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चुनावी साल में पानी की कमी : एनएचडीसी ने बढ़ाई नप की मुसीबत

इंदिरा सागर परियोजना के सबसे बड़े पुनर्वास स्थल हरसूद की पेयजल व्यवस्था और स्ट्रीट लाइट प्रबंधन व खर्च से हाथ...

Bhaskar News Network | Last Modified - Mar 01, 2018, 04:00 AM IST

चुनावी साल में पानी की कमी : एनएचडीसी ने बढ़ाई नप की मुसीबत
इंदिरा सागर परियोजना के सबसे बड़े पुनर्वास स्थल हरसूद की पेयजल व्यवस्था और स्ट्रीट लाइट प्रबंधन व खर्च से हाथ खींचने की एनएचडीसी की तैयारी से राजनीतिक हल्कों में हड़कंप है। 1 अप्रैल से एनएचडीसी द्वारा व्यवस्थापन व्यय उठाने से इनकार के पत्राचार के बाद भाजपा समर्थित नगर परिषद की मुसीबत बढ़ गई है। जलाशय में कम बारिश से पानी की कमी और विधानसभा चुनाव के दृष्टिगत एनएचडीसी विपक्ष को बैठे ठाले मुद्दा दे जाएगी।

कम बारिश की वजह से बांध का जलभराव 262.13 मीटर नहीं हो पाया। फरवरी-मार्च में जब जलाशय का स्तर 254 मीटर होता था तब यह आंकड़ा 251 के करीब पहुंच गया है। मार्च-अप्रैल में सूरज की तपिश भी तेजी से जलस्तर घटने का कारण बनेगी। ऐसे में एक दशक में पहली बार पुनर्वास स्थल हरसूद-छनेरा में जलसंकट की स्थिति बनना तय माना जा रहा है। नगर परिषद 15 में से 7 वार्डों में पेयजल व्यवस्था का प्रबंधन करती है। गर्मी के तीन माह वार्ड क्रमांक 8 से 14 में टैंकरों से जल संकट पर काबू पाने का प्रयास होता है। जलाशय में सीमित जलस्तर की स्थित में एनएचडीसी से गत वर्ष (25-30 टैंकर) तुलना में कम ही पानी मिलने की संभावना है।

आर्थिक भार से कहीं ज्यादा मुश्किल होगा पुनर्वास स्थल की व्यवस्थाओं का प्रबंधन, एनएचडीसी की डेडलाइन से राजनीतिक दलों में हड़कंप

सत्ता पक्ष में चिंता, विपक्ष को इंतजार

एनएचडीसी के इस निर्णय से सत्ता पक्ष में चिंता इसलिए है कि सड़क निर्माण, पाइप लाइन संधारण का कार्य प्रारंभ नहीं हुआ। प्रशासनिक अव्यवस्था से विस्थापितों के भूखंड पंजीयन का मामला अटका है। ऐसे में पेयजल संकट और एनएचडीसी द्वारा हस्तांतरण हो जाने की स्थिति में होने वाली अव्यवस्था का असर विस चुनाव पर पड़ना निश्चित है। इधर विपक्ष के दो खेमे जिनमें कांग्रेस और बागी कांग्रेस शामिल हैं, को जलसंकट और 1 अप्रैल का इंतजार है। अव्यवस्था को जनाक्रोश में तब्दील किया जा सके। खालवा में किसान आंदोलन को जो अहमियत मिली वह हरसूद-छनेरा के नेताओं और विपक्ष के संज्ञान में है।

10 साल से छोटी तवा नदी के इंटेकवेल में जम रही गाद

किसी भी वृहद पेयजल योजना के नदी या जलाशय स्थित इंटेकवेल की साफ-सफाई औसत तीन साल में होना चाहिए। किंतु छोटी तवा नदी के इंटेकवेल में 10 साल से गाद जमा हो रही है। एनएचडीसी ने एक बार भी इसकी सफाई नहीं कराई। गाद जमा होने से इंटेकवेल की जल भराव क्षमता भी कम हुई है। यहां 45-45 हा.पा. की मोटरों में से दो खराब पड़ी हैं। एक मोटर मरमम्त में 50 से 80 हजार रुपए खर्च आता है।

एनवीडीए-एनएचडीसी की बैठक 27 मार्च को भोपाल में

इंदिरा सागर और ओंकारेश्वर बांध में गत वर्ष की तुलना में जलभराव काफी कम है। गर्मी में सिंचाई के लिए पानी, बिजली उत्पादन तथा सरदार सरोवर बांध की पूर्ति के लिए पानी छोड़े जाने के मुद्दों पर एनवीडीए और एनएचडीसी की उच्चस्तरीय बैठक 27 मार्च को भोपाल में होगी। इस बैठक में इंदिरा सागर के 3 और ओंकारेश्वर के 15 पुनर्वास स्थलों के प्रबंधन व व्यय का भार 1 अप्रैल से हटाए जाने पर अंतिम मुहर लग जाएगी।

जनसंवाद कर सकते हैं

होली बाद परिषद की बैठक में सर्वानुमति से निर्णय लेंगे। मंत्री को इस निर्णय से अवगत कराया जाएगा।आवश्यकता पड़ने पर जनसंवाद भी किया जाएगा। जल संकट के निदान के लिए कार्ययोजना भी तैयार की जा रही है। पुष्पा पटेल, अध्यक्ष नप छनेरा

एनएचडीसी को भागने नहीं देंगे

रोजगारोन्मुखी विकास के बिना एनएचडीसी को हरसूद से नहीं भागने देंगे। विस्थापितों को मूलभूत सुविधा सदैव मुहैया कराना एनएचडीसी की जिम्मेदारी है। जरूरत पड़ी तो जनआंदोलन भी करेंगे। - सौभाग सांड, बागी कांग्रेस नेता

कांग्रेस मोर्चा संभालेगी

10 साल तक नप में कांग्रेस की परिषद ने हस्तांतरण से साफ इंकार किया है। इतनी बड़ी व्यवस्था एकतरफा नहीं सौंपी जा सकती। एनएचडीसी और नप ने सांठगांठ की तो कांग्रेस मोर्चा संभालेगी। -कृष्ण मोहन सोमानी, कांग्रेस नेता हरसूद

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Web Title: चुनावी साल में पानी की कमी : एनएचडीसी ने बढ़ाई नप की मुसीबत
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