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पुलिस की बलवा ड्रिल में फेंका आंसू गैस का गोला, पार्क में गिरकर फटा, दो बच्चे घायल

इंदौर पुलिस की डीआरपी लाइन में पिछले दिनों पार्क में खेल रहे बच्चों के बीच पुलिस का अश्रु गैस गोला आ गिरा और फट गया।...

Danik Bhaskar | Mar 02, 2018, 05:10 AM IST
इंदौर पुलिस की डीआरपी लाइन में पिछले दिनों पार्क में खेल रहे बच्चों के बीच पुलिस का अश्रु गैस गोला आ गिरा और फट गया। इसकी चपेट में 5 और 10 साल के भाई बहन आ गए। अश्रु गैस की तीखी जलन के कारण बच्चों की हालत बहुत बिगड़ गई। वे रोते-बिलखते रहे और उन्हें परिजन अस्पताल लेकर दौड़े। दोनों की एमएलसी भी हुई लेकिन गोला पुलिस का था तो कार्रवाई नहीं हुई। बच्चों के पालक भी पुलिस में हैं, उन्होंने आला अधिकारियों को भी शिकायत की लेकिन एक सप्ताह बीतने के बाद भी कोई सुनवाई नहीं हुई। भास्कर ने डॉक्टरों से बात की तो पता चला सवा किलो वजनी गैस का गोला अगर किसी बच्चे के सिर पर गिर जाता तो उसकी जान भी जा सकती थी। अश्रु गैस के प्रभाव से उनकी आंखों की रोशनी भी छिन सकती थी।

साथ में अन्य बच्चे भी खेल रहे थे

घटना 23 फरवरी की सुबह 10 से 11 बजे के बीच की हैै लेकिन इसे कही उजागर नहीं होने दिया गया। भास्कर ने पड़ताल की तो खुलासा हुआ 5 वर्षीय गतिक 10 वर्षीय बड़ी बहन त्रिषा के साथ डीआरपी लाइन्स में बने क्वार्टस के पास गार्डन में खेल रहा था। उनके साथ अन्य बच्चे भी थे। इसी बीच गतिक और त्रिषा के बीच अश्रु गैस का गोला आ गिरा। गोला फटा और गैस त्रिषा के पैर में लगी। दोनों भाई-बहन गैस में घिर गए। दूसरेे बच्चे थोड़ी दूर थे तो वे दौड़कर भागे। घटना देख पास में ही खड़े बच्चों के मामा सौरव दौड़कर पहुंचे। इस दौरान शोर-शराबा मचने पर बच्चों के मां-पिता भी आ गए।

दोनों को छह घंटे रखा आॅर्ब्जवेशन में

बच्चों को एमवाय अस्पताल ले जाया गया। डॉक्टरों ने उनकी एमएलसी भी की और मामला जांच के िलए एमजी रोड पुलिस को सौंपा गया। बच्चों के पालक पुलिस में है, जिन्होंने गैस के प्रभाव को कम करने के लिए बच्चों के चेहरे पर और घाव पर पानी डाल दिया था। डॉक्टरों ने बच्चों को छह घंटे ऑब्जर्वेशन में रखा।

शुक्र है... दोनों भाई-बहन अब ठीक हैं

धमाकों की आवाज से सहम गए थे बच्चे

मामा सौरव ने बताया डीआरपी लाइन के ग्राउंड में पुलिस बलवा ड्रिल कर रही थी, वहीं से लापरवाही से फेंका गया गोला बच्चों के पार्क में आ गिरा। पुलिस ने इतने सारे गोलों का उपयोग किया कि धमाकों की आवाज से बच्चे सहम गए। रोते-रोते बच्चे कह रहे थे िक यहां उन्हें अब नहीं रहना।

कहीं नहीं हो पा रही है परिजनों की सुनवाई

इस प्रकार की लापरवाही की घटना भारतीय दंड विद्यान की धारा 285 के अंतर्गत दण्डनीय अपराध है। यदि उक्त स्मोक सेल बच्चों के समीप न गिरते हुए सीधे उनके ऊपर आकर लगता तो अधिक बड़ा हादसा हो सकता था। रहवासी क्षेत्र में इस प्रकार से घटना घटित होना अत्यंत संवेदनशील है। बच्चों के परिजन ने इसकी शिकायत आला अधिकारियों को की लेकिन जिम्मेदारों पर कोई कार्रवाई नहीं हुई।

कॉर्निया क्षतिग्रस्त हो सकता था बच्चों का

भास्कर ने नेत्र रोग विशेषज्ञ डॉ. संजय गोकुलदास से बात की। उन्होंने बताया अश्रु गैस में इतने घातक कैमिकल होते हैं कि एक व्यस्क व्यक्ति भी जब इसके प्रभाव में आता है तो तेज असहनीय जलन होती है। पुलिस इसे दंगाइयों पर ही इस्तेमाल करती है। 5 साल के मासूम बच्चे की नाजुक कोशिकाओं को ज्यादा गहरा असर पड़ सकता था। इस कैमिकल से कॉर्निया भी डेमेज हो सकता था। गैस में मौजूद कैमिकल आंखों के संपर्क में आते ही अंदर के हिस्स में छाले बना देते हैं, जिसके कारण ही तेज दर्द और आंसू निकलते हैं।

बड़ी बहन त्रिषा के साथ गतिक।

सीधी बात

एएसपी वाहिनी सिंह, डीआरपी लाइन, टीआई एमजी रोड अनिल यादव

एएसपी ने कहा- ऐसी घटना ही नहीं हुई, टीआई बोले- छोटी सी बात थी यह

 बलवा ड्रिल के अश्रु गैस गोले से दो बच्चे घायल हो गए?

एएसपी : ऐसी कोई घटना हुई ही नहीं। हमारी बलवा ड्रिल पूरी कंट्रोल में हुई थी।

टीआई : छोटी सी घटना थी।

 बच्चों को एमवाय अस्पताल ले जाया गया, एमएलसी भी हुई?

एएसपी : हो नहीं सकता, मैं तो पूरे दिन लाइन में थी। थाने से रिपोर्ट आने दो तब देखेंगे।

टीआई : उसमें रिपोर्ट क्या होगी, ट्रेनिंग गलत इंटेशन से तो नहीं हुई।