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देड़तलाई/बुरहानपुर. 5.33 करोड़ रुपए की लागत से बने बोरबन तालाब की नहर टेस्टिंग में ही फूट गई। इससे आसपास के खेतों में पानी भर गया। तेज बहाव के कारण करीब 15 एकड़ में लगी फसलों को नुकसान हुआ है। नहर का करीब 10 मीटर का हिस्सा ढह गया है, वहीं 200 मीटर से ज्यादा हिस्से में दीवार में बड़ी-बड़ी दरारें पड़ गई हैं। घटना बुधवार रात को हुई। नहर फूटने से खेतों में पानी भर गया। गुरुवार सुबह किसान खेत पहुंचे तो हर तरफ पानी और बर्बाद फसल देख आंखों से आंसू बह निकले। उन्होंने नहर के घटिया निर्माण के साथ ही अफसर और इंजीनियर्स पर लापरवाही बरतने का आरोप लगाया है।
किसानों ने बताया नहर निर्माण के दौरान मुरूम के साथ मिट्टी का भराव किया गया था। इस कारण नहर पानी का तेज बहाव नहीं सह पाई और इसका 10 मीटर से ज्यादा का हिस्सा ढह गया। दीवारों में बड़ी-बड़ी दरारें भी आई हैं। किसान सुखदेव हीराजी, किशोर फालतू, प्रभु भाऊ, पन्ना कुकू पटेल, सुंदरलाल बोंदर, रामचंद्र हीरालाल और राजा किशन हीरालाल ने बताया नहर में पानी छोड़ने की कोई सूचना नहीं दी गई थी। नहर चालू करने से पहले अधिकारियों ने किसानों से कोई संपर्क नहीं किया। रात में अचानक पानी छोड़ दिया। इससे मूंग, गेहूं, चना और गन्ना फसल को नुकसान हुआ है।
किसानों ने कहा- पहले भी बिना बताए छोड़ा था पानी
किसानों ने बताया इससे पहले भी बिना बताए नहर में पानी छोड़ दिया गया था। पानी का बहाव कम होने के बाद भी नहर की दीवार में जगह-जगह दरारें पड़ गई थी। इनसे पानी रिस रहा था। किसानों ने अफसरों को इसकी सूचना दी लेकिन किसी ने भी इस ओर ध्यान नहीं दिया। इसका नतीजा यह हुआ कि बुधवार रात नहर फूट गई।
मोटर पंप लगाकर निकाला पानी
किसान चंपालाल मोती ने बताया खेत में 2 एकड़ में गन्ना फसल की कटाई चल रही थी। कटा हुआ गन्ना खेत में पड़ा था। नहर फूटने से खेत में पानी भर गया। मजदूरों के पैर घुटनों तक कीचड़ में धंस रहे थे, इसलिए उन्होंने कटा हुआ गन्ना उठाने से मना कर दिया। खेत में भरा पानी पांच हॉर्स पावर का मोटर पंप लगाकर नाले में बहाया। खेत से दूर ट्रैक्टर-ट्रॉली खड़ी कर गन्ना उठवाया। इसमें चार से पांच हजार रुपए का अतिरिक्त खर्च आया। चंपालाल ने बताया शकर कारखाना 15 तारीख को बंद होने का नोटिस जारी हुआ है। 12 तारीख को फसल में पानी भर गया। खेत में अब भी 50 टन से ज्यादा गन्ना खड़ा हुआ है। पांच-छह दिन में जमीन सूखेगी, तब तक कटाई नहीं हो सकती। ऐसे में नुकसान उठाना पड़ेगा।
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