवाल के लिए जेसीबी से गहरे गड्‌ढे खोदे जा रहे हैं। हाट बाजार में दुकानों के सीमेंट के चबूतरों तक की नपती कर ली गई है। मामला जानकारी में आते ही राज्यमंत्री बालकृष्ण पाटीदार ने काम रुकवा दिया। उनका का कहना है मेले की जमीन का दूसरा कोई उपयोग नहीं होना चाहिए। कुंदा किनारे के हिस्से में व्यवस्थाएं की जा सकती हैं। सभी पक्षों से चर्चा की जाएगी।

पढ़िए दबाव में ऊपर से नीचे तक पूरा सिस्टम कैसे करता है काम

1. कमिश्नर ने फटकार लगाकर कलेक्टर पर बनाया दबाव

इंदौर संभागायुक्त संजय दुबे ने 7 माह पहले कलेक्टोरेट भवन निर्माण को देखा था। उन्होंने कलेक्टर अशोक वर्मा से पार्किंग सुविधा पर नाराजगी जाहिर की थी। तब उन्होंने कहा था कि यह कंपोजिट बिल्डिंग है कलेक्टर कार्यालय नहीं। 20-25 गाड़ियों की पार्किंग व्यवस्था को नाकाफी बताते दो टूक कहा था कि हर बाबू व कर्मचारी के पास पांच साल बाद फोर व्हीलर गाड़ी हो जाएगी। ऐसे में वाहनों को सड़क पर खड़ा करेंगे। उन्होंने बेहतर पार्किंग की व्यवस्था के निर्देश दिए थे।

2. कलेक्टर ने नपाध्यक्ष-सीएमओ व परिषद पर दबाव बनाया

कमिश्नर की फटकार बाद कलेक्टर ने सीएमओ व अध्यक्ष पर दबाव बनाया। परिषद में नवग्रह मेले की जमीन को कलेक्टोरेट की पार्किंग के लिए लेने के विषय का प्रस्ताव बनाकर रखा गया। परिषद ने उसे कैंसिल कर दिया गया। इसके बावजूद काम शुरू करा दिया गया। नपाध्यक्ष विपिन गौर ने कहा कलेक्टर पूरे जिले का मालिक होता है। उसे पावर रहते हैं।

मेला मैदान में कलेक्टोरेट की बाउंड्रीवाल का निर्माण शुरू कर दिया है।

3. नपा ने क्षेत्र के लोगों पर दबाव बनाकर हटाया

2004-05 में नपा के 32 कर्मचारियों को मकान निर्माण के लिए जमीन दी थी। इसमें से करीब 12 कर्मचारियों ने संबंधित जमीन पर मिले भू-खंड की रजिस्ट्री करा ली। इसमें से दो कर्मचारियों ने मकान निर्माण की स्वीकृति भी नपा से ली। लेकिन कुछ समय बाद ही नपा द्वारा संबंधित कर्मचारियों द्वारा किए जा रहे निर्माण को नियम विरुद्घ बताकर रुकवा दिया।

4. राज्यमंत्री ने कलेक्टर से बंद कराई जेसीबी

सिस्टम से परेशान लोगों ने राज्यमंत्री बालकृष्ण पाटीदार को शिकायत की। मंत्री पर दबाव बनाया। मेले के अस्तित्व की बात रखी। मंत्री ने कलेक्टर को मेला परिसर में चल रही जेसीबी बंद करने को कहा है। काम रुक तो गया है लेकिन ऐतिहासिक व सांस्कृतिक मेला मैदान की खुदाई व ड्राइंग लापरवाही व मनमानी कह रहे हैं।

नपाध्यक्ष और मंत्री आज लेंगे निर्णय



कलेक्टोरेट भवन व उसमें मिलने वाली सुविधाओं के बारे में वह सब कुछ जो आप जानना चाहते हैं...

भूकंपरोधी भवन में पहली मंजिल पर बैठेंगे कलेक्टर

नया भवन जी प्लस टू भूकंपरोधी होगा। पहली मंजिल पर कलेक्टर ऑफिस होगा। दो लिफ्ट रहेंगी। ईवीएम मशीन, बैलेट बॉक्स गोदाम रहेंगे। लाइब्रेरी, कैंटिन, प्रतीक्षा कक्ष, पार्किंग सुविधा रहेगी। अभी किराए के कमरे में चलने वाले सामाजिक न्याय विभाग, अल्पसंख्यक, ओबीसी विभाग, श्रम विभाग भी नए भवन में लगेंगे। सरकारी स्कूलों या किराए के भवन में ईवीएम या बैलेट बॉक्स नहीं रखना पड़ेंगे। इसमें ईवीएम मशीन, बैलेट बॉक्स के गोदाम रहेंगे। लोगों के लिए लाइब्रेरी, कैंटिन, प्रतीक्षा कक्ष, पार्किंग सुविधा रहेगी।

सुविधा : केंटीन होगी, लाइब्रेरी भी

नए भवन की पहली मंजिल पर कलेक्टर, डिप्टी कलेक्टर, अपर कलेक्टर के लिए विशेष कमरे रहेंगे। जाने के लिए लिफ्ट रहेगी। कोर्ट अलग बनेगी। वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग व बैठक के लिए आधुनिक हॉल बनेगा। जिले के लोगों के लिए भी यहां कई सुविधाएं रहेंगी। कैंटिन में खाने की व्यवस्था रहेगी। लाइब्रेरी में बैठकर किताबें व अखबार पढ़ सकते हैं। इसमें मप्र शासन के नियमों संबंधी किताबें भी रहेंगी।

इतिहास : 58 साल बाद बदलेगा भवन

58 साल बाद नया कलेक्टोरेट भवन मिलने जा रहा है। इतिहास के जानकारों के मुताबिक सबसे पहले कलेक्टर भवन किला परिसर में लगता था। इसके बाद 1959-60 में वर्तमान भवन में स्थापना हुई थी। अब नवग्रह मंदिर तिराहे पर भवन बनाया जा रहा है। इसमें 20 विभाग होंगे। सामाजिक न्याय कार्यालय, अल्पसंख्यक, ओबीसी विभाग, श्रम कार्यालय भी यहां आएंगे। अभी यह किराए के भवनों में चल रहे हैं।

इसलिए बना रहे नया भवन

जिले की जनसंख्या लगातार बढ़ रही है। फिलहाल 20 लाख जनसंख्या है। शहर का लगातार विस्तार हो रहा है। विभागों पर काम का दबाव भी बढ़ता जा रहा है। सरकारी विभाग कम जगह, किराए के भवन में लग रहे हैं। कुछ क्षतिग्रस्त होने से डिस्मेंटल घोषित हो चुके हैं। रिकार्ड संग्रह करना मुश्किल हो रहा है।

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