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बायफल में सरपंच ने लगाया भगोरिया हाट

पंधाना-खालवा की तरह पुनासा ब्लाक में भी आदिवासियों का निवास तो है लेकिन भगोरिया हाट की परंपरा नहीं है। क्षेत्र के...

Danik Bhaskar | Mar 01, 2018, 04:00 AM IST
पंधाना-खालवा की तरह पुनासा ब्लाक में भी आदिवासियों का निवास तो है लेकिन भगोरिया हाट की परंपरा नहीं है। क्षेत्र के आदिवासियों को हिंदू संस्कृति से जोड़ने और पर्व का महत्व बनाए रखने के लिए बायफल सरपंच ने पहल की। स्वयं के खर्च पर गांव में आदिवासियों के लिए एक दिनी मेला आयोजित किया। उनके खाने-पीने का इंतजाम कर पारंपरिक वेशभूषा व ढोल-मांदल के साथ आमंत्रित किया। हजारों आदिवासी पहुंचे और उल्लास से पर्व मनाकर मेले का आनंद लिया। गांव में यह चौथा आयोजन था।

बायफल सरपंच मधुबाला महेंद्र यादव ने बताया ब्लाक के आदिवासी कोई बड़ा पर्व नहीं मनाते थे। जिले के अन्य स्थानों पर भगोरिया हाट देख क्षेत्र के आदिवासियों के लिए कुछ करने की इच्छा हुई। आदिवासी समाज के वरिष्ठ लोगों से चर्चा की गई। आसपास के मेलों में जाकर दुकानदारों से भी मुलाकात की। तय हुआ कि हर साल होली दहन से दो दिन पहले बायफल में भगोरिया हाट लगाया जाएगा। 2015 में पहला आयोजन किया। मेले में कपड़े, पान, आईस्क्रीम, मनिहारी आदि दुकानें लगाई गई। चारों साल भगोरिया आयोजन के लिए मधुबाला महेंद्र की ओर टेंट, चाय-पान व स्वल्पाहार की व्यवस्था की गई। प्रत्येक समूह को पुरस्कृत भी किया जाता है।

आदिवासियों को संस्कृति से जोड़ने के लिए लगाते हैं एक दिन का मेला

भगोरिया हाट में ग्रामीण शरबत पीते हुए।

15 से अधिक समूह, एक में 100 युवक-युवतियां

भगोरिया हाट में आसपास के 20 से अधिक गांवों से करीब 15 समूह मेले में भाग लेते हैं। सब अपने ढोलक,मांदल, बांसुरी के साथ आते हैं। एक समूह में 100 से 150 युवक-युवतियां शामिल होते हैं। आयोजन की जिम्मेदारी आदिवासी समाज के वरिष्ठ भीम सिंह डाबर और भारतसिंह चौहान की रहती है। चौथे भगोरिया हाट में एनएचडीसी संचालक नरेंद्रसिंह तोमर, देवेंद्रसिंह दरबार, रेतानसिंह डाबर, जीवनसिंह राठौड़ सहित अन्य जनप्रतिनिधि भी पहुंचे। उन्होंने आदिवासियों को गुलाल लगाकर होली की शुभकामना दी। पुनासा पुलिस चौकी का स्टाफ भी मौजूद रहा।